अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की जबरदस्त मजबूती के चलते मैक्सिकन पेसो पर बिकवाली का गहरा दबाव बन गया है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मैक्सिकन पेसो की विनिमय दर बढ़कर दो महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है और यूएसडी/एमएक्सएन की जोड़ी 17.50 के स्तर की तरफ बढ़ रही है। डॉलर इंडेक्स में 0.57 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई है, जिससे यह जुलाई के अंत के बाद पहली बार 101.00 के अहम स्तर के पार निकल गया है। इस तेज उछाल के पीछे अमेरिका में उम्मीद से बेहतर कारोबारी आंकड़े और फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की तरफ से ब्याज दरों में आगे भी बढ़ोतरी के स्पष्ट संकेत शामिल हैं।
मजबूत अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और नीतिगत सख्ती के संकेत
एसएंडपी ग्लोबल के ताजा आर्थिक आंकड़ों के अनुसार, सितंबर के महीने में अमेरिका के विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियों में उल्लेखनीय विस्तार दर्ज किया गया है। यह विस्तार बाजार के अनुमानों और अगस्त के आंकड़ों दोनों से कहीं बेहतर रहा है। अर्थव्यवस्था में इस मजबूती ने केंद्रीय बैंक को ब्याज दरों में सख्ती बनाए रखने का अतिरिक्त आधार दिया है। फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के बयानों के बाद मुद्रा बाजार में 2027 के अंत तक लगभग 93 आधार अंकों की नीतिगत सख्ती की संभावना जताई जाने लगी है।
फेडरल रिजर्व के कई प्रमुख नीति निर्माताओं ने मुद्रास्फीति के जोखिमों को लेकर आगाह किया है। बॉस्टन फेड की सुसान कॉलिन्स ने महंगाई के बढ़े हुए जोखिमों की ओर इशारा करते हुए ब्याज दरों में बढ़ोतरी का समर्थन किया। इसके अलावा रिचमंड फेड के अध्यक्ष थॉमस बार्किन ने स्पष्ट किया कि महंगाई के झटकों को सामान्य होने में अभी वक्त लग सकता है। वहीं फेड गवर्नर माइकल बार ने हाल ही में कहा था कि मुद्रास्फीति को दो प्रतिशत के तय लक्ष्य पर समय पर वापस लाने के लिए दरों में और इजाफा करना बेहद जरूरी हो सकता है।
बैंक्सिको की आगामी बैठक और घटता ब्याज दर अंतर
एक तरफ जहां अमेरिकी केंद्रीय बैंक आक्रामक रुख अपनाए हुए है, वहीं दूसरी तरफ मैक्सिको के केंद्रीय बैंक, जिसे बैंक्सिको के नाम से जाना जाता है, की मौद्रिक नीति बैठक 24 सितंबर को निर्धारित है। प्राइम टर्मिनल के आंकड़ों के अनुसार, मनी मार्केट में इस बात की 79 प्रतिशत संभावना जताई जा रही है कि बैंक्सिको अपनी प्रमुख ब्याज दर को 6.50 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखेगा। अमेरिका और मैक्सिको के बीच ब्याज दरों का यह अंतर घटकर 2015 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिससे पेसो का आकर्षण विदेशी निवेशकों के बीच कमजोर पड़ा है।
मैक्सिको के केंद्रीय बैंक का प्राथमिक उद्देश्य मुद्रास्फीति को स्थिर और कम बनाए रखना है। बैंक का मुद्रास्फीति लक्ष्य तीन प्रतिशत है, जिसमें दो से चार प्रतिशत का दायरा निर्धारित है। जब महंगाई बढ़ती है, तो केंद्रीय बैंक उधारी लागत बढ़ाकर मांग को नियंत्रित करने की कोशिश करता है। सामान्य तौर पर ऊंची ब्याज दरें बेहतर यील्ड की पेशकश कर पेसो को सहारा देती हैं, लेकिन दरों के स्थिर रहने और अमेरिकी दरों के चढ़ने से यह समर्थन घटता जा रहा है।
तकनीकी संकेत और प्रमुख कारोबारी स्तर
चार्ट पर मूल्य व्यवहार को देखें तो यूएसडी/एमएक्सएन ने 17.42 पर स्थित अपने 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज यानी एसएमए को पार कर लिया है, जिससे 17.50 के स्तर की ओर बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। लाइव मार्केट डेटा के अनुसार यह जोड़ी 17.49 के स्तर पर कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद भाव 17.29 से 1.20 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 16.85 से 18.77 के बीच रहा है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई 14 की अवधि पर 73 के स्तर पर पहुंच गया है, जो ओवरबॉट स्थिति का संकेत देता है। अगस्त 2024 के बाद यह पहला मौका है जब आरएसआई ओवरबॉट जोन में आया है। पिछली बार जब यह सूचकांक 70 के स्तर से ऊपर गया था, तब यह विनिमय दर 20.06 तक पहुंच गई थी।
तकनीकी संकेतकों में एमएसीडी 0.06 पर है जबकि इसका सिग्नल 0.01 पर दर्ज हुआ है, जो तेजी का रुझान दिखा रहा है। एडीएक्स 33 पर मजबूती का संकेत दे रहा है और स्टोकेस्टिक में फास्ट लाइन 85 तथा सिग्नल लाइन 77 पर है। यदि यूएसडी/एमएक्सएन 17.50 के पार टिकता है, तो अगला मनोवैज्ञानिक स्तर 18.00 का होगा। इसके ऊपर 31 मार्च का उच्च स्तर 18.16, उसके बाद 25 नवंबर 2025 का 18.53 का स्तर और फिर 5 नवंबर का शीर्ष स्तर 18.77 प्रतिरोध के रूप में काम करेगा। दूसरी ओर गिरावट की स्थिति में 200-दिवसीय एसएमए 17.42 पर पहला सपोर्ट है, जिसके बाद 100-दिवसीय एसएमए 17.26, 50-दिवसीय एसएमए 17.15 और 17.00 का स्तर अहम सहारा साबित होगा। दैनिक अस्थिरता एटीआर 0.14 दर्ज की गई है।
मैक्सिकन पेसो के बुनियादी कारक और वैश्विक रुझान
मैक्सिकन पेसो लैटिन अमेरिकी देशों में सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा है। इसका मूल्य मैक्सिको की घरेलू अर्थव्यवस्था, बैंक्सिको की नीतियों, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश और विदेशों विशेषकर अमेरिका में रहने वाले मैक्सिकन नागरिकों द्वारा भेजे जाने वाले धन यानी रेमिटेंस पर काफी हद तक निर्भर करता है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतें भी पेसो पर सीधा असर डालती हैं क्योंकि मैक्सिको तेल का एक बड़ा निर्यातक है। हाल के वर्षों में नियरशोरिंग की प्रक्रिया, जिसके तहत कंपनियां अपनी विनिर्माण क्षमता और सप्लाई चेन को अमेरिका के नजदीक स्थानांतरित कर रही हैं, मैक्सिको के लिए बड़ा उत्प्रेरक बनकर उभरी है।
एक उभरते बाजार की मुद्रा होने के कारण मैक्सिकन पेसो तब बेहतर प्रदर्शन करता है जब वैश्विक वित्तीय बाजारों में जोखिम लेने का माहौल सकारात्मक होता है। अनिश्चितता या बाजार में उतार-चढ़ाव के समय निवेशक जोखिम भरी संपत्तियों से निकलकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिससे पेसो में कमजोरी आती है। आर्थिक वृद्धि में तेजी, कम बेरोजगारी और बेहतर कारोबारी विश्वास पेसो को ताकत देते हैं, जबकि कमजोर आंकड़े इसे नुकसान पहुंचाते हैं।
अन्य वैश्विक संपत्तियों और मुद्राओं की स्थिति
अमेरिकी डॉलर में आई मजबूती का असर केवल मैक्सिकन पेसो तक सीमित नहीं रहा है बल्कि अन्य वैश्विक संपत्तियों पर भी देखा गया। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी में गिरावट तेज हो गई है, जिससे यह अगस्त की शुरुआत में देखे गए 0.7000 के निचले स्तरों पर आ गई है। अब निवेशकों की नजर घरेलू रोजगार रिपोर्ट पर टिकी है। वहीं डॉलर और जापानी येन की जोड़ी एशियाई सत्र में 157.00 के मध्य स्तर पर मंडराती रही। बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी अल्पकालिक ब्याज दर को 7-2 के बहुमत से 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत किए जाने के बावजूद मौद्रिक रुख नरम रहने से येन में अपेक्षित मजबूती नहीं दिखी। हालांकि सरकारी हस्तक्षेप की आशंका येन की गिरावट को सीमित कर रही है।
कमोडिटी बाजार में सोने पर भी भारी बिकवाली का दबाव देखा गया। अमेरिकी डॉलर की तेज रिकवरी और अमेरिकी मनी मार्केट में आई मजबूती के चलते सोने की लगातार दो दिन की बढ़त थम गई। सोना प्रति ट्रॉय औंस 4,300 डॉलर के स्तर से नीचे फिसलकर सप्ताह के निचले स्तर पर आ गया। दूसरी ओर ट्रम्प-शी बैठक से पहले अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता का दौर संपन्न होने की खबर पर बाजारों ने कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दी है। कुल मिलाकर वैश्विक केंद्रीय बैंकों के अलग-अलग नीतिगत रुख से विदेशी मुद्रा बाजारों में भारी हलचल देखने को मिल रही है।


















