अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की बढ़ती ताकत और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतों में आए हालिया उछाल ने मध्य और पूर्वी यूरोप की मुद्राओं पर गंभीर दबाव बना दिया है। क्षेत्रीय स्तर पर ब्याज दरों में आक्रामक बदलाव के बावजूद ब्याज दर का अंतर सीमित बना हुआ है, जिसके चलते इस क्षेत्र की स्थानीय करेंसियों के सामने कमजोरी का बड़ा खतरा मंडरा रहा है। वित्तीय विश्लेषकों के अनुसार, इस पूरे भौगोलिक क्षेत्र में पोलैंड की मुद्रा पोलिश ज़्लॉटी के सबसे कमजोर प्रदर्शन करने की आशंका है, क्योंकि वहां के केंद्रीय बैंक का मौद्रिक रुख अन्य पड़ोसी देशों की तुलना में काफी नरम बना हुआ है।
मुद्रा बाजार में बदला रुख और ब्याज दरों का समीकरण
बाजार की धारणा में अचानक हुए बदलाव के बाद पूरे क्षेत्र में ब्याज दरों की तेज रीप्राइसिंग देखी गई है। अलग-अलग अवधियों के यील्ड कर्व पर दरें एक बार फिर अपने पुराने उच्च स्तरों पर पहुंच गई हैं। इसके बावजूद, ब्याज दरों का फैलाव या तो स्थिर रहा है या सिकुड़ गया है, जिससे विदेशी पूंजी प्रवाह को संभालने में मदद नहीं मिल पा रही है। आईएनजी के ईएमईए एफएक्स और फिक्स्ड इनकम रणनीतिकार फ्रांतिसेक ताबोरस्की के मुताबिक, ऊर्जा कीमतों में रीबाउंड और डॉलर की मजबूती मिलकर मध्य और पूर्वी यूरोपीय मुद्राओं के लिए एक नकारात्मक वातावरण तैयार कर रहे हैं। ताबोरस्की ने कहा कि इस पूरे माहौल में क्षेत्रीय कमजोरी आगे भी बनी रहने की संभावना है और केंद्रीय बैंक के नरम रुख के कारण पोलिश ज़्लॉटी का प्रदर्शन सबसे कमजोर रह सकता है।
एशियाई कारोबार में प्रमुख वैश्विक मुद्राओं की हलचल
वैश्विक आर्थिक संकेतों के बीच गुरुवार के एशियाई कारोबारी सत्र में कई प्रमुख करेंसियों में उठापटक देखने को मिली। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.7000 के स्तर की ओर फिसलता नजर आया। यह गिरावट ऑस्ट्रेलिया के अगस्त रोजगार आंकड़ों के सामने आने के बाद दर्ज की गई। सरकारी आंकड़ों में बेरोजगारी दर बढ़कर 4.6 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि बाजार का अनुमान 4.5 प्रतिशत रहने का था। हालांकि, रोजगार परिवर्तन के आंकड़ों ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया और यह 39.5 हजार दर्ज किया गया। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली उच्चस्तरीय बैठक से पहले मुद्रा व्यापारी काफी सतर्क नजर आ रहे हैं।
जापानी येन और बैंक ऑफ जापान का बड़ा फैसला
जापानी येन के मोर्चे पर भी व्यापक गतिविधियां देखने को मिलीं। एशियाई सत्र के दौरान यूएसडी/जेपीवाई तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर से फिसलकर 158.00 के करीब बना रहा। जापान में सरकारी बॉन्ड यील्ड में जोरदार उछाल और मुद्रा बाजार में संभावित सरकारी हस्तक्षेप के जोखिमों ने येन को सहारा दिया। दूसरी ओर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से आक्रामक रुख के दांव और ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के बल पर डॉलर इंडेक्स अपने दो महीने के उच्च स्तर को बरकरार रखने में सफल रहा।
इसी बीच, बैंक ऑफ जापान ने मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने 7-2 के बहुमत से अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया। यह निर्णय वित्तीय बाजारों की हफ्तों पुरानी उम्मीदों के पूरी तरह अनुकूल रहा, जिसके कारण निवेशकों में किसी अप्रत्याशित झटके की स्थिति नहीं बनी।
सोने में ठहराव और वाशिंगटन-बीजिंग व्यापार समझौता विस्तार
कीमती धातुओं के बाजार में सोना अपने एक सप्ताह के निचले स्तर के करीब सीमित दायरे में कारोबार करता दिखा। निवेशक वाशिंगटन में डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच बातचीत के नतीजों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। बाजार को किसी बहुत बड़े समझौते की उम्मीद कम ही है, फिर भी दुर्लभ खनिजों, तकनीकी प्रतिबंधों और मौजूदा व्यापार संघर्ष विराम के विस्तार पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने बताया कि अमेरिका और चीन द्विपक्षीय व्यापार संघर्ष विराम को आगे बढ़ाने पर सहमत हो गए हैं। पहले यह समयसीमा नवंबर में समाप्त होने वाली थी, जिसे अब बढ़ाकर 10 जनवरी तक कर दिया गया है। यह निर्णय स्कॉट बेसेंट और चीन के उप प्रधानमंत्री हे लिफेंग के बीच वाशिंगटन में हुई एक अनिर्धारित बैठक के तुरंत बाद सामने आया।



















