वैश्विक वित्तीय बाजार इस समय भारी अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। भू-राजनीतिक संकट और केंद्रीय बैंकों की नीतियों के बीच मुद्राओं का प्रदर्शन लगातार बदल रहा है। इस उथल-पुथल के बीच, प्रमुख मुद्रा जोड़ी EUR/USD 1.14 के स्तर के आसपास बनी हुई है। बाजार की समग्र धारणा कमजोर होने के बावजूद यूरो ने एक आश्चर्यजनक लचीलापन दिखाया है। वर्तमान में यह जोड़ी 1.14 के करीब कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद से लगभग 0.10 प्रतिशत की मामूली बढ़त को दर्शाता है। पिछले बावन हफ्तों में इस जोड़ी ने 1.13 से 1.20 का दायरा देखा है। यह स्थिरता ऐसे समय में आई है जब मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ती शत्रुता और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने यूरोपीय महाद्वीप के लिए गंभीर आर्थिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। निवेशकों की नजर अब पूरी तरह से इस बात पर है कि केंद्रीय बैंक इस दोहरी चुनौती का सामना कैसे करते हैं।
केंद्रीय बैंकों की नीतियां और ऊर्जा संकट का प्रभाव
बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि यूरो को मुख्य रूप से यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ईसीबी) द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों से समर्थन मिल रहा है। एमयूएफजी के विशेषज्ञों के विश्लेषण से पता चलता है कि ऊर्जा की कीमतों में हालिया वृद्धि ने बाजार के प्रतिभागियों को एक नई दिशा में सोचने पर मजबूर कर दिया है। कच्चे तेल और गैस की बढ़ती लागत के जवाब में, निवेशक अब यह मानकर चल रहे हैं कि ईसीबी और फेडरल रिजर्व जैसे प्रमुख केंद्रीय बैंक अपनी मौद्रिक नीतियों को और अधिक सख्त करेंगे। इस आक्रामक दृष्टिकोण के परिणामस्वरूप शॉर्ट-टर्म यील्ड अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। जब ऊर्जा की कीमतें बढ़ती हैं, तो मुद्रास्फीति का दबाव भी बढ़ता है, जिससे केंद्रीय बैंकों को दरों में वृद्धि करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। यही उम्मीद यूरो को अचानक गिरने से रोक रही है, भले ही व्यापक आर्थिक परिदृश्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
तकनीकी स्तर और आर्थिक विकास की चिंताएं
सोसाइटी जेनरेल के विश्लेषण के अनुसार, रातोंरात 1.1406 से 1.1436 के दायरे में रहने वाला EUR/USD का स्तर 2-वर्षीय स्प्रेड के मुकाबले अभी भी सस्ता प्रतीत होता है। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों में किसी बड़े उछाल को लेकर दृढ़ विश्वास की कमी है। जैसे-जैसे खाड़ी युद्ध का दायरा फैल रहा है और तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, यूरोपीय अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बढ़ता जा रहा है। तकनीकी दृष्टिकोण से देखें, तो मौजूदा मूल्य कार्रवाई एक दीर्घकालिक डाउनट्रेंड का संकेत देती है। 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (ईएमए) 1.15 पर है, जबकि 200-दिवसीय ईएमए 1.16 पर है, जो एक तकनीकी डेथ क्रॉस बनाता है। आरएसआई वर्तमान में 45 के स्तर पर है, जो एक तटस्थ लेकिन कमजोर गति को दर्शाता है। इन तकनीकी संकेतकों और ऊर्जा की उच्च कीमतों के कारण विकास दर पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को देखते हुए, निकट भविष्य में 1.1480 या 1.1510 के स्तर पर वापस लौटना यूरो के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा क्षेत्र में पिछले दो हफ्तों की भारी अस्थिरता के बावजूद तेल और विदेशी मुद्रा के बीच सीधा संबंध काफी हद तक मौन बना हुआ है।
ब्रिटिश पाउंड और अमेरिकी डॉलर की स्थिति
यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान, अन्य प्रमुख मुद्राओं में भी महत्वपूर्ण हलचल देखने को मिल रही है। GBP/USD जोड़ी अपने रिबाउंड को बनाए रखने में विफल रही है और गुरुवार को 1.3400 के स्तर से नीचे रुकी हुई है। इस जोड़ी की बढ़त मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर में आए मामूली उछाल के कारण सीमित हो गई है। इसके अतिरिक्त, यूनाइटेड किंगडम के मुद्रास्फीति के आंकड़े उम्मीद से अधिक ठंडे रहे हैं, जिसने बैंक ऑफ इंग्लैंड पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव कम कर दिया है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे पाउंड पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। इस बीच, यूरो लगातार दूसरे दिन 1.1400 से ऊपर अपनी सकारात्मक गति बनाए हुए है, क्योंकि बाजार ईसीबी के आगामी ब्याज दर के फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।
कच्चे तेल में उछाल और सोने की कीमतों में गिरावट
कमोडिटी बाजार में भी भू-राजनीतिक तनाव का गहरा असर देखने को मिल रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान की आशंकाएं तेज हो गई हैं। इसके परिणामस्वरूप, अमेरिकी कच्चे तेल की कीमतें पिछले छह हफ्तों के उच्चतम स्तर 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। ऊर्जा की इन ऊंची कीमतों ने वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति की चिंताओं को फिर से भड़का दिया है, जिससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और अधिक बढ़ोतरी की उम्मीदें मजबूत हुई हैं। दूसरी ओर, सोने की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। गुरुवार के यूरोपीय सत्र में सोना 4,100 डॉलर के प्रमुख स्तर के आसपास अपना पुलबैक बनाए हुए है। फेडरल रिजर्व की आक्रामक नीतियों की संभावना ने सोने जैसी गैर-उपज वाली संपत्तियों के आकर्षण को कम कर दिया है, क्योंकि ऊंचे रिटर्न वाले बांड निवेशकों को अधिक लुभा रहे हैं।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में नए संकेत और तकनीकी स्तर
जहां पारंपरिक वित्तीय बाजार और कमोडिटी क्षेत्र दबाव का सामना कर रहे हैं, वहीं क्रिप्टोकरेंसी बाजार एक अलग ही कहानी बयां कर रहा है। बिटवाइज़ के मुख्य निवेश अधिकारी मैट होगन के अनुसार, अगला क्रिप्टो बुल मार्केट ब्लॉकचेन-आधारित बुनियादी ढांचे और पारंपरिक वित्त के बीच बढ़ते अभिसरण से प्रेरित हो सकता है। होगन की हालिया रिपोर्ट यह तर्क देती है कि क्रिप्टो बाजार अपने निचले स्तर से बाहर निकलने के शुरुआती संकेत दिखा रहा है। उदाहरण के लिए, 1 जुलाई के बाद से प्रमुख टेक इंडेक्स नैस्डैक 100 में 6 प्रतिशत की गिरावट आई है, लेकिन इसी अवधि में बिटकॉइन ने 9 प्रतिशत की ठोस बढ़त हासिल की है। यह विचलन निवेशकों की बदलती प्राथमिकताओं को दर्शाता है। वहीं, ऑल्टकॉइन बाजार में रिपल (XRP) और स्टेलर (XLM) तकनीकी स्तरों के इर्द-गिर्द सावधानी से कारोबार कर रहे हैं। XRP वर्तमान में अपने 50-दिवसीय ईएमए पर कड़े रेजिस्टेंस का परीक्षण कर रहा है, जबकि XLM 0.187 डॉलर के सपोर्ट जोन के आसपास समेकित हो रहा है। बाजार के डेरिवेटिव्स डेटा मिले-जुले संकेत दे रहे हैं, जिसमें मामूली मंदी का झुकाव है, जो यह बताता है कि ट्रेडर अभी भी अगली बड़ी चाल को लेकर अनिश्चित हैं।


















