ईरान में शुरू हुए सैन्य संघर्ष के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। महंगाई के नए झटकों से निपटने के लिए दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने अपनी मौद्रिक नीतियों को सख्त करना शुरू कर दिया है। जहां कई प्रमुख बैंकों ने दरें बढ़ाई हैं, वहीं विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है। इसके असर से यूरो और ब्रिटिश पाउंड दबाव में आ गए हैं। इस बीच, कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई हैं और अमेरिका में डीज़ल का क्रैक स्प्रेड ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
केंद्रीय बैंकों की सख्त रणनीति और मुद्रास्फीति का मुकाबला
ईरान संकट के बाद से ही वैश्विक वित्तीय परिदृश्य में ब्याज दरों को लेकर अनुमान बदल गए हैं। संघर्ष की शुरुआत के बाद से ही कई केंद्रीय बैंकों ने दरों में बढ़ोतरी की घोषणा की है। रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया, यूरोपियन सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ जापान ने इस अवधि में ब्याज दरें बढ़ाई हैं। रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के मामले में, युद्ध शुरू होने से पहले ही मुद्रास्फीति के जोखिम काफी बढ़ चुके थे, जिसके चलते वह पहले ही तीन बार दरें बढ़ा चुका था।
दूसरी ओर, अमेरिका का फेडरल रिज़र्व इस दौड़ में अभी थोड़ा सतर्क नजर आ रहा है। वित्तीय बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि जो केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति के झटके को क्षणिक मानने के बजाय समय रहते आक्रामक रुख अपनाते हैं, बाजार उन्हें मध्यम अवधि में बेहतर परिणाम देता है। यदि भविष्य में कोई अन्य आर्थिक झटका आता है, तो निवेशकों को उम्मीद होगी कि ये बैंक अधिक मजबूती से प्रतिक्रिया देंगे।
विदेशी मुद्रा बाजार: EUR/USD और GBP/USD पर दबाव
विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की रिकवरी से अन्य प्रमुख मुद्राओं पर असर पड़ा है। यूरो-डॉलर (EUR/USD) जोड़ी मंगलवार को यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान 1.1600 के स्तर के पास संघर्ष करती नजर आई। रातोंरात हुई मामूली बढ़त के बाद यूरो दबाव में बना हुआ है। लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार, EUR/USD फिलहाल 1.16 के आसपास कारोबार कर रहा है, जो इसके 52-सप्ताह के 1.13 से 1.20 के दायरे में है। बाजार प्रतिभागी अब यूरोज़ोन के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (HICP) के प्रारंभिक आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं ताकि नई दिशा मिल सके। तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो EUR/USD का 14-दिवसीय RSI 54 पर है, जबकि 20-दिवसीय सपोर्ट 1.15 और रेजिस्टेंस 1.17 के पास स्थित है।
ब्रिटिश पाउंड में भी गिरावट का रुख देखा गया है। GBP/USD यूरोपीय सत्र में हल्की कमजोरी के साथ 1.3550 के स्तर से नीचे कारोबार कर रहा है। मध्य पूर्व में जारी तनाव और फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की तेज होती संभावनाओं ने अमेरिकी डॉलर को समर्थन दिया है, जिससे पाउंड पर दबाव बढ़ गया है।
कमोडिटी और ऊर्जा बाजार: सोने में नरमी, क्रूड और डीज़ल में उबाल
सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की कीमतों में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। सोना 4,430 डॉलर प्रति औंस के करीब कारोबार कर रहा है, जो इसके लगभग डेढ़ हफ्ते के निचले स्तर के बेहद करीब है। फेडरल रिज़र्व के अध्यक्ष केविन वॉश की हालिया टिप्पणियों के बाद बाजार में जल्द ही ब्याज दरें बढ़ने की सट्टेबाजी तेज हो गई है। ऊंची ब्याज दरों की संभावना से बिना ब्याज देने वाली संपत्ति जैसे सोने की मांग पर विपरीत असर पड़ा है।
दूसरी ओर, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ऊर्जा की ऊंची कीमतें, केंद्रीय बैंकों की सख्त नीतियां और राजकोषीय जोखिम प्रीमियम इस रुझान के मुख्य कारण हैं। मध्य पूर्व में तनाव के चलते कच्चा तेल फिर से 90 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में पहुंच गया है। हालांकि तेल बाजार में यह उछाल बहुत बड़ा नहीं था, लेकिन इसने लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें रहने की धारणा को मजबूत किया है।
तेल बाजार भले ही ऊपर से शांत दिखे, लेकिन डीज़ल बाजार में बड़ा उछाल देखा जा रहा है। अमेरिका में अल्ट्रा-लो सल्फर डीज़ल फ्यूचर्स और WTI के बीच का अंतर यानी डीज़ल क्रैक स्प्रेड पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है। इसने 102.00 डॉलर प्रति बैरल से अधिक का सर्वकालिक रिकॉर्ड इंट्राडे स्तर छुआ है, जो रिफाइनिंग मार्जिन में भारी दबाव को दर्शाता है।
क्रिप्टो बाजार: प्रमुख टोकन पर मंडराता खतरा
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में पिछले हफ्ते हुई दोहरे अंकों की भारी गिरावट के बाद कमजोरी बनी हुई है। रिपल (XRP), कार्डानो (ADA) और डॉजकॉइन (DOGE) जैसे प्रमुख एसेट अपने महत्वपूर्ण एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) के निचले स्तर पर तत्काल सपोर्ट की तलाश कर रहे हैं। तकनीकी विश्लेषण यह चेतावनी दे रहा है कि बुलिश मोमेंटम सुस्त पड़ने से इन क्रिप्टोकरेंसी में आगे और गिरावट आ सकती है।



















