वैश्विक ऊर्जा पारगमन (ट्रांजिट) के बदलते समीकरणों के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जारी रुकावटों के कारण मध्य पूर्व से कच्चे तेल के प्रवाह का एक बड़ा हिस्सा अब लाल सागर और बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य की ओर स्थानांतरित हो गया है। इस रणनीतिक बदलाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रणालियों को क्षेत्रीय सैन्य संघर्षों के प्रति पहले से कहीं अधिक संवेदनशील बना दिया है। प्रमुख वित्तीय संस्थान एमयूएफजी के विश्लेषक माइकल वान ने इन सुरक्षा खतरों, समुद्री नाकेबंदी की आशंकाओं और वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों के संभावित रुख को लेकर विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया है। विश्लेषण के अनुसार, सुरक्षा संबंधी गंभीर चुनौतियों के बावजूद यदि अंततः कोई समाधान निकलता है, तो कच्चे तेल की कीमतें अपने पिछले उच्चतम संघर्षकालीन स्तरों से नीचे बनी रह सकती हैं।
हुती विद्रोहियों की समुद्री नाकेबंदी की धमकी और सऊदी गठबंधन की कार्रवाई
यमन के हुती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी लागू करने की हालिया घोषणा ने अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी क्षेत्र में बड़ी चिंता पैदा कर दी है। हुती विद्रोहियों का दावा है कि वे यह कड़ा कदम यमन की राजधानी की सऊदी अरब द्वारा की जा रही घेराबंदी के विरोध में उठा रहे हैं। इस गंभीर खतरे के सामने आने के बाद, यमन में सक्रिय सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने कड़ा रुख अपनाया है। इस गठबंधन ने लाल सागर के दक्षिणी छोर पर स्थित बेहद महत्वपूर्ण बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से गुजरने वाले वाणिज्यिक और मालवाहक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष परिचालन उपायों को लागू करना शुरू कर दिया है।
ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का महत्व और एशियाई देशों पर प्रभाव
मध्य पूर्व के तेल बुनियादी ढांचे में सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन एक बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस पाइपलाइन के माध्यम से सऊदी अरब से हर दिन लगभग 40 लाख (4 मिलियन) बैरल कच्चा तेल लाल सागर के रास्ते दुनिया के विभिन्न हिस्सों में भेजा जाता है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में लगातार उत्पन्न हो रही बाधाओं के कारण वर्तमान में कच्चे तेल का वैश्विक परिवहन पूरी तरह से लाल सागर और बाब-अल-मंडेब के सुरक्षित नौवहन पर निर्भर हो गया है। यदि इस संवेदनशील मार्ग पर तेल के प्रवाह में कोई प्रभावी रुकावट आती है, तो इसका सबसे सीधा और गंभीर असर उन एशियाई देशों पर पड़ेगा जो अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं और कच्चे तेल की निरंतर आपूर्ति के लिए पूरी तरह से मध्य पूर्व पर निर्भर हैं।
लंबे समय तक नाकेबंदी की कम संभावना का तकनीकी विश्लेषण
हालांकि नाकेबंदी की धमकियां लगातार मिल रही हैं, लेकिन एमयूएफजी के विश्लेषक का मानना है कि इस मार्ग पर तेल के प्रवाह में कोई भी व्यवधान लंबे समय तक टिकने की संभावना बहुत कम है। व्यावहारिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो हुती विद्रोहियों के पास वर्तमान में इतनी बड़ी और निरंतर नाकेबंदी बनाए रखने के लिए आवश्यक सैन्य और तकनीकी क्षमताएं मौजूद नहीं हैं। इसके अलावा, समुद्र के खुले पानी में उनके लिए यह स्पष्ट रूप से पहचानना भी एक जटिल व्यावहारिक चुनौती है कि कौन से जहाज सीधे तौर पर सऊदी अरब से संबंधित हैं और कौन से जहाज अन्य देशों के हैं। इस क्षमता की कमी के कारण इस मार्ग पर किसी स्थायी संकट की आशंका कम हो जाती है।
अमेरिका की घरेलू राजनीति और वैश्विक राजनयिक प्रयास
तेल बाजार और कीमतों को नियंत्रित रखने में पर्दे के पीछे चल रहे राजनयिक प्रयास भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों के माध्यम से पृष्ठभूमि में लगातार विचार-विमर्श और शांति वार्ताएं की जा रही हैं। इसके साथ ही, अमेरिका में आगामी मिड-टर्म चुनावों के मद्देनजर वहां की राजनीतिक परिस्थितियां और अमेरिकी सेना के पास सैन्य गोला-बारूद की कथित कमी जैसे कारक भी बड़े सैन्य टकराव की संभावना को सीमित करते हैं। इन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को देखते हुए एमयूएफजी को उम्मीद है कि तेल की कीमतों में पूर्व में देखे गए रिकॉर्ड उछाल की पुनरावृत्ति होने की संभावना कम है।
विदेशी मुद्रा बाजार में हलचल और पाउंड का रुख
मंगलवार को यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान विदेशी मुद्रा बाजार में भी मिश्रित गतिविधियां देखने को मिलीं। मुद्रा बाजार में GBP/USD मुद्रा जोड़ी सकारात्मक दायरे में कारोबार करते हुए 1.3450 के आसपास बनी रही। यूनाइटेड किंगडम के श्रम बाजार के आंकड़ों के अनुसार, तीन महीने से मई तक की अवधि में यूके की आईएलओ बेरोजगारी दर 4.9 प्रतिशत पर स्थिर रही, जो कि विश्लेषकों के 5 प्रतिशत के अनुमान से थोड़ी बेहतर थी। हालांकि, उम्मीद से बेहतर रहने के बावजूद यह आंकड़ा ब्रिटिश पाउंड को आगे और अधिक मजबूत करने में विफल रहा। व्यापारी वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही अनिश्चितता और यूके में चल रहे राजनीतिक बदलावों को देखते हुए अत्यधिक सावधानी बरत रहे हैं।
यूरोपीय मुद्रा और सोने की कीमतों पर भू-राजनीति का असर
दूसरी तरफ, EUR/USD मुद्रा जोड़ी 1.1400 के स्तर से ठीक ऊपर एक संकीर्ण दायरे में सपाट कारोबार करती नजर आई। सोमवार की मजबूती के बाद अमेरिकी डॉलर में आई हल्की गिरावट ने यूरो को कुछ सहारा दिया, लेकिन अमेरिका-ईरान संघर्ष से जुड़ी अनिश्चितता ने इस मुद्रा की बढ़त की संभावनाओं को सीमित रखा। बाजार के निवेशकों की निगाहें अब यूरोपीय सेंट्रल बैंक की आगामी नीतिगत घोषणाओं पर टिकी हैं, जिससे यूरो के मूल्य निर्धारण को नई दिशा मिल सकती है। कमोडिटी बाजार में, सोमवार के उतार-चढ़ाव के बाद सोने की कीमतों में कुछ तेजी आई और यह मंगलवार को $4,100 प्रति औंस के करीब पहुंच गई। इसके बावजूद, मध्य पूर्व के अशांत माहौल और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाने की आशंकाओं के कारण सोने की कीमतों में तेज उछाल आने का रास्ता फिलहाल आसान नहीं लग रहा है।
डिजिटल परिसंपत्ति बाजार और शिबा इनु में तेजी
क्रिप्टोकरेंसी के क्षेत्र में, प्रमुख डिजिटल टोकन शिबा इनु ने अपनी बढ़त का दायरा बढ़ाया और यह $0.0000042 के स्तर से ऊपर कारोबार करता देखा गया। पिछले कारोबारी सत्र में एक महत्वपूर्ण तकनीकी पड़ाव के रूप में गिरती हुई ट्रेंडलाइन को पार करने के बाद इस मीम कॉइन में सुधार का सिलसिला तेज हुआ है। इस सकारात्मक रुख को ऑन-चेन डेटा और डेरिवेटिव बाजार के सुधरते संकेतकों से भी मजबूती मिल रही है। क्रिप्टोक्वांट के एक्सचेंज नेटफ्लो डेटा के विश्लेषण से पता चलता है कि 17 जुलाई से लगातार पांच दिनों तक एक्सचेंजों से टोकन का शुद्ध आउटफ्लो (निकासी) दर्ज किया गया है। यह डेटा इस बात का संकेत है कि निवेशक इस डिजिटल एसेट को बेचने के बजाय अपने पास सुरक्षित रख रहे हैं, जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव कम हुआ है।


















