ब्रिटिश पाउंड स्टर्लिंग ने बुधवार को शुरुआती एशियाई कारोबारी सत्र में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत प्रदर्शन किया है, जहाँ यह 1.3550 के स्तर के आसपास स्थिर बना हुआ है। इस मुद्रा जोड़ी को अपने 100-दिन के सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) का मजबूत समर्थन मिल रहा है, जो मध्यम अवधि के तेजी के रुझान को बनाए रखने के लिए एक प्रमुख तकनीकी स्तर माना जाता है। यूनाइटेड किंगडम से सामने आई नई आर्थिक नीतियों, वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में बदलावों और केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों से जुड़ी अपेक्षाओं के कारण पाउंड में यह मजबूती देखने को मिल रही है।
हालिया तकनीकी चार्ट पाउंड और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी में एक स्थिर सुधार का संकेत दे रहे हैं। हालांकि शुरुआती कारोबार में 1.3560 के पास स्थित बोलिंगर बैंड की मध्य रेखा पर प्रतिरोध देखा जा रहा है, लेकिन गिरावट के मौकों पर खरीदारी का रुख बना हुआ है। बाजार के कारोबारी अब इस बात पर नजर रख रहे हैं कि क्या पाउंड इस दायरे से बाहर निकलकर एक बड़ी तेजी की ओर बढ़ता है या नहीं।
तकनीकी ढांचा और प्रमुख चार्ट स्तर
दैनिक तकनीकी परिदृश्य पर नजर डालें तो जीबीपी/यूएसडी जोड़ी में हल्का बुलिश यानी तेजी का रुख बना हुआ है। इसका मुख्य कारण यह है कि कीमत लगातार 100-दिन के सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) और बोलिंगर बैंड की निचली रेखा के ऊपर बनी हुई है। यह तकनीकी स्थिति दर्शाती है कि जब भी कीमत में गिरावट आती है, निवेशक निचले स्तरों पर खरीदारी कर रहे हैं। हालांकि, 20-दिन के बोलिंगर बैंड की मध्य रेखा 1.3560 के पास बनी हुई है, जो तत्काल रुकावट का काम कर रही है।
तकनीकी संकेतक पाउंड के खरीदारों के लिए अनुकूल नजर आ रहे हैं। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 54 से 55 के स्तर के आसपास बना हुआ है, जो यह दर्शाता है कि बाजार में तेजी की गति बनी हुई है लेकिन यह अभी ओवरबॉॉट यानी अत्यधिक खरीदारी वाले क्षेत्र में नहीं पहुंची है। इसके अलावा मूविंग एवरेज संरचना में 50-दिन का एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) 200-दिन के EMA के ऊपर बना हुआ है, जिसे बाजार में गोल्डन क्रॉस माना जाता है। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में कीमत 1.36 के पास कारोबार कर रही है, जबकि 52-सप्ताह का दायरा 1.30 से 1.38 के बीच रहा है और कारोबारी वॉल्यूम अपने 20-दिन के औसत के बराबर है।
यदि पाउंड के खरीदार 1.3560 के स्तर पर बोलिंगर बैंड की मध्य रेखा के ऊपर दैनिक बंद हासिल करने में सफल रहते हैं, तो अगला लक्ष्य बोलिंगर बैंड की ऊपरी रेखा 1.3660 के पास होगा। इसके बाद पाउंड के लिए अगला प्रमुख मनोवैज्ञानिक स्तर 1.3700 का होगा। वहीं नीचे की तरफ पहला मजबूत समर्थन 1.3465 के आसपास बोलिंगर बैंड की निचली रेखा पर स्थित है। यदि कीमत इससे नीचे आती है, तो 1.3445 के स्तर पर 100-दिन का SMA एक बहुत मजबूत समर्थन प्रदान करेगा जहाँ खरीदारों द्वारा तेजी के रुझान का बचाव करने की संभावना है।
संस्थागत विश्लेषकों का आकलन और अल्पकालिक दायरा
यूओबी ग्रुप के विदेशी मुद्रा विश्लेषकों ने पाउंड की हालिया चाल पर विस्तृत विश्लेषण पेश किया है। विश्लेषकों के अनुसार बीते सप्ताह के अंत में जीबीपी/यूएसडी जोड़ी एक सीमित दायरे में सिमटी रही। पिछले शुक्रवार को पाउंड 1.3482 और 1.3550 के बीच कारोबार करने के बाद 1.3518 पर मामूली 0.05% की गिरावट के साथ बंद हुआ था। इस उतार-चढ़ाव से बाजार की दिशा में कोई बड़ा बदलाव दर्ज नहीं किया गया था।
यूओबी ग्रुप के विशेषज्ञों ने पहले अनुमान जताया था कि पाउंड 1.3490 से 1.3540 के दायरे में कारोबार करेगा। हालांकि वास्तविक चाल इस अनुमान से थोड़ी ऊपर रही और पाउंड 1.3508 के निचले स्तर से बढ़कर 1.3547 तक पहुंच गया। संस्थागत विश्लेषकों का मानना है कि हालांकि तेजी की गति में बहुत बड़ा उछाल नहीं आया है, लेकिन पाउंड का झुकाव 1.3565 के स्तर की ओर ऊपर की तरफ बना हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि 1.3600 का प्रमुख प्रतिरोध स्तर फिलहाल तुरंत पार होने की संभावना कम है। वहीं दूसरी तरफ यदि कीमत 1.3520 के स्तर को तोड़कर नीचे आती है (जबकि 1.3530 पर मामूली समर्थन मौजूद है), तो तेजी का यह रुझान कमजोर पड़ सकता है। अगले एक से तीन सप्ताह के मध्यम अवधि के नजरिए से यूओबी ग्रुप ने पाउंड के प्रति तटस्थ दृष्टिकोण बनाए रखा है और अनुमान जताया है कि यह 1.3480 से 1.3600 के बीच कारोबार करता रहेगा।
ब्रिटेन के नीतिगत सुधार, क्षेत्रीय अधिकार और वित्तीय लक्ष्य
यूनाइटेड किंगडम के आर्थिक परिदृश्य को मजबूत करने के लिए सरकार द्वारा कई नीतिगत घोषणाएं की गई हैं। ब्रिटेन के चांसलर ने सोमवार को योजनाओं की घोषणा की जिसके तहत शहर के क्षेत्रों को निजी निवेश आकर्षित करने के लिए अधिक अधिकार दिए जाएंगे। यह कदम प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम की उस योजना का हिस्सा है जिसके तहत केंद्रीय सरकार से शक्तियों को स्थानीय प्रशासनों को स्थानांतरित किया जा रहा है।
इसके साथ ही चांसलर हीली ने सरकारी खर्च में वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। सरकार की प्राथमिकताओं में कारोबारियों और आम जनता के लिए बढ़ते खर्च को नियंत्रित करना शामिल है। सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किया है कि 2029 में होने वाले अगले आम चुनाव तक नियामक लागतों में 25% की कटौती की जाएगी।
इन आर्थिक नीतियों का मुख्य उद्देश्य ब्रिटेन में कारोबारी विश्वास बढ़ाना, निजी निवेश को प्रोत्साहित करना और क्षेत्रीय उत्पादकता को मजबूत करना है। मुद्रा बाजार के जानकार इन नीतिगत सुधारों को दीर्घकालिक विकास को गति देने वाले कदम के रूप में देख रहे हैं, जिससे ब्रिटिश परिसंपत्तियों में विदेशी पूंजी प्रवाह को बढ़ावा मिल सकता है।
पाउंड स्टर्लिंग का ऐतिहासिक इतिहास और वैश्विक स्थिति
विश्व वित्तीय बाजार में पाउंड स्टर्लिंग का एक ऐतिहासिक महत्व है। यह दुनिया की सबसे पुरानी मुद्रा है जो 886 ईस्वी से आज तक लगातार चलन में है। यह यूनाइटेड किंगडम की आधिकारिक मुद्रा है और वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा रखे जाने वाले प्रमुख विदेशी मुद्रा भंडार का हिस्सा है।
वर्ष 2022 के वैश्विक केंद्रीय बैंक आंकड़ों के अनुसार, पाउंड स्टर्लिंग दुनिया में चौथी सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा है। अंतर्राष्ट्रीय विदेशी मुद्रा बाजार के कुल दैनिक लेन-देन में पाउंड की हिस्सेदारी 12% है, जो रोजाना औसतन 630 अरब डॉलर के बराबर होती है। इस मुद्रा को जारी करने और मौद्रिक नीतियों को लागू करने की जिम्मेदारी बैंक ऑफ इंग्लैंड की है जिसकी स्थापना 1694 में हुई थी।
विदेशी मुद्रा बाजार में पाउंड के कई प्रमुख कारोबारी जोड़े हैं। पाउंड और अमेरिकी डॉलर का जोड़ा जिसे केबल कहा जाता है (जो 1858 में बिछाई गई ट्रांसअटलांटिक टेलीग्राफ केबल के नाम पर रखा गया है), कुल विदेशी मुद्रा कारोबार का 11% हिस्सा रखता है। इसके अलावा पाउंड और जापानी येन का जोड़ा जिसे ड्रैगन कहा जाता है, 3% हिस्सेदारी रखता है, जबकि यूरो और पाउंड का जोड़ा 2% हिस्सा रखता है।
केंद्रीय बैंक की कार्यप्रणाली और आर्थिक आंकड़ों का प्रभाव
पाउंड स्टर्लिंग के मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति है। बैंक ऑफ इंग्लैंड का प्राथमिक लक्ष्य मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसके तहत मुद्रास्फीति की दर को लगभग 2% के आसपास सीमित रखने का प्रयास किया जाता है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों का उपयोग मुख्य हथियार के रूप में करता है।
जब अर्थव्यवस्था में महंगाई अत्यधिक बढ़ जाती है, तो बैंक ऑफ इंग्लैंड ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है। इससे कर्ज लेना महंगा हो जाता है और बाजार में मांग कम होने से महंगाई नियंत्रित होती है। विदेशी मुद्रा बाजार के लिए ऊंची ब्याज दरें पाउंड को मजबूत बनाती हैं, क्योंकि दुनिया भर के निवेशक ऊंचे रिटर्न की तलाश में ब्रिटेन की परिसंपत्तियों में अपना पैसा लगाते हैं।
इसके विपरीत जब मुद्रास्फीति बहुत कम हो जाती है या आर्थिक विकास सुस्त पड़ता है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती पर विचार करता है। सस्ती ब्याज दरों से व्यापारिक गतिविधियों और निवेश को बढ़ावा मिलता है। लेकिन कम ब्याज दरों के कारण विदेशी निवेशकों का रुझान कम हो सकता है जिससे पाउंड के मूल्य में गिरावट आ सकती है।
इसके अतिरिक्त आर्थिक आंकड़े भी पाउंड की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP), मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज PMI तथा रोजगार के आंकड़े अर्थव्यवस्था की सेहत का आकलन करते हैं। मजबूत आर्थिक आंकड़े पाउंड को मजबूती देते हैं, जबकि कमजोर आंकड़े पाउंड में बिकवाली का दबाव बनाते हैं। व्यापार संतुलन यानी ट्रेड बैलेंस का आंकड़ा भी महत्वपूर्ण होता है, जो देश के निर्यात और आयात के अंतर को मापता है। जब किसी देश के उत्पादों की दुनिया में मांग बढ़ती है, तो उस मुद्रा की मांग भी बढ़ती है जिससे पाउंड मजबूत होता है।
विदेशी मुद्रा बाजार का वैश्विक परिदृश्य और अन्य परिसंपत्तियां
बुधवार के एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान केवल पाउंड ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार की अन्य प्रमुख मुद्राओं और परिसंपत्तियों में भी महत्वपूर्ण हलचल देखने को मिल रही है। विभिन्न देशों के आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों के आधार पर बाजार की दिशा तय हो रही है।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) की जोड़ी 0.7200 के स्तर के ऊपर मजबूत बनी हुई है। चीन की ओर से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) और उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) के आंकड़े आने के बावजूद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में मजबूती देखी गई। इसे रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं और अमेरिकी डॉलर की कमजोरी से समर्थन मिला है। अब निवेशकों की नजर अमेरिका के आने वाले मुद्रास्फीति आंकड़ों पर टिकी है।
दूसरी ओर यूएसडी/जेपीवाई (USD/JPY) जोड़ी पर एशियाई सत्र में बिकवाली का दबाव देखा गया। रॉयटर्स तानकन व्यापार सर्वेक्षण के मजबूत आंकड़ों ने बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की उम्मीदों को बल दिया है, जिससे जापानी येन में तेजी आई और यह मंगलवार को दर्ज किए गए सात महीने के निचले स्तर के पास बना रहा।
कीमती धातुओं में सोने ने एक सप्ताह के निचले स्तर से रिकवरी करते हुए यूरोपीय सत्र की शुरुआत से पहले $4,400 प्रति औंस का स्तर फिर से हासिल कर लिया। अमेरिकी डॉलर में आई गिरावट और जापानी येन में तेजी के कारण सोने की तीन दिनों से जारी गिरावट थम गई।
ऊर्जा बाजार में हालांकि कच्चे तेल की कीमतें शांत नजर आ रही हैं, लेकिन डीजल बाजार में ऐतिहासिक तेजी देखने को मिली है। अमेरिका में अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स और WTI क्रूड का अंतर यानी क्रैक स्प्रेड पहली बार $100 प्रति बैरल के पार निकल गया और इसने $102.00 प्रति बैरल का सर्वकालिक उच्च स्तर छू लिया।
तकनीकी स्तरों का सारांश और भावी रणनीति
जीबीपी/यूएसडी के तकनीकी परिदृश्य का सारांश देखें तो पाउंड वर्तमान में 1.3445 के 100-दिन के SMA और 1.3520 से 1.3530 के समर्थन क्षेत्र के ऊपर मजबूत स्थिति में है। दैनिक पिवट गणना के अनुसार इंट्राडे समर्थन स्तर S1 और S2 दोनों 1.3500 पर स्थित हैं, जबकि प्रमुख प्रतिरोध स्तर R1 और R2 1.3600 के आसपास केंद्रित हैं।
एवरेज ट्रू रेंज (ATR) 0.01 पर बनी हुई है जो दैनिक उतार-चढ़ाव के लिए जोखिम प्रबंधन का सही दायरा प्रदान करती है। एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स (ADX) 21 के स्तर पर है जो यह दर्शाता है कि दीर्घकालिक तेजी के रुझान के भीतर वर्तमान में समेकन जारी है। कारोबारी अब अगली बड़ी तेजी की पुष्टि के लिए 1.3560 के मध्य-बैंड स्तर के ऊपर दैनिक क्लोजिंग पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।



















