अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में दो दिनों की तेजी के बाद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर एक बार फिर दबाव में आ गया है, जिससे AUD/USD की जोड़ी फिसलकर 0.7000 के बेहद अहम मनोवैज्ञानिक स्तर के आसपास कारोबार करने लगी है। हालांकि अमेरिकी डॉलर पर कच्चे तेल की कमजोर कीमतों की वजह से बिकवाली का कुछ दबाव बना हुआ है, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था से जुड़े मिले-जुले संकेतों ने घरेलू मुद्रा की बढ़त की रफ्तार को थाम दिया है। वित्तीय बाजार अब 3 नवंबर को होने वाली रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की बैठक पर पूरी निगाहें गड़ाए हुए हैं, जहां नीतिगत दरों में 25 बेसिस प्वाइंट्स की वृद्धि की प्रबल संभावना जताई जा रही है।
घरेलू अर्थव्यवस्था में लचीलापन और नीतिगत सख्ती के बीच फंसा ऑस्ट्रेलियाई डॉलर
व्यापक आर्थिक परिदृश्य को देखें तो ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था कई जी10 समकक्ष देशों की तुलना में काफी बेहतर स्थिति में दिख रही है। आंतरिक उपभोक्ता मांग और सकारात्मक जीडीपी विस्तार ने मुद्रा को गहरा गोता लगाने से रोक रखा है। रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया का सतर्क और डेटा पर आधारित कड़ा रुख भी इस बात का संकेत देता है कि देश में महंगाई अब भी नीति निर्माताओं के लिए चिंता का बड़ा सबब बनी हुई है। हालांकि तकनीकी मोर्चे पर AUD/USD अभी भी 0.7060 के पास स्थित अपने अहम 200-दिवसीय एसएमए के नीचे फंसा हुआ है, और जब तक इस स्तर के ऊपर टिकाऊ मजबूती नहीं आती, तब तक निकट अवधि में तकनीकी दृष्टिकोण दबावग्रस्त ही बना रहेगा।
सितंबर महीने के प्रारंभिक आंकड़े कारोबार जगत में सुस्ती की ओर इशारा करते हैं। मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स सितंबर में मामूली बढ़त दर्ज करते हुए 49.5 पर पहुंचा, जो पहले 49.6 था। वहीं सेवा क्षेत्र का सूचकांक पिछले 51.9 से गिरकर 47.8 पर आ गया, जिससे सेवाओं के क्षेत्र में संकुचन के साफ संकेत मिले हैं। व्यापार संतुलन के मोर्चे पर भी देश को कुछ राहत मिली है, जहां अगस्त का व्यापार अधिशेष 0.495 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर दर्ज हुआ। यह आंकड़ा पिछले महीने के 1.351 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के संशोधित अधिशेष से काफी कम है, जो पहले 1.923 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर आंका गया था।
जीडीपी वृद्धि और रोजगार के कमजोर आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
आर्थिक वृद्धि से जुड़े नवीनतम आंकड़ों ने निवेशकों के उत्साह को कुछ ठंडा किया है। वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में देश का सकल घरेलू उत्पाद तिमाही आधार पर 0.4 प्रतिशत की दर से बढ़ा, जो पिछली तिमाही के 0.3 प्रतिशत से थोड़ा बेहतर था। इसके विपरीत, वार्षिक आधार पर जीडीपी की रफ्तार घटकर 2.1 प्रतिशत रह गई, जो पहले 2.5 प्रतिशत पर दर्ज की गई थी। इस धीमी रफ्तार से यह स्पष्ट होता है कि उच्च उधारी लागत का असर अब उत्पादन और विस्तार पर दिखने लगा है।
रोजगार बाजार ने भी सितंबर में बाजार के जानकारों को काफी निराश किया। देश में बेरोजगारी की दर 4.7 प्रतिशत पर स्थिर रही, जबकि अगस्त के आंकड़े को संशोधित करके 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 4.7 प्रतिशत कर दिया गया था। इसके साथ ही सितंबर में शुद्ध रोजगार में 39,300 नौकरियों की तेज गिरावट देखी गई, जिसने अगस्त महीने में हुई 29,300 नौकरियों की बढ़ोतरी को पूरी तरह धो दिया। उल्लेखनीय है कि अगस्त का रोजगार आंकड़ा पहले 39,500 की वृद्धि के रूप में दर्ज किया गया था। इस तेज गिरावट ने संकेत दिया है कि ब्याज दरों के ऊंचे स्तरों के चलते कंपनियां नई भर्तियां करने में सतर्कता बरत रही हैं।
महंगाई का जिन्न अब भी बेकाबू, 2028 तक लक्ष्य प्राप्ति की उम्मीद
ऑस्ट्रेलिया में मुद्रास्फीति के दबाव में फिर से उभार देखा गया है। तीसरी तिमाही में केंद्रीय बैंक द्वारा सबसे करीबी से ट्रैक किया जाने वाला ट्रिम्ड मीन सीपीआई पिछले बारह महीनों के दौरान 3.7 प्रतिशत पर पहुंच गया। वहीं हेडलाइन सीपीआई सालाना आधार पर 3.9 प्रतिशत के स्तर पर स्थिर रहा। मेलबर्न इंस्टीट्यूट का उपभोक्ता मुद्रास्फीति अपेक्षा सूचकांक भी अक्टूबर में उछलकर 5.3 प्रतिशत दर्ज किया गया, जिसने यह साफ कर दिया कि आम जनता के बीच आने वाले दिनों में कीमतें ऊंची रहने की आशंकाएं बढ़ रही हैं।
इन ताजा आंकड़ों ने केंद्रीय बैंक के सामने महंगाई को काबू में लाने के काम को अधूरा छोड़ दिया है। नीति निर्माताओं का आकलन है कि मुद्रास्फीति के तय लक्ष्य के दायरे में वापस लौटने में वर्ष 2028 की शुरुआत तक का समय लग सकता है। यही कारण है कि बैंक फिलहाल किसी त्वरित मौद्रिक ढील के बजाय धैर्य बनाए रखने पर जोर दे रहा है। ब्याज दरों में भारी इजाफे के बावजूद मांग और लागत का दबाव बना हुआ है, जिससे नीतिगत दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने का दबाव बढ़ रहा है।
चीन के आंकड़ों से मिला स्थिरता का सहारा, लेकिन रफ्तार सीमित
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए ऐतिहासिक रूप से सबसे बड़ा उत्प्रेरक रहने वाला चीन इस बार स्थिरता तो दे रहा है, लेकिन वह तेज उछाल नहीं ला पा रहा है जो अतीत में देखा गया था। जुलाई से सितंबर की अवधि में चीनी अर्थव्यवस्था ने सालाना आधार पर 4.5 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि दर्ज की। औद्योगिक उत्पादन में साल-दर-साल 5.5 प्रतिशत और साल की शुरुआत से अब तक 5.3 प्रतिशत का विस्तार दर्ज हुआ, जिससे विनिर्माण गतिविधियों में वापसी का संकेत मिला। सितंबर में चीन का व्यापार अधिशेष 133.53 अरब डॉलर रहा, जहां आयात और निर्यात दोनों ने मजबूत प्रदर्शन किया। वहीं खुदरा बिक्री में सालाना आधार पर 1.1 प्रतिशत की वृद्धि ने खपत में धीमा सुधार दिखाया।
चीन के विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के सर्वेक्षणों में भी सुधार दिखा है। नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के अनुसार मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई बढ़कर सितंबर में 50.1 पर पहुंच गया जो पहले 49.8 था, जबकि सर्विसेज पीएमआई 49.0 से सुधरकर 50.2 दर्ज किया गया। रेटिंगडॉग के निजी सर्वेक्षणों में भी विस्तार जारी रहा, जहां मैन्युफैक्चरिंग 52.1 और सर्विसेज 51.6 पर रहा। मूल्य मोर्चे पर भी राहत दिखी, जहां सितंबर में सीपीआई सालाना 0.9 प्रतिशत बढ़ा और मासिक स्तर पर 0.2 प्रतिशत की बढ़त रही। वहीं उत्पादक मूल्य सूचकांक पिछले बारह महीनों में 5.0 प्रतिशत बढ़ा, जो पिछले महीने के 3.8 प्रतिशत से अधिक है। इन आंकड़ों ने ऑस्ट्रेलियाई व्यापार को सहारा तो दिया है, लेकिन मुद्रा को जोरदार उछाल देने में यह नाकाफी साबित हो रहा है।
मिशेल बुलॉक का सख्त संदेश और 3 नवंबर का फैसला
सीनेट इकोनॉमिक्स लेजिस्लेशन कमेटी के समक्ष अपने हालिया संबोधन में रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर मिशेल बुलॉक ने स्पष्ट किया कि नीति निर्माताओं को यह बारीकी से परखना होगा कि अब तक की गई दर वृद्धि महंगाई को उचित समय में लक्ष्य पर लाने के लिए पर्याप्त है या नहीं। उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि उधारी की ऊंची लागत आम परिवारों के लिए मुश्किलें पैदा कर रही है, लेकिन साथ ही जोर देकर कहा कि केंद्रीय बैंक ऊंची मुद्रास्फीति को लंबे समय तक टिकने नहीं दे सकता।
बुलॉक के अनुसार मौद्रिक नीति का असर अर्थव्यवस्था पर कुछ समय के अंतराल के बाद दिखाई देता है, इसलिए हालिया दरों का पूर्ण प्रभाव अभी घरेलू बाजार में पूरी तरह सामने आना बाकी है। कच्चे तेल और ईंधन की ऊंची कीमतों ने एक बार फिर मुद्रास्फीति के परिदृश्य को जटिल बना दिया है। इसके चलते 3 नवंबर को होने वाली बैठक में आधिकारिक नकद दर को बढ़ाकर 4.85 प्रतिशत करने की संभावनाओं पर बाजार पूरी गंभीरता से दांव लगा रहा है।
वायदा और विकल्प बाजार में मंदड़ियों का दबदबा
कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार 20 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में गैर-व्यावसायिक शुद्ध शॉर्ट सौदे बढ़कर लगभग 127,300 अनुबंधों तक पहुंच गए। हालांकि साप्ताहिक आधार पर लगभग 10,000 अनुबंधों की वृद्धि पिछले हफ्ते की तुलना में कुछ कम रही, लेकिन पिछले चार सप्ताह का संचयी परिवर्तन नकारात्मक 80,500 अनुबंधों पर पहुंच गया है। कुल ओपन इंटरेस्ट घटकर लगभग 333,000 अनुबंधों पर आ गया, जो यह दर्शाता है कि मंदड़ियों की स्थिति ऐतिहासिक रूप से अत्यंत आक्रामक बनी हुई है।
विकल्प बाजार की स्थिति भी दिलचस्प संकेत दे रही है। पिछले एक महीने में मुद्रा में लगभग 1.0 प्रतिशत की बढ़त के साथ रिस्क रिवर्सल में 0.098 वोलैटिलिटी पॉइंट्स का सुधार हुआ, जो ऐतिहासिक रूप से अपेक्षित 0.095 सुधार के बिल्कुल अनुरूप है। हालांकि तीन महीने के रिस्क रिवर्सल में 0.302 वोलैटिलिटी पॉइंट्स की गिरावट दर्शाती है कि लंबी अवधि का परिदृश्य अब भी सुस्त है। ऐसे में बाजार में एक तेज शॉर्ट-कवरिंग रैली का जोखिम लगातार बना हुआ है, जो अप्रत्याशित खबरों पर विक्रेताओं को अचानक असहज कर सकती है।
तकनीकी स्तर और आगामी प्रतिरोध सीमाएं
चार्ट विश्लेषण के अनुसार ऊपर की ओर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को 0.7033 पर स्थित 100-दिवसीय एसएमए पर प्रारंभिक बाधा का सामना करना होगा। इसके बाद 0.7057 पर 200-दिवसीय एसएमए और 0.7072 पर 55-दिवसीय एसएमए स्थित हैं, जिसके ठीक ऊपर 0.7079 का क्षैतिज अवरोध मौजूद है। यदि तेजी का दौर आगे बढ़ता है तो 0.7278 से 0.7283 का दायरा एक बड़ा प्रतिरोध क्षेत्र बनेगा, जिसके ऊपर 0.7661 का दूरगामी स्तर दिखाई दे सकता है।
नीचे की ओर गिरावट की स्थिति में सबसे पहला मजबूत सहारा 0.6833 के स्तर पर मौजूद है। इसके टूटने पर 0.6660 और 0.6593 के निचले स्तर खुल सकते हैं। यदि वैश्विक स्तर पर बिकवाली और गहरी होती है, तो मध्यम अवधि में 0.6414 और 0.6373 के प्रमुख आधार स्तर परीक्षण के दायरे में आ सकते हैं। फिलहाल जब तक रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया और वैश्विक जोखिम धारणा से कोई नया मजबूत संकेत नहीं मिलता, तब तक यह जोड़ी सीमित दायरे में झूलती रह सकती है।



















