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सऊदी और रूसी तेल ठिकानों पर ड्रोन हमलों के बाद डब्ल्यूटीआई क्रूड 97.50 डॉलर के पारबाज़ार
22 अक्तू॰ 2026, 6:49 am (5 घंटे पहले)· 0

सऊदी और रूसी तेल ठिकानों पर ड्रोन हमलों के बाद डब्ल्यूटीआई क्रूड 97.50 डॉलर के पार

सऊदी अरामको के शयबा तेल क्षेत्र और रूसी रिफाइनरी ढांचे पर हुए ड्रोन हमलों के कारण वैश्विक आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, जिससे डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमतें 97.70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गईं।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में उस समय अचानक तेजी देखने को मिली जब सऊदी अरब और रूस के प्रमुख तेल ढांचों पर हुए ड्रोन हमलों ने कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर गंभीर आशंकाएं पैदा कर दीं। लगातार तीन कारोबारी सत्रों की गिरावट पर ब्रेक लगाते हुए वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान 97.70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। सऊदी अरामको के महत्वपूर्ण शयबा तेल क्षेत्र पर हुए सटीक ड्रोन हमले में दो लोगों की जान चली गई, जिसने पश्चिम एशिया में पहले से सुलग रहे भू-राजनीतिक तनाव को कई गुना बढ़ा दिया है। इस अप्रत्याशित हमले और सुरक्षा जोखिमों की गंभीरता को देखते हुए संयुक्त राज्य अमेरिका ने सऊदी अरब में स्थित अपने दूतावासों से चुनिंदा राजनयिक कर्मचारियों और उनके परिवारों को तुरंत निकलने का आदेश जारी कर दिया है।

रूसी तेल ढांचे पर यूक्रेन के हमले और वैश्विक आपूर्ति का गणित

ऊर्जा आपूर्ति के मोर्चे पर तनाव केवल खाड़ी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। यूक्रेन द्वारा रूसी तेल बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर किए गए ड्रोन हमलों ने संकट को और गहरा कर दिया है। इन हमलों को कीव के उस स्पष्ट इरादे के रूप में देखा जा रहा है, जिसका मकसद डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन के बीच हुए समझौते के तहत होने वाले मॉस्को के डीजल निर्यात को बाधित करना है। तेल शोधन कारखानों और परिवहन मार्गों पर इस तरह के प्रहार वैश्विक स्तर पर डीजल और प्रसंस्कृत पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता पर सीधा असर डालते हैं। आपूर्ति श्रृंखला में अचानक आए इस व्यवधान ने खरीदारों को आगामी सर्दियों और औद्योगिक जरूरतों के मद्देनजर सतर्क कर दिया है।

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हालांकि भू-राजनीतिक मोर्चे पर जोखिम प्रीमियम तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन तेल की कीमतों में एकतरफा उछाल पर कुछ अन्य मूलभूत कारकों के कारण लगाम भी लग सकती है। प्रमुख उत्पादक देशों की ओर से बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के प्रयास जारी हैं। पश्चिम एशिया से होने वाला तेल निर्यात अब युद्ध से पहले के स्तर के करीब पहुंच रहा है। सऊदी अरब ने अगस्त के महीने में अपने कच्चे तेल के निर्यात में 7.9 प्रतिशत की ठोस वृद्धि दर्ज की, जो मार्च के बाद का उसका उच्चतम स्तर है। इसके अलावा, वैश्विक बाजार में तरल ईंधन की उपलब्धता को सहारा देने के लिए रूस द्वारा गुरुवार को ही अमेरिका के लिए अपनी पहली डीजल खेप रवाना किए जाने की योजना है। यह आपूर्ति प्रवाह कीमतों पर ऊपर की तरफ एक सीमा बांधने का काम कर सकता है।

वित्तीय बाजारों पर असर और रणनीतिकारों का दृष्टिकोण

कच्चे तेल की कीमतों में आई इस हलचल के बीच वैश्विक वित्तीय बाजारों में भी व्यापक फेरबदल देखने को मिल रहा है। ब्राउन ब्रदर्स हैरीमैन के रणनीतिकारों ने रेखांकित किया है कि ब्रेंट क्रूड की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के अपने हालिया उच्च स्तर के करीब टिकी हुई हैं, जबकि अन्य वित्तीय संपत्तियां खुद को इस नए समीकरण के अनुसार ढाल रही हैं। वित्तीय बाजारों में एक ओर जहां बॉन्ड यील्ड में लगातार बढ़त दर्ज की जा रही है, वहीं दूसरी ओर शेयर बाजार भी अपनी गिरावट से उबरने की कोशिशों को आगे बढ़ा रहे हैं। रणनीतिकारों का ध्यान विशेष रूप से यूरोप पर केंद्रित है, जहां फ्रांस के 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड और जर्मनी के यील्ड के बीच का अंतर 24 साल के रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया है, जो यूरोजोन में वित्तीय तनाव और ऋण जोखिमों की ओर इशारा करता है।

मुद्रा बाजार के संदर्भ में ब्राउन ब्रदर्स हैरीमैन का अवलोकन है कि अमेरिकी डॉलर अपने पिछले दिन के निचले स्तरों के ठीक ऊपर मिला-जुला रुख दिखा रहा है, जिसे विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं के बीच ब्याज दर के अंतर से सहारा मिल रहा है। इस पूरी पृष्ठभूमि पर राबोबैंक का विश्लेषण भू-राजनीतिक बदलावों की ओर इशारा करता है। राबोबैंक का तर्क है कि 'पैक्स अमेरिकाना' यानी पूर्ण अमेरिकी वर्चस्व के युग का कमजोर पड़ना पश्चिम एशिया में भविष्य में और अधिक अस्थिरता का संकेत देता है। इस दृष्टिकोण से स्पष्ट होता है कि बदलती विश्व व्यवस्था तेल और उससे जुड़ी तमाम संपत्तियों पर एक स्थाई और ऊंचा भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम बनाए रख सकती है।

वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट: गुणवत्ता, मानक और कुशिंग हब की भूमिका

डब्ल्यूटीआई क्रूड अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कारोबार किए जाने वाले कच्चे तेल के सबसे अहम ग्रेड्स में से एक है। यह ब्रेंट क्रूड और दुबई क्रूड के साथ दुनिया के तीन सबसे बड़े संदर्भ मानकों में गिना जाता है। पेट्रोलियम शब्दावली में डब्ल्यूटीआई को अक्सर 'लाइट' और 'स्वीट' कहा जाता है। इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण इसका अपेक्षाकृत कम घनत्व यानी लो ग्रैविटी और सल्फर की बेहद कम मात्रा होना है। सल्फर की न्यूनतम मात्रा और हल्के घनत्व के कारण इसे रिफाइनरियों में परिष्कृत करना बेहद आसान होता है, और इससे पेट्रोल तथा डीजल जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पादों की अधिक मात्रा प्राप्त होती है।

डब्ल्यूटीआई का उत्पादन मुख्य रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका के तेल क्षेत्रों में होता है। इसके भंडारण और भौतिक वितरण का मुख्य केंद्र ओक्लाहोमा का कुशिंग शहर है। कुशिंग को वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र में 'द पाइपलाइन क्रॉसरोड्स ऑफ द वर्ल्ड' यानी दुनिया का पाइपलाइन चौराहा कहा जाता है। यह विशाल टर्मिनल अनगिनत पाइपलाइनों, भंडारण टैंकों और रिफाइनरी नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। जब भी अंतरराष्ट्रीय समाचारों या वित्तीय चैनलों पर तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव की बात होती है, तो न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज पर कारोबार होने वाला डब्ल्यूटीआई मूल्य ही प्राथमिक बेंचमार्क के रूप में उद्धृत किया जाता है।

मांग, आपूर्ति और भू-राजनीति से तय होती हैं कीमतें

किसी भी अन्य व्यापारिक जिंस की तरह कच्चे तेल की कीमतें भी अंततः मांग और आपूर्ति के बुनियादी नियमों से संचालित होती हैं। वैश्विक आर्थिक विकास दर में जब तेजी आती है, तो कल-कारखानों, माल ढुलाई और विमानन क्षेत्र में ईंधन की खपत बढ़ती है, जिससे तेल की मांग में इजाफा होता है। इसके विपरीत, यदि दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं मंदी या सुस्ती के दौर से गुजर रही हों, तो खपत घटने से कीमतें गिर जाती हैं। राजनीतिक अस्थिरता, क्षेत्रीय युद्ध और प्रमुख उत्पादक देशों पर लगाए जाने वाले आर्थिक प्रतिबंध आपूर्ति तंत्र को अचानक बाधित कर देते हैं, जिससे बाजार में कृत्रिम कमी पैदा होती है और कीमतें आसमान छूने लगती हैं।

इसके अलावा अमेरिकी मुद्रा का मूल्य भी कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। दुनिया भर में कच्चे तेल का अधिकांश लेन-देन अमेरिकी डॉलर में होता है। ऐसे में जब डॉलर कमजोर होता है, तो अन्य मुद्राओं का उपयोग करने वाले आयातकों के लिए तेल खरीदना अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है, जिससे वैश्विक मांग को बढ़ावा मिलता है। दूसरी ओर, जब डॉलर मजबूत होता है, तो गैर-अमेरिकी खरीदारों के लिए तेल की लागत बढ़ जाती है, जिससे मांग पर दबाव पड़ता है।

इन्वेंट्री रिपोर्ट्स का महत्व: एपीआई बनाम ईआईए

तेल बाजार के दैनिक और साप्ताहिक रुझानों को तय करने में अमेरिका से जारी होने वाले इन्वेंट्री आंकड़े निर्णायक भूमिका निभाते हैं। अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट और ऊर्जा सूचना प्रशासन द्वारा प्रकाशित साप्ताहिक भंडार रिपोर्टों पर दुनिया भर के ट्रेडर्स की पैनी नजर रहती है। इन रिपोर्टों में कच्चे तेल, गैसोलीन और डिस्टिलेट के भंडार में होने वाले बदलावों से यह साफ संकेत मिलता है कि वास्तविक समय में मांग और आपूर्ति की क्या स्थिति है। यदि डेटा दिखाता है कि तेल के भंडारों में भारी गिरावट आई है, तो इसका सीधा अर्थ निकाला जाता है कि रिफाइनरियों और उपभोक्ताओं की मांग मजबूत है, जिससे कीमतों में तेजी आती है। इसके विपरीत, भंडार में बढ़ोतरी आपूर्ति की अधिकता को दर्शाती है और कीमतों पर दबाव बनाती है।

समय सारिणी के अनुसार, अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट अपनी रिपोर्ट प्रत्येक मंगलवार को जारी करता है, जबकि ऊर्जा सूचना प्रशासन की आधिकारिक रिपोर्ट अगले दिन यानी बुधवार को सार्वजनिक होती है। ऐतिहासिक रूप से दोनों के निष्कर्ष लगभग एक समान दिशा दिखाते हैं और करीब 75 प्रतिशत मामलों में उनके आंकड़ों का अंतर 1 प्रतिशत से भी कम होता है। हालांकि, बाजार ऊर्जा सूचना प्रशासन के आंकड़ों को अधिक विश्वसनीय और आधिकारिक मानता है, क्योंकि यह अमेरिकी सरकार की एक स्वायत्त एजेंसी है और इसका डेटा संग्रह दायरा अत्यंत सख्त वैधानिक मानकों पर आधारित होता है।

ओपेक और ओपेक प्लस का उत्पादन नियंत्रण

अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की आपूर्ति को नियंत्रित करने में पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन यानी ओपेक की भूमिका केंद्रीय होती है। ओपेक 12 प्रमुख तेल उत्पादक देशों का एक समूह है, जो हर छह महीने में होने वाली अपनी मंत्रिस्तरीय बैठकों में सामूहिक रूप से सदस्य देशों के लिए उत्पादन कोटा निर्धारित करता है। जब यह संगठन उत्पादन कोटा घटाने का निर्णय लेता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति तंग हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप कीमतें तेजी से ऊपर चढ़ती हैं। दूसरी ओर, जब बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने या बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए ओपेक उत्पादन बढ़ाने का फैसला करता है, तो कीमतें नीचे की ओर फिसलने लगती हैं।

समय के साथ इस समीकरण में और अधिक प्रभावशीलता लाने के लिए ओपेक प्लस का गठन किया गया। ओपेक प्लस में मूल 12 सदस्यों के अलावा 10 अन्य गैर-ओपेक तेल उत्पादक देश शामिल हैं। इस विस्तारित गठबंधन में सबसे प्रमुख और शक्तिशाली सदस्य रूस है। रूस और सऊदी अरब की संयुक्त रणनीति पूरे ओपेक प्लस समूह के फैसलों की दिशा तय करती है। जब यह विस्तारित समूह मिलकर उत्पादन में कटौती या वृद्धि की घोषणा करता है, तो इसका असर सीधे तौर पर डब्ल्यूटीआई और ब्रेंट दोनों प्रमुख बेंचमार्क पर मिनटों के भीतर दिखाई देने लगता है।

फॉरेक्स और बुलियन बाजारों पर पड़ा मिला-जुला प्रभाव

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और भू-राजनीतिक उथल-पुथल ने विदेशी मुद्रा और कीमती धातुओं के बाजारों में भी तेज हलचल मचा दी है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर की जोड़ी 0.7030 से 0.7035 के स्तर के आसपास कारोबार करती दिखी, जो इसके मासिक शीर्ष स्तर के बेहद करीब है। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के अधिकारियों की हालिया सख्त और आक्रामक टिप्पणियों ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती प्रदान की है। इसके साथ ही अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आ रही गिरावट के कारण अमेरिकी डॉलर नए खरीदारों को आकर्षित करने के लिए संघर्ष कर रहा है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को अतिरिक्त सहारा मिला। हालांकि फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की अटकलों और भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने डॉलर की गिरावट को सीमित रखा है, जिससे खरीदारों को सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है।

दूसरी ओर, डॉलर बनाम जापानी येन में गुरुवार के एशियाई सत्र के दौरान सीमित दायरे में कारोबार देखा गया और यह 158.00 के ठीक ऊपर स्थिर रहा। बैंक ऑफ जापान द्वारा अगली ब्याज दर वृद्धि के समय को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण येन में तेजी के समर्थक बैकफुट पर दिखाई दे रहे हैं। अमेरिकी डॉलर भी गिरती बॉन्ड यील्ड के कारण अपने कई हफ्तों के निचले स्तर के आसपास बना हुआ है। इसके अतिरिक्त, जापानी अधिकारियों द्वारा मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप का जोखिम येन की गिरावट को थाम रहा है। आगामी सप्ताह में फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान दोनों की महत्वपूर्ण नीतिगत बैठकें होनी हैं, जिसके चलते ट्रेडर्स बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं।

सर्राफा बाजार की बात करें तो गुरुवार के एशियाई सत्र में सोने पर नए सिरे से बिकवाली का दबाव देखा गया। सोना पिछले दिन छुए गए अपने एक सप्ताह के निचले स्तर की ओर खिसक गया। तेल की कीमतों में तेजी के कारण महंगाई बढ़ने और उसके चलते फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की मजबूत होती संभावनाओं ने गैर-उपज वाली इस पीली धातु पर नकारात्मक असर डाला। हालांकि गिरती अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड ने भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिकी डॉलर की बढ़त को रोके रखा, जिसने सोने को 4,100 डॉलर प्रति औंस के अपने महत्वपूर्ण स्तर की रक्षा करने में मदद की। कुल मिलाकर, तेल के ठिकानों पर हुए इन हमलों ने न केवल ऊर्जा बाजार बल्कि संपूर्ण वैश्विक वित्तीय तंत्र को एक अनिश्चित और संवेदनशील मोड़ पर ला खड़ा किया है।

सवाल-जवाब

डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमत में अचानक उछाल क्यों आया?
सऊदी अरामको के शयबा तेल क्षेत्र पर ड्रोन हमले में दो लोगों के मारे जाने और रूसी तेल ढांचे पर यूक्रेन के हमलों के कारण आपूर्ति बाधित होने की आशंका से कीमतें 97.70 डॉलर के आसपास पहुंच गईं।
सऊदी अरब पर हुए हमले के बाद अमेरिका ने क्या कदम उठाया?
सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए संयुक्त राज्य अमेरिका ने सऊदी अरब में स्थित अपने दूतावासों से चुनिंदा कर्मचारियों और उनके परिजनों को सुरक्षित निकलने का निर्देश दिया है।
क्या कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी सीमित रह सकती है?
हां, क्योंकि सऊदी अरब ने अगस्त में अपने कच्चे तेल के निर्यात में 7.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है और रूस भी अमेरिका को डीजल की पहली खेप पहुंचाने जा रहा है, जिससे बाजार में आपूर्ति बढ़ सकती है।
डब्ल्यूटीआई और ब्रेंट क्रूड में क्या अंतर है?
डब्ल्यूटीआई अमेरिका से प्राप्त होने वाला हल्का और मीठा कच्चा तेल है जो कुशिंग से वितरित होता है, जबकि ब्रेंट क्रूड अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए एक अन्य प्रमुख वैश्विक बेंचमार्क है।
तेल इन्वेंट्री के लिए कौन से आंकड़े सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं?
अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट मंगलवार को और अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन बुधवार को साप्ताहिक आंकड़े जारी करते हैं, जिसमें सरकारी एजेंसी ईआईए के आंकड़ों को अधिक विश्वसनीय माना जाता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

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