अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में बुधवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ब्रिटिश पाउंड पर बिकवाली का दबाव देखा गया, जिससे पाउंड स्टर्लिंग अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 1.3250 के स्तर के आसपास कारोबार करता नजर आया। पिछले सत्र में दर्ज की गई हल्की बढ़त के बाद यह गिरावट कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी जारी रहने की आशंकाओं के कारण आई है। कच्चे तेल के महंगे होने से वैश्विक स्तर पर महंगाई दोबारा भड़कने का खतरा पैदा हो गया है, जिसने अमेरिकी डॉलर को अतिरिक्त मजबूती दी है। दुनिया भर के मुद्रा कारोबारी अब फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक के मिनट्स जारी होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जिससे अमेरिकी ब्याज दरों के भविष्य की दिशा तय होगी।
मुद्रा बाजारों में मिला-जुला रुख और तकनीकी तस्वीर
जी10 मुद्राओं के प्रदर्शन पर नजर डालें तो अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अलग-अलग मुद्राओं में असमान रुझान बना हुआ है। स्कॉटियाबैंक के रणनीतिकारों के अनुसार, मंगलवार को उत्तरी अमेरिकी सत्र की शुरुआत में अधिकांश जी10 मुद्राओं ने मामूली बढ़त दिखाई थी, लेकिन डॉलर का कुल कारोबार अभी भी खंडित और असमान बना हुआ है। पाउंड स्टर्लिंग के दैनिक चार्ट पर नजर डालें तो तकनीकी ढांचा स्पष्ट रूप से मंदड़ियों के पक्ष में दिखाई दे रहा है। पाउंड का हाजिर भाव 9-दिवसीय और 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) के नीचे सीमित बना हुआ है, जो निकट अवधि में मंदी के रुख की पुष्टि करता है।
तकनीकी स्तरों की बात करें तो 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 39.3 के स्तर पर है, जो मध्य रेखा 50 से नीचे बना हुआ है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि बाजार में लगातार बिकवाली का दबाव बना हुआ है और किसी त्वरित तेजी के कोई मजबूत संकेत नहीं हैं। ऊपर की तरफ, पाउंड के लिए तत्काल रुकावट 1.3259 पर 9-दिवसीय EMA पर स्थित है। यदि भाव इस स्तर को पार करता है, तो अगला बड़ा तकनीकी प्रतिरोध 1.3387 पर 50-दिवसीय EMA के क्लस्टर पर मिलेगा। जब तक पाउंड इस मूविंग एवरेज क्लस्टर के नीचे बना रहता है, हर उछाल पर बिकवाली हावी रहने की संभावना है। डाउनट्रेंड की संरचना तभी कमजोर होगी जब दैनिक आधार पर भाव 1.3387 के ऊपर बंद होने में सफल हो। वर्तमान लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार, भाव 1.33 के करीब है, जहां दैनिक धुरी 1.33, 52-सप्ताह का दायरा 1.30 से 1.38 और 20-दिवसीय समर्थन स्तर 1.32 के आसपास है।
ब्रिटेन में महंगाई और बैंक ऑफ इंग्लैंड का रुख
ब्रिटेन के घरेलू मोर्चे पर महंगाई का संकट अभी टला नहीं है। बैंक ऑफ इंग्लैंड की नीतिगत समिति की सदस्य कैथरीन मान ने चेतावनी दी है कि साल के अंत तक ब्रिटेन में मुद्रास्फीति 4% तक पहुंच सकती है। ऊर्जा की लगातार ऊंची लागत और वस्तुओं तथा सेवाओं के बढ़ते दाम केंद्रीय बैंक पर ब्याज दरों को लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनाए रखने का दबाव बना रहे हैं। बैंक ऑफ इंग्लैंड के लिए प्राथमिक लक्ष्य 2% की स्थिर मुद्रास्फीति हासिल करना है। जब महंगाई इस लक्ष्य से काफी ऊपर निकल जाती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाकर ऋण को महंगा करता है ताकि मांग पर लगाम लगाई जा सके। सामान्य परिस्थितियों में उच्च ब्याज दरें पाउंड के लिए सकारात्मक मानी जाती हैं क्योंकि वे विदेशी निवेशकों को आकर्षित करती हैं, लेकिन यदि आर्थिक विकास दर सुस्त हो तो मुद्रा पर दोहरी मार पड़ती है।
पाउंड स्टर्लिंग दुनिया की सबसे पुरानी आधिकारिक मुद्रा है, जिसका इतिहास सन 886 से जुड़ा है। यह यूनाइटेड किंगडम की आधिकारिक मुद्रा है और विदेशी मुद्रा बाजार में चौथी सबसे अधिक कारोबार वाली इकाई है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक मुद्रा लेनदेन में पाउंड की हिस्सेदारी 12% है, जिसका दैनिक औसत कारोबार 630 अरब डॉलर का है। इसके प्रमुख व्यापारिक जोड़ों में पाउंड-डॉलर (GBP/USD), जिसे ट्रेडर्स 'केबल' कहते हैं, कुल विदेशी मुद्रा बाजार का 11% हिस्सा रखता है। वहीं पाउंड-येन (GBP/JPY), जिसे 'ड्रैगन' कहा जाता है, की हिस्सेदारी 3% और यूरो-पाउंड (EUR/GBP) की हिस्सेदारी 2% है। पाउंड स्टर्लिंग को बैंक ऑफ इंग्लैंड जारी करता है और ब्रिटेन के जीडीपी, मैन्युफैक्चरिंग तथा सर्विसेज पीएमआई और रोजगार के आंकड़े इसके मूल्य को गहराई से प्रभावित करते हैं। इसके अलावा व्यापार संतुलन भी अहम भूमिका निभाता है, जहां निर्यातों से होने वाली कमाई आयातों के मुकाबले अधिक रहने पर पाउंड को सीधा समर्थन मिलता है।
अन्य वैश्विक संपत्तियों और केंद्रीय बैंकों की स्थिति
डॉलर की मजबूती का असर केवल पाउंड तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया की अन्य प्रमुख संपत्तियों पर भी इसका व्यापक प्रभाव देखा जा रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले (AUD/USD) 0.7000 के स्तर से नीचे दबाव में कारोबार कर रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की सख्त नीतिगत उम्मीदों के बावजूद, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच निवेशक डॉलर में खरीदारी कर रहे हैं। दूसरी ओर, डॉलर-येन (USD/JPY) 158.50 के करीब डेढ़ सप्ताह के उच्चतम स्तर पर बना हुआ है, जहां निवेशक 200-दिवसीय एसएमए के पार जाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। बैंक ऑफ जापान के नरम बयानों और बढ़ती अमेरिकी यील्ड ने इस जोड़ी को गति दी है।
सोने के भाव में भी बुधवार को एशियाई कारोबार में सुस्ती देखी गई। पीली धातु पिछले सत्र में 4,100 डॉलर के दो महीने के निचले स्तर से उबरी थी, लेकिन सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की ताजा मांग और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़त के कारण गैर-ब्याज वाली इस धातु पर दबाव बना रहा। इसके अलावा, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बुधवार को सुबह 10:00 बजे अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा करने जा रहा है। बाजार की आम सहमति के मुताबिक, कैलेंडर वर्ष में यथास्थिति बनाए रखने के बाद केंद्रीय बैंक अपनी प्रमुख रेपो दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.25% से 5.5% कर सकता है। वहीं यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) के समक्ष दोहरी चुनौती है, जहां बॉन्ड बाजार पहले ही सख्त मौद्रिक स्थिति का संकेत दे रहे हैं और बैंक अपने लक्ष्य से लगभग दोगुनी मुद्रास्फीति को काबू करने की दुविधा में फंसा हुआ है।






















