शेयर बाजार के वायदा-कारोबार (डेरिवेटिव्स) से कम समय में मोटा मुनाफा कमाने की उम्मीद रखने वाले छोटे और रिटेल निवेशकों के लिए नियामक आंकड़े एक गंभीर चेतावनी बनकर उभरे हैं। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की हालिया अध्ययन रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में कारोबार करने वाले व्यक्तिगत रिटेल निवेशकों को कुल मिलाकर ₹91,685 करोड़ का शुद्ध घाटा उठाना पड़ा है। बाजार में सहभागिता करने वाले व्यक्तिगत ट्रेडर्स की कुल संख्या में भले ही गिरावट आई हो, लेकिन प्रति व्यक्ति होने वाला औसतन नुकसान पिछले वर्षों के मुकाबले बढ़ा है।
इक्विटी डेरिवेटिव्स में घाटे का बड़ा आंकड़ा
सेबी द्वारा जारी विस्तृत आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में एक औसत रिटेल ट्रेडर को लगभग ₹1.17 लाख का नुकसान उठाना पड़ा। अगर इसकी तुलना पिछले वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) से की जाए, तो उस समय प्रति ट्रेडर औसतन ₹1.13 लाख का घाटा दर्ज किया गया था। इसका सीधा मतलब यह है कि औसत नुकसान की राशि में करीब 2% की वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि राहत की एक छोटी बात यह रही कि नुकसान दर्ज करने वाले ट्रेडर्स का प्रतिशत FY25 के 90.9% से मामूली घटकर FY26 में 87.7% रह गया, लेकिन इसके बावजूद घाटा झेलने वाले निवेशकों का अनुपात अत्यधिक बना हुआ है।
सक्रिय और नए निवेशकों की तादाद में गिरावट
अध्ययन रिपोर्ट यह भी रेखांकित करती है कि बाजार में लगातार हो रहे घाटे के कारण रिटेल निवेशकों की संख्या में कमी आई है। वित्त वर्ष 2025-26 में सक्रिय व्यक्तिगत ट्रेडर्स की संख्या 18% घटकर 87.5 लाख रह गई, जबकि FY25 में यह आंकड़ा 1.06 करोड़ पर दर्ज किया गया था। वित्त वर्ष 2015-16 (FY16) के बाद यह पहला मौका है जब किसी वित्त वर्ष में डेरिवेटिव्स मार्केट के रिटेल ट्रेडर्स की सालाना संख्या में गिरावट देखी गई है। इसके अलावा नए ट्रेडर्स के प्रवेश में भी भारी कमी आई है। FY26 में केवल 20.8 लाख नए निवेशकों ने डेरिवेटिव्स बाजार में कदम रखा, जो FY25 के 34.3 लाख नए प्रवेशकों की तुलना में काफी कम है।
ऑप्शंस ट्रेडिंग बना नुकसान का सबसे बड़ा कारण
रिपोर्ट के अनुसार रिटेल निवेशकों की सबसे अधिक सक्रियता ऑप्शंस ट्रेडिंग में देखी गई। वित्त वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान लगभग 99.3% रिटेल ट्रेडर्स ने ऑप्शंस सेगमेंट में सौदे किए। इतना ही नहीं, करीब 93% ट्रेडर्स ऐसे रहे जिन्होंने केवल ऑप्शंस में ही दांव लगाया। यही वजह है कि रिटेल निवेशकों को हुए कुल वित्तीय नुकसान में ऑप्शंस ट्रेडिंग की हिस्सेदारी सबसे बड़ी रही। वित्त वर्ष 2026 में रिटेल ट्रेडर्स के कुल ₹91,685 करोड़ के घाटे का लगभग 92% हिस्सा अकेले ऑप्शंस ट्रेडिंग की वजह से आया।
बाजार से दूरी बनाने लगे रिटेल ट्रेडर्स
लगातार वित्तीय झटके लगने के बाद कई निवेशकों ने इस जोखिम भरे सेगमेंट से पूरी तरह से किनारा कर लिया है। सेबी के आंकड़ों के मुताबिक FY26 में लगभग 46 लाख ऐसे निवेशकों ने कारोबार पूरी तरह बंद कर दिया, जो FY25 में सक्रिय रूप से ट्रेडिंग कर रहे थे। बाजार से बाहर निकलने वाले ट्रेडर्स की यह संख्या FY25 के लगभग 26 लाख एग्जिट के मुकाबले करीब 76% अधिक है। हालांकि वित्त वर्ष 2020-21 (FY21) से पहले के स्तरों की तुलना में अब भी ट्रेडर्स की संख्या अधिक बनी हुई है, लेकिन FY26 का यह आंकड़ा दिखाता है कि रिटेल भागीदारी की तेज रफ्तार पर पहली बार बड़ा ब्रेक लगा है।



















