अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत में जापानी येन पर दबाव बना हुआ है, जबकि अमेरिकी डॉलर अपनी मजबूती को लगातार बनाए रखने में सफल रहा है। दोनों देशों के सरकारी बॉन्ड यील्ड में मौजूद बड़ा अंतर अमेरिकी मुद्रा के पक्ष में बना हुआ है, जिससे जापानी मुद्रा को लगातार प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन 0.17 प्रतिशत की दैनिक बढ़त के साथ 158.10 के आसपास कारोबार कर रहा है। कारोबारी सत्र के दौरान मुद्रा जोड़ी अपने नुकसान की भरपाई करते हुए 158.00 के स्तर से ऊपर निकल आई है और एक सप्ताह से चले आ रहे सीमित दायरे में ही कारोबार कर रही है।
बॉन्ड यील्ड का अंतर और ब्याज दरों का ढांचा
अमेरिकी डॉलर की इस ताजा बढ़त के पीछे दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच ब्याज दरों और सरकारी प्रतिभूतियों के रिटर्न का फासला सबसे मुख्य कारक बना हुआ है। अमेरिका के 10-वर्षीय बेंचमार्क ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 5.34 प्रतिशत के करीब टिकी हुई है, जो वर्ष 2002 के बाद से देखे गए स्तरों के बेहद नजदीक है। दूसरी ओर, जापान के 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड 3.10 प्रतिशत के पास दर्ज की गई है। भले ही जापानी सरकारी बॉन्ड का यह स्तर लगभग 30 वर्षों में इसका उच्चतम रिटर्न है, लेकिन अमेरिकी बॉन्ड के मुकाबले यह अंतर अब भी काफी चौड़ा है। वर्तमान में दोनों देशों की 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड के बीच का फासला 224 आधार अंक यानी बेसिस पॉइंट्स बना हुआ है।
जापान की तुलनात्मक रूप से बेहद कम ब्याज दरें और अर्थव्यवस्था पर मौजूद भारी कर्ज का बोझ लगातार येन की मजबूती की राह में रुकावट पैदा कर रहे हैं। हालांकि बैंक ऑफ जापान अपनी मौद्रिक नीति को सख्त करने की दिशा में धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है, लेकिन वैश्विक स्तर पर अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों की सख्त नीतियों के मुकाबले जापानी मुद्रा को इसका खास लाभ नहीं मिल पा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक दोनों देशों के बॉन्ड प्रतिफल में यह बड़ा अंतर बरकरार रहेगा, तब तक येन के लिए टिकाऊ सुधार दर्ज करना आसान नहीं होगा।
फेडरल रिजर्व की बैठक और ब्याज दरों की संभावनाएं
अमेरिकी केंद्रीय बैंक की आगामी मौद्रिक नीति को लेकर बाजार की उम्मीदों में भी हाल के दिनों में बड़ा बदलाव दर्ज किया गया है। सीएमई फेडवॉच टूल के आंकड़ों के अनुसार, ट्रेडर अब 27-28 अक्टूबर को होने वाली फेडरल रिजर्व की नीतिगत बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की लगभग 21 प्रतिशत संभावना मान रहे हैं। ठीक एक सप्ताह पहले तक यह संभावना 70 प्रतिशत के उच्च स्तर पर आंकी जा रही थी। अब वित्तीय बाजारों की नजर बुधवार को जारी होने वाले फेडरल ओपन मार्केट कमेटी यानी एफओएमसी बैठक के विवरण पर टिकी है, जिससे ब्याज दरों के भविष्य के रास्ते पर नए संकेत मिल सकते हैं। इसके साथ ही, मौजूदा कैलेंडर वर्ष के अंत से पहले नीतिगत दरों में एक और वृद्धि का विकल्प अब भी पूरी तरह से खारिज नहीं हुआ है।
दूसरी ओर, जापानी मुद्रा के कारोबारियों के लिए घरेलू मोर्चे पर भी कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम कतार में हैं। बाजार सहभागियों की निगाहें बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काजुओ उएदा के आगामी वक्तव्यों और जापान के ताजा वेतन आंकड़ों पर लगी हुई हैं। वेतन वृद्धि के आंकड़े यह तय करने में मददगार साबित होंगे कि बैंक ऑफ जापान अपनी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की प्रक्रिया को किस रफ्तार से आगे बढ़ा सकता है।
160.00 का मनोवैज्ञानिक स्तर और हस्तक्षेप का जोखिम
मुद्रा बाजार में डॉलर के मुकाबले येन में गिरावट के बावजूद ट्रेडर बहुत बड़े मंदी के दांव लगाने से बच रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि डॉलर-येन की जोड़ी अब 160.00 के मनोवैज्ञानिक स्तर के काफी करीब पहुंच चुकी है। विदेशी मुद्रा बाजार में यह स्तर बेहद संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि यहां जापानी वित्तीय अधिकारियों द्वारा प्रत्यक्ष बाजार हस्तक्षेप का जोखिम काफी बढ़ जाता है। अतीत में भी जब मुद्रा का अवमूल्यन इस सीमा के आसपास पहुंचा था, तब सरकारी स्तर पर हस्तक्षेप की चेतावनी सामने आई थी। ऐसे में बाजार में यह आशंका बनी हुई है कि तीव्र गिरावट की स्थिति में टोक्यो से विदेशी मुद्रा बाजार में सीधी खरीदारी देखने को मिल सकती है, जिससे येन की गिरावट पर अंकुश लग सकता है।
हालांकि वैश्विक स्तर पर चल रही व्यापक भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं भी सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर को अतिरिक्त सहारा दे रही हैं। मध्य पूर्व और रूस-यूक्रेन के बीच जारी तनाव के कारण डॉलर इंडेक्स मजबूत बना हुआ है, जिससे फेड की दर वृद्धि की कम होती उम्मीदों के बावजूद ग्रीनबैक निचले स्तरों से तेजी से उबरने में कामयाब रहा है।
अन्य प्रमुख मुद्राओं और संपत्तियों की स्थिति
मुद्राओं के आपसी प्रदर्शन पर नजर डालें तो जापानी येन ने सोमवार को अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले मिला-जुला रुख दिखाया। प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले दैनिक उतार-चढ़ाव की तालिका के अनुसार, येन ने न्यूजीलैंड डॉलर के मुकाबले सबसे मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया। वहीं अमेरिकी डॉलर की व्यापक मजबूती का असर अन्य वैश्विक मुद्राओं पर भी साफ देखा गया। एशियाई कारोबारी सत्र के उत्तरार्ध में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर नए सिरे से बिकवाली का दबाव देखा गया और एयूडी/यूएसडी गिरकर 0.6900 के करीब आ गया। मध्य पूर्व और रूस-यूक्रेन के तनाव के बीच अमेरिकी डॉलर की बढ़त ने इस जोड़ी पर भारी दबाव बनाया। इस जोड़ी में नए कारोबारी संकेतों के लिए अब कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया से जुड़ी नीतिगत उम्मीदों पर ध्यान केंद्रित है।
यूरोपीय मोर्चे पर, यूरोपीय सेंट्रल बैंक यानी ईसीबी एक जटिल नीतिगत दुविधा से जूझ रहा है। सामान्य परिस्थितियों में जब महंगाई अपने तय लक्ष्य से लगभग दोगुनी रफ्तार से चल रही हो, तो केंद्रीय बैंक के पास ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सीधा रास्ता होता है। लेकिन वर्तमान आर्थिक हालात सामान्य नहीं हैं। इस बार बॉन्ड बाजार पहले से ही वित्तीय स्थितियों को कड़ा करने का एक हिस्सा खुद ही पूरा कर रहा है, जिससे ईसीबी के सामने नीतिगत फैसले लेना अत्यधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।
कमोडिटी और क्रिप्टो बाजार का हाल
वित्तीय बाजारों में अमेरिकी डॉलर की तेजी और ट्रेजरी यील्ड के सभी परिपक्वता अवधियों में बढ़ने का सीधा असर कीमती धातुओं पर भी दिखाई दिया। सोने की कीमतों में शुक्रवार को शुरू हुई गिरावट सोमवार को भी जारी रही और पीली धातु प्रति ट्रॉय औंस 4,100 डॉलर के महत्वपूर्ण स्तर के करीब पहुंच गई। डॉलर के मजबूत होने और बॉन्ड यील्ड के आकर्षक स्तरों पर बने रहने से गैर-ब्याज वाली संपत्तियों जैसे सोने में मुनाफावसूली का दौर देखा गया।
दूसरी ओर, डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में बिटकॉइन सोमवार को 86,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर सीमित दायरे में कारोबार करता दिखा। व्यापक क्रिप्टोकरेंसी बाजार में मुख्य सिक्के के समेकन के बीच ऑल्टकॉइन्स में सकारात्मक रुख देखा गया। इथेरियम बढ़कर 2,700 डॉलर के स्तर से ऊपर पहुंच गया, जबकि रिपल 1.52 डॉलर के स्तर से ऊपर अपनी स्थिति को स्थिर बनाए रखने में सफल रहा।

















