रणनीतिक खनिजों और अत्याधुनिक विनिर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए अमेरिका अपने घरेलू स्तर पर दुर्लभ पृथ्वी तत्वों यानी रेयर अर्थ उत्पादन को तेजी से बढ़ावा दे रहा है। संघीय प्रशासन ने अपने पारंपरिक तौर-तरीकों से आगे बढ़कर निजी कंपनियों में सीधी इक्विटी हिस्सेदारी लेने, भारी वित्तीय अनुदान जारी करने, दीर्घकालिक खरीद समझौतों पर हस्ताक्षर करने और प्रमुख उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी प्राइस फ्लोर तय करने जैसी नीतियां अपनाई हैं। इस व्यापक नीतिगत बदलाव का मुख्य उद्देश्य नियोडिमियम-प्रेजोडिमियम (NdPr) ऑक्साइड और स्थायी चुंबकों जैसे महत्वपूर्ण घटकों की घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना है, ताकि विदेशी स्रोतों पर निर्भरता घटाई जा सके। नए शोधन संयंत्रों और चुंबक निर्माण इकाइयों की स्थापना से उत्पादन क्षमता का एक नया ढांचा तैयार हो रहा है, हालांकि अत्यधिक उत्पादन लागत अब भी इस पूरी प्रक्रिया में एक जटिल बाधा बनी हुई है।
संघीय रणनीतियों में बदलाव और प्रत्यक्ष वित्तीय हस्तक्षेप
अतीत में अमेरिकी सरकार मुख्य रूप से अनुसंधान और बुनियादी विकास के लिए सामान्य अनुदानों या रियायती ऋणों पर निर्भर रहती थी। अब संघीय नीति में गहरा संरचनात्मक बदलाव आया है। सरकार सीधे व्यावसायिक समझौतों में भागीदार बन रही है। वाणिज्य विभाग और रक्षा विभाग ने देश के महत्वपूर्ण खनिज उत्पादकों के साथ सीधी साझेदारी की है। इस नए मॉडल के तहत सरकार न केवल पूंजी उपलब्ध करा रही है, बल्कि कंपनियों में मालिकाना हिस्सेदारी भी खरीद रही है। इस तरह के वित्तीय ढांचे से कंपनियों को निजी बाजार की अनिश्चितताओं से सुरक्षा मिलती है और वे लंबी अवधि की उच्च-लागत वाली शोधन परियोजनाओं में निवेश जारी रख पाती हैं।
वाणिज्य विभाग ने जून 2026 में यूएसए रेयर अर्थ के साथ एक ऐतिहासिक समझौता किया। इस समझौते के तहत कंपनी को पूर्ण रूप से एकीकृत विनिर्माण व्यवस्था विकसित करने के लिए 277 मिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष अनुदान और 1.3 बिलियन डॉलर का वरिष्ठ सुरक्षित ऋण प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी सरकार ने कंपनी में 16 प्रतिशत की प्रत्यक्ष इक्विटी हिस्सेदारी भी हासिल की। इस तरह का सरकारी निवेश यह स्पष्ट करता है कि प्रशासन अब घरेलू आपूर्ति श्रृंखला के बुनियादी विकास में केवल एक नियामक नहीं, बल्कि एक सक्रिय हिस्सेदार के रूप में मौजूद है। पूर्ण एकीकृत उत्पादन के तहत खनन से लेकर अंतिम रूप से परिष्कृत चुंबक तैयार करने तक की सभी कड़ियां एक ही छत्रछाया में विकसित की जा रही हैं।
रक्षा विभाग का रणनीतिक दांव और दीर्घकालिक मूल्य संरक्षण
इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए रक्षा विभाग ने वर्ष 2025 में एमपी मैटेरियल्स के साथ एक अहम रणनीतिक समझौते की घोषणा की थी। इस सौदे के तहत रक्षा विभाग ने कंपनी में 15 प्रतिशत की इक्विटी हिस्सेदारी हासिल करने का निर्णय लिया। इस समझौते का दूसरा सबसे अहम पहलू खरीद की निश्चितता सुनिश्चित करना था। रक्षा विभाग ने कंपनी द्वारा उत्पादित चुंबकों के लिए 10 वर्ष का दीर्घकालिक खरीद समझौता किया। इसके साथ ही स्थायी चुंबकों के निर्माण में सबसे आवश्यक कच्चे माल नियोडिमियम-प्रेजोडिमियम ऑक्साइड के लिए 10 वर्ष का मूल्य तल यानी प्राइस फ्लोर भी निर्धारित किया गया।
न्यूनतम मूल्य की इस सरकारी गारंटी का उद्देश्य वैश्विक बाजार में होने वाले भारी मूल्य उतार-चढ़ाव से घरेलू उत्पादकों की रक्षा करना है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें अचानक गिरती हैं, तो पश्चिमी देशों में भारी लागत से चलने वाले खनन और शोधन प्रकल्प वित्तीय रूप से अव्यवहारिक हो जाते हैं। 10 साल के तय मूल्य तल की वजह से उत्पादक कंपनियों को यह भरोसा मिलता है कि वैश्विक कीमतों में तेज गिरावट के बावजूद उनका परिचालन घाटे में नहीं जाएगा। रक्षा जरूरतों में इस्तेमाल होने वाले जेट विमानों, मिसाइल प्रणालियों और उन्नत रडार में इन स्थायी चुंबकों की भारी खपत होती है, इसलिए पेंटागन ने इस आपूर्ति को सुरक्षित करना सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया है।
आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियां और असमान विकास दर
सरकारी सहायता के इन बड़े पैकेजों से आपूर्ति श्रृंखला के उन संकरे दायरों में उत्पादन बढ़ने लगा है जो अब तक गंभीर बाधा बने हुए थे। नए कारखानों और क्षमता विस्तार की महत्वाकांक्षी योजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। इसके बावजूद पूरी आपूर्ति श्रृंखला एक समान गति से आगे नहीं बढ़ पा रही है। दुर्लभ खनिजों को चट्टानों से अलग करना, उन्हें परिष्कृत करना और फिर रासायनिक प्रक्रियाओं के जरिए उच्च-गुणवत्ता वाले चुंबकीय धातु में बदलना बेहद जटिल और पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील कार्य है। अमेरिका में पर्यावरणीय मानकों और श्रम लागतों के कारण उत्पादन की कुल लागत अंतरराष्ट्रीय औसत की तुलना में काफी ऊंची बनी हुई है।
उत्पादन लागत के भारी अंतर के कारण आपूर्ति श्रृंखला के कुछ हिस्से बहुत तेजी से विकसित हो रहे हैं, जबकि अन्य हिस्सों को परिपक्व होने में लंबा समय लगेगा। उदाहरण के लिए, चुंबक निर्माण और प्राथमिक अयस्क खनन में प्रगति अपेक्षाकृत तीव्र गति से दिखाई दे रही है, लेकिन अत्यंत जटिल रासायनिक पृथक्करण और ऑक्साइड शोधन के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह स्थापित होने में कई वर्षों का समय लग सकता है। उच्च लागत की यह बाधा घरेलू उत्पादकों के लिए तब तक चुनौती बनी रहेगी जब तक कि नई तकनीकों के माध्यम से प्रति इकाई लागत में पर्याप्त कमी नहीं आ जाती।
अंतरराष्ट्रीय बाजार और व्यापक आर्थिक परिदृश्य
रणनीतिक खनिजों की इस दौड़ के बीच वैश्विक वित्तीय बाजारों में भी व्यापक उथल-पुथल देखने को मिल रही है। भू-राजनीतिक तनावों और मुद्रास्फीति के दबावों के बीच वैश्विक संपत्तियों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। अमेरिकी डॉलर की मजबूती के कारण ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) की विनिमय दर में बिकवाली देखी गई, जिससे यह गिरकर 0.6900 के स्तर की ओर पहुंच गई। दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन (USD/JPY) की जोड़ी ने एशियाई सत्र में अपनी पिछली गिरावट की भरपाई करते हुए फिर से 158.00 का स्तर पार कर लिया। हालांकि बैंक ऑफ जापान के कड़े रुख और मुद्रा हस्तक्षेप की संभावनाओं ने येन को सहारा देने का प्रयास किया है।
कमोडिटी और डिजिटल परिसंपत्तियों के बाजार में भी इस व्यापक आर्थिक माहौल का असर स्पष्ट है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स में बढ़ोतरी और डॉलर की मजबूती के चलते सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई और पीली धातु 4,100 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम स्तर के करीब आ गई। वहीं क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिटकॉइन 86,000 डॉलर के ऊपर सीमित दायरे में बना रहा, जबकि एथेरियम 2,700 डॉलर के पार पहुंचा और रिपल 1.52 डॉलर के स्तर पर स्थिर रहा। इसके अलावा यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ECB) के समक्ष मुद्रास्फीति से निपटने की दोहरी चुनौती बनी हुई है, जहां बॉन्ड बाजार की परिस्थितियां मौद्रिक नीतिगत फैसलों को और अधिक पेचीदा बना रही हैं। खनिजों से लेकर मुद्राओं तक, वैश्विक अर्थव्यवस्था इस समय रणनीतिक पुनर्गठन और वित्तीय पुनर्संतुलन के दौर से गुजर रही है।


















