ब्रिटेन में रहने वाले परिवारों और कारोबारियों के लिए जीवन-यापन की लागत को लेकर चिंताएं एक बार फिर गहराने लगी हैं। ड्यूश बैंक के अर्थशास्त्रियों संजय राजा और माउई ब्रेनन द्वारा जारी किए गए ताजा आर्थिक विश्लेषण के अनुसार, ब्रिटेन में आने वाले महीनों के दौरान मूल्य दबाव में भारी इजाफा दर्ज किया जा सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि सितंबर के महीने में देश की हेडलाइन मुद्रास्फीति सालाना आधार पर बढ़कर 3.49% के स्तर पर पहुंच सकती है, जो पूरे वर्ष की सबसे तेज रफ्तार होगी। इस रफ्तार के पीछे मुख्य रूप से ऊर्जा के चढ़ते दाम और कृषि पैदावार में कमी जैसे बुनियादी कारण उभरकर सामने आ रहे हैं।
महंगाई के आंकड़ों में तेज उछाल के संकेत
आर्थिक परिदृश्य का बारीक मूल्यांकन करते हुए संजय राजा और माउई ब्रेनन ने स्पष्ट किया है कि हेडलाइन सीपीआई के 3.49% तक पहुंचने के साथ ही कोर सीपीआई भी सालाना आधार पर बढ़कर 2.74% पर जा सकती है। इसके साथ ही सेवा क्षेत्र से जुड़ी मुद्रास्फीति यानी सर्विसेज सीपीआई में भी तेजी आने के आसार हैं और मजबूत बेस इफेक्ट्स के कारण इसके 3.71% के स्तर पर पहुंचने का अनुमान है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार, सितंबर का यह उछाल इस बात का स्पष्ट संकेत है कि घरेलू बजट पर दबाव अभी खत्म नहीं हुआ है, बल्कि आने वाले समय में इसके और विकराल होने की आशंका है।
ऊर्जा बाजार और खाद्य उत्पादों पर बढ़ता दबाव
संजय राजा और माउई ब्रेनन का कहना है कि आने वाले समय में मूल्य दबाव में और अधिक विस्तार देखने को मिलेगा। इसके प्रमुख कारणों में ऊर्जा की कीमतों में लगातार जारी बढ़ोतरी शामिल है, जो कई क्षेत्रों की उत्पादन और परिवहन लागत को प्रभावित कर रही है। इसके अतिरिक्त, कम कृषि पैदावार का असर अब खाद्य लागत के आंकड़ों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। फसल कम होने की वजह से दैनिक उपभोग की वस्तुओं और किराना सामान के थोक मूल्यों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिसका सीधा प्रभाव आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है।
बैंक ऑफ इंग्लैंड के पूर्वानुमानों से ऊपर हैं नए आंकड़े
ड्यूश बैंक की यह नई रिपोर्ट ब्रिटेन के केंद्रीय बैंक, बैंक ऑफ इंग्लैंड के आधिकारिक अनुमानों की तुलना में काफी अधिक सख्त रुख पेश करती है। अर्थशास्त्रियों ने उल्लेख किया है कि उनके ताजा अनुमान दो प्रमुख श्रेणियों को छोड़कर बैंक ऑफ इंग्लैंड के लगभग सभी आकलनों से ऊपर बने हुए हैं। जिन दो श्रेणियों में यह अपवाद दिखता है, वे हैं कोर गुड्स सीपीआई तथा खाद्य एवं गैर-मादक पेय पदार्थ सीपीआई। इन दोनों वर्गों को छोड़कर बाकी सभी पैमानों पर संस्थान को लगता है कि मुद्रास्फीति बैंक ऑफ इंग्लैंड के निर्धारित लक्ष्यों से कहीं अधिक ऊंची बनी रहेगी।
लंबी अवधि का दृष्टिकोण और 2027 का परिदृश्य
आगामी वर्षों के लिए जारी किए गए संशोधित अनुमानों में अर्थशास्त्रियों ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का दबाव वर्ष 2026 और उसके बाद भी जारी रहेगा। उनके ताजा अनुमानों के मुताबिक वर्ष 2026 में हेडलाइन सीपीआई औसतन 3.2% रहने का अनुमान है, जबकि अगले साल यह बढ़कर 3.8% तक जा सकती है, जिसे पहले 3.5% आंका गया था। इसके अलावा, वर्ष 2027 में सीपीआई औसतन 3.7% रहने का अनुमान जताया गया है, जो पूर्व के 3.5% के अनुमान से ज्यादा है। यदि अल्पावधि की बात करें, तो हेडलाइन सीपीआई के अगले साल फरवरी में 4.3% सालाना के उच्चतम स्तर तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। खुदरा मूल्य सूचकांक यानी आरपीआई के मोर्चे पर भी स्थिति चिंताजनक है; निकट भविष्य में आरपीआई के 3.7% से बढ़कर 3.93% सालाना होने और लंबी अवधि में 5.2% तक उछलने की बात कही गई है, जिसे पहले 4.8% आंका गया था।
वैश्विक बाजारों और मुद्राओं में हलचल
ब्रिटेन के मुद्रास्फीति परिदृश्य के अलावा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में भी बड़े पैमाने पर उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। चीनी मुद्रास्फीति के मिले-जुले आंकड़ों और बेहतर व्यापार आंकड़ों के बाद बुधवार के एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) 0.7000 के स्तर के पास मजबूती से टिका रहा। चीन में सितंबर महीने के दौरान उपभोक्ता मूल्य सूचकांक उम्मीद से कम बढ़ा, जबकि उत्पादक मूल्य सूचकांक मुद्रास्फीति में तेजी आई, साथ ही चीन का व्यापार अधिशेष भी अप्रत्याशित रूप से बढ़ा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद अमेरिकी डॉलर के सीमित दायरे में रहने से इस मुद्रा जोड़ी को सहारा मिला।
दूसरी ओर, डॉलर बनाम येन (USD/JPY) 158.50 के आसपास एक सीमित दायरे में कारोबार करता दिखा, जहां जापानी अधिकारियों के संभावित हस्तक्षेप के जोखिम ने जापानी येन को सहारा दिया। सोने की कीमतों में बुधवार के अमेरिकी सत्र के दौरान गिरावट का सिलसिला आगे बढ़ा, क्योंकि सितंबर महीने में अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में 3.7% सालाना की अप्रत्याशित तेजी दर्ज की गई, जिसने अमेरिकी डॉलर को मजबूती दी और कीमती धातु पर दबाव बनाया। क्रिप्टोकरेंसी बाजार में एक्सआरपी $1.36 से ऊपर कारोबार कर रहा है और $1.40 के स्तर की ओर बढ़ रहा है। रिपल और मेरिट्ज सिक्योरिटीज ने दक्षिण कोरिया के पूंजी बाजारों के लिए संस्थागत कस्टडी और टोकनाइजेशन सेवाओं की दिशा में रणनीतिक साझेदारी की है। इसी बीच, लंबी अवधि की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड अक्टूबर की शुरुआत में वर्ष 2002 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जहां निवेशक सरकारी नीलामी में भारी मात्रा में नए बॉन्ड खरीद रहे हैं।

















