वित्तीय बाजारों में तीसरी तिमाही का समापन बेहद उथल-पुथल भरे घटनाक्रमों के साथ हुआ है, जहां अमेरिकी सरकारी बॉन्ड बाजार में अचानक आई तेजी ने वैश्विक संपत्तियों में हलचल मचा दी है। अमेरिकी 30-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड में 6 आधार अंकों की वृद्धि दर्ज की गई और यह बढ़कर 5.63 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो जून 2002 के बाद का उच्चतम स्तर है। इसी दौरान 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5 आधार अंक चढ़कर 5.30 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि 2-वर्षीय यील्ड 4.89 प्रतिशत के आसपास स्थिर बनी रही। लंबी अवधि के बॉन्ड पर मिलने वाले इस ऊंचे रिटर्न ने वित्तीय विश्लेषकों का ध्यान खींचा है, जिनका मानना है कि यदि वैश्विक तनाव 'कोल्ड वॉर' और 'हॉट वॉर' के बीच और अधिक गहराता है, तो अमेरिकी 30-वर्षीय बॉन्ड यील्ड आने वाले समय में 7.25 से 8.00 प्रतिशत के उस दायरे में भी जा सकती है जो कभी शीत युद्ध के अंतिम दौर में देखा गया था।
कच्चे तेल से जुड़ी महंगाई और केंद्रीय बैंकों का रुख
अमेरिकी पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स यानी PCE के आंकड़ों में नरमी देखने को मिली थी, जिसने फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावनाओं को कमजोर किया। इसके बावजूद बॉन्ड यील्ड में कोई बड़ी गिरावट नहीं आई, क्योंकि कच्चे तेल के कारण उत्पन्न होने वाली महंगाई की चिंताओं ने बाजार को सतर्क कर रखा है। ऊर्जा कीमतों के जोखिम के चलते निवेशकों को आशंका है कि मुद्रास्फीति लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती है। बॉन्ड बाजार में रिटर्न की यह मजबूती अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर को लगातार सहारा दे रही है और अन्य सभी प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मांग काफी बढ़ गई है।
जापानी येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में कमजोरी
मुद्रा बाजार के प्रमुख युग्मों में डॉलर के आक्रामक रुख का असर साफ दिखाई दे रहा है। जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) गुरुवार को एशियाई कारोबारी सत्र में 158.00 के स्तर से ऊपर अपने साप्ताहिक दायरे के ऊपरी छोर पर टिका रहा। बैंक ऑफ जापान (BoJ) की ओर से सख्त मौद्रिक नीति के संकेतों और जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में हस्तक्षेप के जोखिमों के बावजूद डॉलर की व्यापक मजबूती ने इन सभी कारकों को बेअसर कर दिया। साथ ही, अमेरिका और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक गतिरोध ने डॉलर की सुरक्षित निवेश मांग को और मजबूत कर दिया है। दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) लगभग दो महीने के निचले स्तर के करीब सीमित दायरे में रहा और एशियाई सत्र के दौरान 0.6900 के मध्य स्तर पर कारोबार करता देखा गया। अगस्त के महीने में ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष घटकर AUD495M रह गया, जिससे ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर दबाव बना रहा।
यूरो में ऐतिहासिक गिरावट और ऊर्जा संकट
यूरोपीय मुद्रा के लिए भी परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यूरो (EUR/USD) गिरकर मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। यह मुद्रा युग्म बुधवार को 1.1312 के स्तर तक नीचे आ गया, जो जनवरी के शिखर स्तर 1.2082 से काफी नीचे है। यूरो में आई इस तीव्र गिरावट के पीछे अमेरिकी डॉलर की भारी ताकत, वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं और यूरोप का महंगे ऊर्जा आयात पर निर्भर होना मुख्य कारण हैं। हालांकि, जानकारों का कहना है कि यूरोजोन में महंगाई का एक नया झटका यूरो को अप्रत्याशित सहारा भी दे सकता है, जिससे यूरोपीय केंद्रीय बैंक के नीतिगत फैसलों में बदलाव की संभावना बन सकती है।
सोने की कीमतों पर रुकावट और हाइपरलिक्विड में गिरावट
कमोडिटी बाजार में सोने के भाव में सुधार का प्रयास विफल साबित हुआ। यूरोपीय सत्र के पहले हिस्से में सोना 4,200 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंचा जरूर, लेकिन वह इस बढ़त को बरकरार नहीं रख सका और दिन के दौरान लगभग अपरिवर्तित स्तर पर बना रहा। अमेरिका में बुधवार को आए उम्मीद से कम मुद्रास्फीति के आंकड़ों के बावजूद निवेशक गैर-उपज वाले सोने की तुलना में ऊंचे यील्ड वाले अमेरिकी बॉन्ड्स और डॉलर को प्राथमिकता दे रहे हैं। क्रिप्टो बाजार में भी संस्थागत बिकवाली का असर देखा गया, जहां हाइपरलिक्विड (HYPE) की कीमत गुरुवार को 2 प्रतिशत टूट गई। इससे पहले के दिन दर्ज की गई 5 प्रतिशत की बढ़त घट गई क्योंकि बुधवार को 5 मिलियन डॉलर के संस्थागत आउटफ्लो दर्ज किए गए। तकनीकी नजरिए से 90 डॉलर के नीचे बने रहने के कारण HYPE का निकट अवधि का परिदृश्य मिला-जुला बना हुआ है।

















