अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में एक बार फिर मजबूत खरीदारी देखने को मिल रही है, जिससे पीली धातु अपने हालिया साप्ताहिक निचले स्तरों से उबरकर 4,150 डॉलर प्रति औंस के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई है। अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में आई अचानक गिरावट ने अमेरिकी डॉलर पर भारी दबाव डाला है, जिसके चलते ग्रीनबैक अपने 18 महीने के उच्च स्तर से नीचे फिसल गया। डॉलर की इस कमजोरी ने विदेशी मुद्रा धारकों के लिए सोने को आकर्षक बना दिया है, जिससे बुलियन मार्केट में नए खरीदार सक्रिय हुए हैं। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, सोने की हाजिर कीमत बढ़कर 4,166 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई है, जो पिछले बंद भाव 4,108 डॉलर के मुकाबले 1.41 प्रतिशत की दैनिक बढ़त दर्शाती है।
मुद्रास्फीति के नए आंकड़ों से केंद्रीय बैंक पर बढ़ा दबाव
अमेरिकी श्रम सांख्यिकी ब्यूरो (बीएलएस) द्वारा बुधवार को जारी ताजा आंकड़ों ने वित्तीय बाजारों में नई हलचल पैदा कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर तक के पिछले 12 महीनों में हेडलाइन उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) बढ़कर 3.7 प्रतिशत पर पहुंच गया, जबकि इससे पिछले महीने यह 3.4 प्रतिशत था। यह आंकड़ा विश्लेषकों के आम अनुमान से कहीं अधिक रहा है। इसके साथ ही, खाद्य और ऊर्जा की अस्थिर कीमतों को अलग रखने वाला कोर सीपीआई भी अगस्त के 2.4 प्रतिशत से बढ़कर पिछले महीने 2.6 प्रतिशत दर्ज किया गया। अर्थव्यवस्था में व्यापक रूप से बढ़ते मूल्य दबाव ने निवेशकों को फेडरल रिजर्व के ब्याज दर पथ पर पुनर्विचार करने के लिए बाध्य कर दिया है।
हालांकि, सैन फ्रांसिस्को फेड की अध्यक्ष मैरी डेली ने नीतिगत रुख को स्पष्ट करते हुए कहा है कि केंद्रीय बैंक को आगे चलकर ब्याज दरों में और बढ़ोतरी करने की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन उन्होंने साफ संकेत दिया कि अक्टूबर की आगामी बैठक में ऐसा करने की कोई तात्कालिक आवश्यकता नहीं है। उनके इस बयान से स्पष्ट होता है कि नीति निर्माता फिलहाल तत्काल फैसले लेने के बजाय आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर रहने और धैर्य बरतने की रणनीति अपना रहे हैं। ऊर्जा की ऊंची कीमतों से प्रेरित हेडलाइन महंगाई और स्थिर कोर मुद्रास्फीति के बीच केंद्रीय बैंक का दृष्टिकोण सतर्क बना हुआ है।
बाजार में ब्याज दर वृद्धि की 85% संभावना और नीतिगत रुख
फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के बयानों के विश्लेषण से यह सामने आया है कि नीतिगत रुख में ऐतिहासिक औसत की तुलना में हल्का सख्त (हॉकिश) झुकाव बरकरार है। स्पीच ट्रैकर स्कोर 6.8/10 पर आंका गया है, जो 6.1/10 के ऐतिहासिक औसत से अधिक है। वहीं फेड सेंटीमेंट इंडेक्स 0.84 अंक गिरकर 128.17 पर आ गया, जो यह दर्शाता है कि आक्रामक सख्ती की तीव्रता में मामूली ठहराव आया है, लेकिन सूचकांक अभी भी तटस्थ 100 के स्तर से काफी ऊपर बना हुआ है।
इसके बावजूद, वित्तीय बाजार अभी भी 85 प्रतिशत से अधिक संभावना जता रहे हैं कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक इस वर्ष के अंत तक उधार लेने की लागत में एक और बढ़ोतरी करेगा। ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और तेल की बढ़ती कीमतें मुद्रास्फीति के जोखिम को लगातार बढ़ा रही हैं, जो मौद्रिक सख्ती के पक्ष को मजबूत करती हैं। विश्लेषकों का मानना है कि भले ही डॉलर में सुधार देखा जा रहा हो, लेकिन बॉन्ड बाजारों में होने वाले उतार-चढ़ाव सोने के लिए लगातार दिशा तय कर रहे हैं। अब निवेशकों का ध्यान देर रात आने वाले अमेरिकी उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई) के आंकड़ों पर केंद्रित हो गया है।
मध्य पूर्व में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति चिंताएं
भू-राजनीतिक मोर्चे पर बिगड़ते हालात भी सुरक्षित निवेश के प्रवाह को दिशा दे रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में एक मिसाइल हमले के बाद बुधवार को एक वाणिज्यिक कंटेनर जहाज डूब गया, जिसने वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति गलियारों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके साथ ही, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब में ड्रोन और मिसाइल हमलों का सिलसिला जारी रखा है। हूती समूह ने संकल्प जताया है कि वह यमन की राजधानी सना पर सऊदी अरब की कार्रवाई के जवाब में आने वाले दिनों में सऊदी अरब के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों और तेल के बुनियादी ढांचे को लगातार निशाना बनाना जारी रखेगा।
दूसरी ओर, रूस ने यूक्रेन पर दो तेल रिफाइनरियों पर हमले करने का आरोप लगाया है और दावा किया है कि यह कार्रवाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में कराई गई ऊर्जा संघर्ष विराम व्यवस्था का उल्लंघन है। इन घटनाओं से ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान की आशंकाएं गहरी हो गई हैं। वैश्विक तनाव के कारण पारंपरिक सुरक्षित निवेश विकल्पों में मांग तो बनी हुई है, लेकिन तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई दोबारा भड़कने का डर सोने में बहुत बड़ी तेजी पर ब्रेक भी लगा रहा है, क्योंकि उच्च मुद्रास्फीति से ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे रहने की संभावना बढ़ जाती है।
तकनीकी संकेतक: 100-अवधि के एसएमए के नीचे सीमित दायरे में कारोबार
तकनीकी चार्ट पर सोने का विश्लेषण करने पर 4-घंटे के चार्ट पर 100-अवधि के सिंपल मूविंग एवरेज (एसएमए) के नीचे एक सीमित दायरा दिखाई देता है। मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (एमएसीडी) संकेतक नकारात्मक बना हुआ है और अपनी सिग्नल लाइन के नीचे चल रहा है, जिसका हिस्टोग्राम संकुचित हो रहा है। यह संरचना दर्शाती है कि रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (आरएसआई) के 50 के तटस्थ स्तर के आसपास स्थिर होने के बावजूद नीचे की तरफ दबाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
लाइव तकनीकी आंकड़ों के अनुसार, दैनिक आरएसआई(14) 42 के स्तर पर है, जबकि एमएसीडी -60.01 पर है जो -59.71 की सिग्नल लाइन से नीचे (हिस्टोग्राम -0.31, मंदी का संकेत) है। मूविंग एवरेजेज के मोर्चे पर, 20-दिवसीय ईएमए 4,224 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 4,292 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 4,438 डॉलर पर स्थित हैं। 50-दिवसीय एसएमए 4,377 डॉलर और 200-दिवसीय एसएमए 4,542 डॉलर पर है, जहां 50-दिवसीय ईएमए का 200-दिवसीय ईएमए से नीचे फिसलना डेथ क्रॉस का निर्माण करता है और दीर्घकालिक डाउनट्रेंड की पुष्टि करता है। 52-सप्ताह का दायरा 3,901 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच बना हुआ है।
यदि सोना 4,180 डॉलर के करीब स्थित 100-अवधि के एसएमए से ऊपर निकलने में कामयाब होता है, तो उसे 4,215 डॉलर से 4,220 डॉलर के क्षैतिज क्षेत्र में कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है। इस बाधा के पार एक निरंतर ब्रेकआउट ही मौजूदा मंदी के रुख को कमजोर कर उच्च स्तरों का रास्ता साफ करेगा। दूसरी ओर, 4,100 डॉलर का मनोवैज्ञानिक स्तर तात्कालिक गिरावट को थाम सकता है, जिसके टूटने पर 4,075 डॉलर से 4,065 डॉलर का निचला क्षेत्र खुल जाएगा। लाइव स्तरों पर दैनिक पिवट बिंदु 4,157 डॉलर पर है, जिसमें पहला प्रतिरोध R1 4,192 डॉलर और दूसरा प्रतिरोध R2 4,219 डॉलर पर है, जबकि पहला समर्थन S1 4,130 डॉलर और दूसरा समर्थन S2 4,094 डॉलर पर केंद्रित है।
विदेशी मुद्रा बाजार और वैश्विक बॉन्ड प्रवाह
मुद्रा बाजार के पटल पर, अमेरिकी डॉलर ने गुरुवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले सबसे ज्यादा मजबूती दर्ज की। AUD/USD की जोड़ी 0.6950 के करीब कमजोर बनी रही, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया के रोजगार आंकड़ों ने निवेशकों को निराश किया। इसके विपरीत, USD/JPY की जोड़ी में बिकवाली का दबाव देखा गया और यह फिसलकर 158.00 से नीचे आ गई। टोक्यो में अधिकारियों द्वारा जापानी येन को समर्थन देने के लिए बाजार में सीधे हस्तक्षेप की अटकलों के कारण कारोबारी बेहद सतर्क रुख अपना रहे हैं।
इसके अतिरिक्त, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय गलियारों में चीन द्वारा अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड खरीदने की खबरों ने भी यील्ड पर दबाव बनाया है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के हवाले से सामने आया है कि चीन अपने अमेरिकी प्रतिभूति भंडार को अन्य देशों में गैर-अमेरिकी कस्टोडियन बैंकों में स्थानांतरित कर रहा है, जिससे अमेरिकी घाटे के वित्तपोषण में उसकी वास्तविक भूमिका स्पष्ट रूप से सामने नहीं आ पा रही है। इस घटनाक्रम ने ट्रेजरी यील्ड में गिरावट को तेज किया, जिसने डॉलर में आई गिरावट और सोने में आई तेजी को अतिरिक्त गति प्रदान की। कुल मिलाकर, आने वाले कारोबारी सत्रों में अमेरिकी पीपीआई रिपोर्ट और केंद्रीय बैंक के नीतिगत संकेत ही सोने की अगली बड़ी चाल तय करेंगे।























