अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में गुरुवार को अमेरिकी डॉलर पर जबर्दस्त बिकवाली का दबाव देखा गया, जिसके चलते प्रमुख मुद्राओं की तुलना में डॉलर का मूल्य मापने वाला अमेरिकी डॉलर सूचकांक फिसलकर 102.00 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया। सितंबर महीने के लिए जारी हुए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़े उम्मीद से कहीं अधिक गर्म रहने के बावजूद फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों पर कोई खास टिकाऊ प्रभाव नहीं डाल सके। इसके परिणामस्वरूप ग्रीनबैक को अपने हालिया लाभ से हाथ धोना पड़ा और एशियाई कारोबारी सत्र में डॉलर सूचकांक 0.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज करते हुए 101.90 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। बुधवार को स्थापित 18 महीने के उच्च स्तर 102.95 से यह एक तेज और तीव्र गिरावट को दर्शाता है।
मुद्रास्फीति रिपोर्ट और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति का गणित
सितंबर माह के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के जारी आंकड़ों के अनुसार अमेरिकी हेडलाइन और कोर मुद्रास्फीति दोनों में ही विश्लेषकों के अनुमान से अधिक तेजी दर्ज की गई। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि हेडलाइन मुद्रास्फीति बढ़कर 3.7 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि कोर मुद्रास्फीति 2.6 प्रतिशत दर्ज की गई। सामान्य तौर पर जब कीमतें बहुत तेजी से बढ़ती हैं और फेडरल रिजर्व के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर निकल जाती हैं, तो केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी का रास्ता चुनता है, जो स्वाभाविक रूप से अमेरिकी डॉलर के मूल्य को मजबूती देता है। हालांकि, मौजूदा आंकड़ों के आने के बाद अक्टूबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में वृद्धि की संभावनाओं में केवल मामूली बढ़ोतरी हुई, जो डॉलर में नई खरीदारी को आकर्षित करने के लिए नाकाफी साबित हुई।
अमेरिकी डॉलर के मूल्य को निर्धारित करने वाला सबसे निर्णायक कारक फेडरल रिजर्व द्वारा तय की जाने वाली मौद्रिक नीति ही है। फेडरल रिजर्व के पास मुख्य रूप से दो वैधानिक जनादेश हैं: मूल्य स्थिरता बनाए रखना यानी मुद्रास्फीति पर नियंत्रण करना और अर्थव्यवस्था में पूर्ण रोजगार को बढ़ावा देना। इन दोनों लक्ष्यों को साधने के लिए फेड का प्राथमिक उपकरण ब्याज दरों का समायोजन है। जब मुद्रास्फीति 2 प्रतिशत से नीचे गिरती है या बेरोजगारी दर अत्यधिक बढ़ जाती है, तब फेड ब्याज दरों में कटौती करता है, जिसका सीधा नकारात्मक असर ग्रीनबैक पर पड़ता है।
ट्रेजरी यील्ड में सुधार और चीनी प्रतिभूतियों का रहस्य
मुद्रास्फीति रिपोर्ट जारी होने के तुरंत बाद अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में भी उल्लेखनीय बिकवाली देखने को मिली। 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी पर यील्ड ने अपने सुधारात्मक रुख का विस्तार किया और यह फिसलकर 5.10 प्रतिशत के करीब आ गई। बॉन्ड यील्ड में आई इस सुस्ती ने अमेरिकी डॉलर से निवेशकों का समर्थन और कमजोर कर दिया। इसके अतिरिक्त, वित्तीय हलकों में इस बात की भी गंभीर चर्चा रही कि चीन अमेरिकी प्रतिभूतियों को गैर-अमेरिकी कस्टोडियन बैंकों में स्थानांतरित कर रहा है, जिससे अमेरिकी राजकोषीय घाटे के वित्तपोषण में अपनी वास्तविक भूमिका को वह अन्य देशों के माध्यम से परोक्ष रूप से संचालित कर रहा है। चीन द्वारा बॉन्ड खरीद से संबंधित चर्चाओं के बीच ट्रेजरी यील्ड में आई कमजोरी ने डॉलर पर दबाव को और गहरा कर दिया।
बाजार प्रतिभागियों की निगाहें अब सितंबर के उत्पादक मूल्य सूचकांक के आंकड़ों पर केंद्रित हैं, जिसे 12:30 जीएमटी पर जारी किया जाना है। थोक मूल्य स्तर पर लागत के ये आंकड़े फेड की भविष्य की रणनीतियों और मुद्रास्फीति के दबावों पर अतिरिक्त स्पष्टता प्रदान करेंगे।
प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के सामने डॉलर का प्रदर्शन
वैश्विक विदेशी मुद्रा पटल पर डॉलर अपने सभी प्रमुख प्रतिस्पर्धियों की तुलना में कमजोर प्रदर्शन करता दिखाई दिया। मुद्राओं के आपसी उतार-चढ़ाव को प्रदर्शित करने वाले आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर में सबसे बड़ी कमजोरी स्विस फ्रैंक के मुकाबले दर्ज की गई। सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली मुद्राओं की मांग अचानक बढ़ने से डॉलर में यह तेज गिरावट दर्ज हुई।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की मुद्रा जोड़ी 0.6950 के करीब अपने नुकसान पर स्थिर रही। ऑस्ट्रेलिया से आए निराशाजनक रोजगार आंकड़ों के चलते इस जोड़ी ने अपने पिछले दिन के मासिक उच्च स्तर से सुधारात्मक गिरावट को आगे बढ़ाया और गुरुवार के एशियाई सत्र के दौरान एक नया साप्ताहिक निचला स्तर छुआ। बहरहाल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और डॉलर के कमजोर पड़ने से इस जोड़ी को निचले स्तरों पर कुछ राहत मिली और नुकसान सीमित रहा।
वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की मुद्रा जोड़ी अपने पिछले दिन के तीन सप्ताह के उच्च स्तर से पीछे हटते हुए लगातार बिकवाली का शिकार बनी और गुरुवार को 158.00 के नीचे फिसल गई। जापानी अधिकारियों द्वारा येन को सहारा देने के लिए बाजार में सीधे हस्तक्षेप की अटकलों के बीच व्यापारी सतर्क बने हुए हैं। बुधवार को जारी गर्म मुद्रास्फीति आंकड़ों के बाद डॉलर अप्रैल 2025 के उच्च स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन बॉन्ड यील्ड के पीछे हटने से यह लाभ पूरी तरह उलट गया, जिसने इस मुद्रा जोड़ी पर गिरावट का चौतरफा दबाव बना दिया।
सोने की कीमतों में सुधार और तकनीकी परिदृश्य
अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में एक साथ आई गिरावट का सीधा फायदा बहुमूल्य धातुओं को मिला। सोने ने अपने साप्ताहिक निचले स्तरों से शानदार वापसी की और गुरुवार को शुरुआती कारोबार में 4,150 डॉलर प्रति औंस के स्तर को फिर से हासिल कर लिया। हालांकि दैनिक चार्ट पर सोने का सापेक्ष शक्ति सूचकांक मंदड़ियों के पक्ष में बना हुआ है, जो खरीदारों के लिए निकट भविष्य में एक तकनीकी बाधा पेश कर सकता है।
दैनिक चार्ट पर अमेरिकी डॉलर सूचकांक 101.99 के स्तर पर कारोबार करते हुए अल्पकालिक मंदी का हल्का रुझान प्रदर्शित कर रहा है, क्योंकि यह 102.11 पर स्थित 9-अवधि के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज के ठीक नीचे बना हुआ है। इस गतिशील अवरोध ने डॉलर की तात्कालिक रिकवरी को सीमित कर दिया है। 59.31 के स्तर पर स्थित रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यह दर्शाता है कि गति अभी भी सकारात्मक है, लेकिन इसमें लगातार नरमी आ रही है। यह इस बात का संकेत है कि महीने की शुरुआत में दिखे ओवरबॉट स्तरों के बाद तेजी लाने वाले खरीदार अपनी पकड़ खो रहे हैं।
ऊपरी स्तरों पर 102.11 पर स्थित 9-अवधि का ईएमए निकटतम प्रतिरोध स्तर है। यदि सूचकांक इस स्तर से ऊपर टिकने में सफल रहता है, तो मौजूदा गिरावट का दबाव कम होगा और एक व्यापक सुधार का रास्ता खुलेगा। जब तक यह अल्पकालिक ईएमए के नीचे सीमित रहता है, तब तक गति के ठंडा पड़ने के कारण सूचकांक में और गिरावट का जोखिम बना रहेगा।
लाइव बाजार आंकड़े और दीर्घकालिक रुझान
लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर सूचकांक (DX-Y.NYB) 102.07 पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद 102.55 की तुलना में 0.47 प्रतिशत की दैनिक गिरावट दर्शाता है। इसका 52-सप्ताह का दायरा 95.55 से 102.95 के बीच रहा है। ट्रेडिंग वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत के 1.00 गुना के बराबर दर्ज किया गया है।
तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो 14-अवधि का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 60 पर स्थित है। एमएसीडी 0.61 पर सिग्नल लाइन 0.61 के मुकाबले 0.01 का तेजी वाला हिस्टोग्राम प्रदर्शित कर रहा है। मूविंग एवरेज संरचना दीर्घकालिक मजबूती को दर्शाती है, जहां 20-दिवसीय ईएमए 101.62, 50-दिवसीय ईएमए 100.84 और 200-दिवसीय ईएमए 99.67 पर स्थित है। 50-दिवसीय ईएमए द्वारा 200-दिवसीय ईएमए को ऊपर की ओर पार करने से बना गोल्डन क्रॉस इस बात की पुष्टि करता है कि व्यापक रुझान अभी भी तेजी का है। 20-दिवसीय साधारण मूविंग एवरेज 100.31 और 200-दिवसीय एसएमए 99.45 पर है। बोलिंजर बैंड का दायरा 100.26 से 103.01 तक फैला है, जिसका मध्य स्तर 101.63 है, और वर्तमान मूल्य इन बैंड्स के भीतर बना हुआ है। एडीएक्स 45 पर मजबूत ट्रेंडिंग स्थिति दिखा रहा है, जबकि स्टोकेस्टिक पर फास्ट लाइन 55 और सिग्नल लाइन 70 पर है। 0.52 का 14-अवधि का एटीआर दैनिक अस्थिरता को रेखांकित करता है। पिवट बिंदु 102.08 पर है, जिसमें तात्कालिक प्रतिरोध R1 102.28 और R2 102.48 पर स्थित हैं, जबकि समर्थन स्तर S1 101.87 और S2 101.67 पर बने हुए हैं। 20-दिवसीय आधार पर सूचकांक को लगभग 100.17 पर समर्थन और 102.95 पर प्रतिरोध प्राप्त है।
विश्व मुद्रा के रूप में अमेरिकी डॉलर और फेडरल रिजर्व के चरम उपाय
अमेरिकी डॉलर संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक मुद्रा होने के साथ-साथ दुनिया के कई अन्य देशों में स्थानीय नोटों के साथ 'डी फैक्टो' मुद्रा के रूप में स्वीकार्य है। 2022 के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक विदेशी मुद्रा कारोबार में 88 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी अमेरिकी डॉलर की है, जो औसतन 6.6 ट्रिलियन डॉलर के दैनिक लेनदेन का प्रतिनिधित्व करता है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिकी डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड का स्थान लेते हुए दुनिया की प्राथमिक आरक्षित मुद्रा का दर्जा हासिल किया था। अपने इतिहास के अधिकांश हिस्से में अमेरिकी डॉलर सोने द्वारा समर्थित था, जब तक कि 1971 में ब्रेटन वुड्स समझौता समाप्त नहीं हो गया और गोल्ड स्टैंडर्ड को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया।
वित्तीय संकट जैसी चरम स्थितियों में फेडरल रिजर्व अतिरिक्त डॉलर छापने और मात्रात्मक सुगमता (क्वांटिटेटिव ईजिंग) लागू करने जैसे कदम भी उठा सकता है। यह एक गैर-मानक नीतिगत उपाय है, जिसका उपयोग तब किया जाता है जब बैंकों द्वारा एक-दूसरे को ऋण देना बंद कर देने के कारण ऋण प्रवाह सूख जाता है। वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान क्रेडिट संकट से निपटने के लिए फेड ने इसी हथियार का सहारा लिया था, जिसमें वित्तीय संस्थानों से सरकारी बॉन्ड खरीदने के लिए नए डॉलर छापे गए थे। इस प्रक्रिया से आमतौर पर अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है। इसके विपरीत, मात्रात्मक सख्ती (क्वांटिटेटिव टाइटनिंग) वह प्रक्रिया है जिसके तहत फेडरल रिजर्व बॉन्ड खरीद बंद कर देता है और परिपक्व होने वाले बॉन्ड के मूलधन का पुनर्निवेश नहीं करता। यह प्रक्रिया आम तौर पर अमेरिकी डॉलर को मजबूती प्रदान करती है।
























