वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में शुक्रवार के एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान न्यूजीलैंड डॉलर ने अपने पिछले दिन की मामूली रिकवरी बढ़त को आगे बढ़ाने में संघर्ष देखा। बुधवार को 9 जुलाई के बाद के सबसे निचले स्तर को छूने के बाद हाजिर कीमतें अब उस गिरावट से संभलकर 0.5730 के स्तर के आसपास कारोबार कर रही हैं, जो दिन के लिए लगभग अपरिवर्तित रुख को दर्शाती हैं। तकनीकी मोर्चे पर लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, इस मुद्रा जोड़ी का मौजूदा भाव 0.5724 पर चल रहा है, जो पिछले बंद स्तर 0.5728 से 0.07 प्रतिशत की मामूली गिरावट है। इसका 52 हफ्तों का निचला और ऊपरी दायरा 0.5584 से 0.6093 के बीच बना हुआ है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई नरमी ने अमेरिकी डॉलर को रक्षात्मक मुद्रा में रखा है, जिससे इस प्रमुख मुद्रा जोड़ी को कुछ राहत मिली है, लेकिन रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड के सतर्क रुख के कारण खरीदार अभी भी कोई बड़ा दांव लगाने से बच रहे हैं।
न्यूजीलैंड डॉलर और उसकी बुनियादी चाल
न्यूजीलैंड डॉलर, जिसे वित्तीय बाजारों में कीवी के नाम से भी जाना जाता है, वैश्विक निवेशकों और ट्रेडर्स के बीच व्यापक रूप से कारोबार की जाने वाली प्रमुख मुद्राओं में शामिल है। इसका मूल्यांकन काफी हद तक न्यूजीलैंड की घरेलू अर्थव्यवस्था की समग्र सेहत और देश के केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति प्राथमिकताओं से तय होता है। इन सामान्य बुनियादी कारकों के अलावा कुछ विशिष्ट परिस्थितियां भी हैं जो कीवी की दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इनमें सबसे बड़ा बाहरी कारक चीन की आर्थिक स्थिति है, क्योंकि चीन न्यूजीलैंड का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। जब भी चीनी अर्थव्यवस्था से जुड़ी सुस्ती या कमजोर मांग के आंकड़े आते हैं, तो न्यूजीलैंड से होने वाले निर्यातों पर सीधा असर पड़ता है, जिससे देश की आर्थिक गतिविधियों के साथ-साथ मुद्रा को भी झटका लगता है। इसके अतिरिक्त, वैश्विक डेयरी कीमतें भी न्यूजीलैंड डॉलर की चाल को सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं। डेयरी क्षेत्र न्यूजीलैंड का सबसे बड़ा निर्यात उद्योग है, और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ऊंची डेयरी कीमतें निर्यात से होने वाली आय को बढ़ाती हैं, जो घरेलू अर्थव्यवस्था और मुद्रा दोनों के लिए मजबूत सहारा बनती हैं।
रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड की मौद्रिक नीति और ब्याज दर अंतर
रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड का मुख्य नीतिगत लक्ष्य मध्यम अवधि में मुद्रास्फीति की दर को 1 प्रतिशत से 3 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखना है, जिसमें उसका प्राथमिक ध्यान 2 प्रतिशत के मध्य बिंदु के करीब स्थिरता हासिल करने पर केंद्रित रहता है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए केंद्रीय बैंक अपनी आधिकारिक ब्याज दरों का स्तर निर्धारित करता है।
जब मुद्रास्फीति बहुत अधिक होती है, तो रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड अर्थव्यवस्था को अत्यधिक गर्म होने से रोकने के लिए ब्याज दरों में वृद्धि करता है। दरों में बढ़ोतरी से बॉन्ड यील्ड में भी तेजी आती है, जो देश में पूंजी निवेश के आकर्षण को बढ़ाकर न्यूजीलैंड डॉलर को मजबूती प्रदान करती है। इसके विपरीत, जब केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करता है, तो आम तौर पर मुद्रा में कमजोरी देखी जाती है। इसके साथ ही, न्यूजीलैंड और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों के बीच का अंतर भी इस मुद्रा जोड़ी के उतार-चढ़ाव का एक बेहद अहम संचालक बनता है।
व्यापक आर्थिक आंकड़ों और बाजार की जोखिम धारणा का असर
न्यूजीलैंड से जारी होने वाले व्यापक आर्थिक आंकड़े देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति को समझने के लिए सबसे प्रमुख आधार हैं। उच्च आर्थिक विकास, कम बेरोजगारी दर और मजबूत कारोबारी विश्वास से परिपूर्ण अर्थव्यवस्था कीवी के लिए बेहद सकारात्मक मानी जाती है। मजबूत वृद्धि विदेशी निवेश को आकर्षित करती है और मुद्रास्फीति बढ़ने की स्थिति में केंद्रीय बैंक को ब्याज दरें बढ़ाने की गुंजाइश भी देती है। वहीं दूसरी तरफ, यदि जारी होने वाले आर्थिक आंकड़े कमजोर या उम्मीद से कमतर रहते हैं, तो न्यूजीलैंड डॉलर पर बिकवाली का दबाव गहराता है।
जोखिम धारणा के नजरिए से देखें तो न्यूजीलैंड डॉलर तब मजबूती पकड़ता है जब वित्तीय बाजारों में जोखिम लेने की धारणा प्रबल होती है, यानी जब निवेशक वैश्विक विकास को लेकर आशान्वित होते हैं और समग्र बाजार जोखिमों को कम आंकते हैं। ऐसी स्थिति कमोडिटीज और तथाकथित कमोडिटी मुद्राओं के लिए अनुकूल माहौल तैयार करती है। इसके विपरीत, बाजार में अस्थिरता, मंदी की आशंका या भू-राजनीतिक अनिश्चितता के दौर में निवेशक जोखिम वाली संपत्तियों से निकलकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिससे कीवी जैसी मुद्राओं पर दबाव बढ़ जाता है।
तकनीकी संकेतक और चार्ट का ढांचा
लाइव मार्केट आंकड़ों के आधार पर तकनीकी तस्वीर पर नजर डालें तो 14-दिवसीय आरएसआई 29 के स्तर पर है, जो इस बात का संकेत देता है कि यह जोड़ी वर्तमान में ओवरसोल्ड क्षेत्र में प्रवेश कर चुकी है। इसका 14-दिवसीय एडीएक्स 37 पर है, जो मौजूदा ट्रेंड की मजबूती को दर्शाता है। एमएसीडी का हिस्टोग्राम नकारात्मक क्षेत्र में बना हुआ है, जो मंदी के दबाव की निरंतरता को रेखांकित करता है।
मूविंग एवरेज के स्तरों पर 20-दिवसीय ईएमए 0.5821, 50-दिवसीय ईएमए 0.5840 और 200-दिवसीय ईएमए 0.5830 पर स्थित है, जबकि 50-दिवसीय एसएमए 0.5856 और 200-दिवसीय एसएमए 0.5854 पर है। मौजूदा भाव इन सभी प्रमुख मूविंग एवरेज से नीचे बना हुआ है, जो दीर्घकालिक गिरावट के रुझान की पुष्टि करता है, हालांकि ईएमए 50 और ईएमए 200 के बीच एक गोल्डन क्रॉस का तकनीकी स्वरूप भी मौजूद है। बोलिंगर बैंड की सीमा 0.5694 से 0.6017 के बीच है, जिसमें मध्य रेखा 0.5855 पर है। निकट अवधि में 20-दिवसीय सपोर्ट लगभग 0.5707 और रेजिस्टेंस 0.5978 के स्तर पर देखा जा रहा है।
अन्य वैश्विक संपत्तियों और एशियाई मुद्राओं का हाल
व्यापक विदेशी मुद्रा बाजार में शुक्रवार के सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर जोड़ी लगातार दूसरे दिन बढ़त के साथ 0.7100 से ऊपर बनी रही। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी के साथ-साथ रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर बुलॉक के आक्रामक बयानों ने ब्याज दर वृद्धि की उम्मीदों को बल दिया, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन मिला। हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक दृष्टिकोण और भू-राजनीतिक जोखिमों ने अमेरिकी डॉलर की गिरावट को सीमित रखते हुए इस जोड़ी की बढ़त को सीमित किया है।
दूसरी ओर, डॉलर बनाम जापानी येन में नई खरीदारी देखी गई और यह जोड़ी 157.00 के पार निकल गई। बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी ब्याज दर को 1.25 प्रतिशत तक बढ़ाने और कुछ हद तक सख्त नीतिगत बयान जारी करने के बावजूद जापानी मुद्रा भारी बिकवाली दबाव में रही, क्योंकि दर वृद्धि के विरोध में पड़े दो मतों ने बाजार को प्रभावित किया। निवेशक अब बैंक ऑफ जापान के गवर्नर उएदा की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर नजर बनाए हुए हैं। एक दशक से अधिक समय तक जापान की अति-निम्न ब्याज दरों ने वैश्विक स्तर पर खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित करने में मदद की थी, जिससे येन दुनिया के सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में से एक बन गया था। अब जब केंद्रीय बैंक नीति को सख्त कर रहा है, तो यह लाभ एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है।
कमोडिटी बाजार में सोने ने शुक्रवार की शुरुआत में 4,350 डॉलर प्रति औंस के आसपास अपनी पिछली रिकवरी को थामे रखा, हालांकि खरीदार अभी भी सतर्क नजर आ रहे हैं। कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट के कारण अमेरिकी डॉलर का कारोबार शांत रहा। सोना गुरुवार को 4,320 डॉलर के पास अपने 100-दिवसीय एसएमए से ऊपर बंद हुआ था, जहां उसका दैनिक आरएसआई तटस्थ स्थिति में है।



















