शेयर बाजार में 21 से 25 सितंबर के बीच 181 कंपनियों पर रहेगा फोकस, डिविडेंड और स्टॉक स्प्लिट का मिलेगा फायदासोने-चांदी की कीमतों में उछाल, 24 कैरेट सोना प्रति 100 ग्राम 14,200 रुपये चढ़ा और चांदी 2.55 लाख प्रति किलो पर पहुंचीस्टार्टअप बैटलफील्ड 200 के नए जजों के नामों का हुआ ऐलान, पांच प्रमुख वेंचर कैपिटलिस्ट परखेंगे उभरती कंपनियों का दमप्रकृति और आस्था का अनूठा संगम है सापूतारा, भगवान राम के वनवास और सर्प पूजा से जुड़ा है डांग का यह पर्वतीय इलाकाग्लोबल करेंसी मार्केट में ब्रिटिश पाउंड पर दबाव गहराया, बैंक ऑफ जापान के फैसले और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट से डॉलर सीमितचीन और पाकिस्तान ने शुरू किया सीमा प्रबंधन तंत्र, भारत ने क्षेत्र पर दोहराया अपना संप्रभु दावाअमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर पड़ा कनाडाई डॉलर, फेड की सख्ती से 1.4000 के करीब पहुंचा भावग्रे मार्केट में एसएस रिटेल और जिंदल सुप्रीम का दबदबा, जानिए चारों नए पब्लिक इश्यू के ताज़ा प्रीमियमअमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी और चिप शेयरों में तेजी से वॉल स्ट्रीट फ्यूचर्स चढ़ेकच्चे तेल में नरमी और चिप शेयरों में तेजी से दुनिया भर के बाजारों में लौटी रौनक
पश्चिम एशिया में सप्लाई संकट की चिंता घटी, कच्चा तेल फिसलकर 96.40 डॉलर पर पहुंचाबाज़ार
19 सित॰ 2026, 1:17 pm (16 मिनट पहले)· 0

पश्चिम एशिया में सप्लाई संकट की चिंता घटी, कच्चा तेल फिसलकर 96.40 डॉलर पर पहुंचा

सऊदी अरब द्वारा पाइपलाइन मरम्मत और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल शिपमेंट जारी रखने के कदमों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तीसरे दिन नरमी देखी गई।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है, जिसके चलते शुक्रवार को एशियाई कारोबारी घंटों में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल फिसलकर लगभग 96.40 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता नजर आया। पश्चिम एशिया में संभावित सप्लाई संकट को लेकर उपजी चिंताओं में कमी आने से तेल की दरों में गिरावट का यह रुख लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में दर्ज किया गया है। क्षेत्रीय तनाव को नियंत्रित करने और ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के लिए नए सिरे से शुरू हुए कूटनीतिक प्रयासों ने भी कीमतों को नीचे खींचने में मुख्य भूमिका निभाई है।

सऊदी अरब का इंफ्रास्ट्रक्चर रीस्टोरेशन और वैकल्पिक सप्लाई रूट

ऊर्जा आपूर्ति में किसी बड़े व्यवधान को टालने के लिए सऊदी अरब अपनी बुनियादी अवसंरचना को तेजी से बहाल करने की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है। रियाद का प्राथमिक लक्ष्य अगले कुछ ही दिनों के भीतर अपनी महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की लगभग आधी क्षमता को दोबारा शुरू करने का है। इसके साथ ही, अगले छह हफ्तों के भीतर इस पाइपलाइन को अपनी पूरी परिचालन क्षमता पर वापस लाने की समयसीमा तय की गई है।

ये भी पढ़ें

इस मरम्मत अवधि के दौरान वैश्विक बाजारों को कच्चे तेल की नियमित डिलीवरी जारी रखने के लिए राज्य अपने निर्यात का एक हिस्सा हॉर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए डायवर्ट कर रहा है। सऊदी अरब ने ईरानी हमलों के सीधे खतरे से अपने जहाजों को सुरक्षित रखने के लिए एक विशेष रणनीति अपनाई है। इसके तहत छोटे शटल जहाजों का उपयोग करके कच्चे तेल को हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजारा जा रहा है, जिसके बाद जलडमरूमध्य के बाहर सुरक्षित खुले पानी में खड़े बड़े टैंकरों में यह कच्चा तेल लोड किया जा रहा है। इस व्यवस्था से सऊदी टैंकर बेड़े पर हमलों का जोखिम काफी हद तक सीमित हो गया है।

कूटनीतिक दबाव और क्षेत्रीय शांति के प्रयास

ऊर्जा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर पर्दे के पीछे कूटनीतिक हलचल भी तेज हो चुकी है। सऊदी अरब की राजधानी रियाद से सीधी अपील किए जाने के बाद चीन ने ईरान पर हूती विद्रोहियों के हमलों को रोकने के लिए दबाव बनाया है। हाल के दिनों में विद्रोही समूह द्वारा सऊदी ऊर्जा ठिकानों पर हमले तेज किए जाने के जवाब में यह कूटनीतिक दखल सामने आया है।

दूसरी ओर, न्यूयॉर्क में खाड़ी देशों के नेताओं के साथ होने वाली आगामी उच्चस्तरीय बैठक से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान दिया कि वह ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू करने के विकल्प का आकलन कर रहे हैं। इन तमाम राजनीतिक बयानों और बहुपक्षीय बातचीत के बीच व्यापारी आने वाले दिनों में कूटनीतिक समाधान निकलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं, जिससे बाजार में पैनिक बाइंग थमी है।

डब्ल्यूटीआई क्रूड की विशेषताएं और वैश्विक बाजार में भूमिका

वैश्विक कमोडिटी बाजारों में बिकने वाला वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चे तेल के सबसे अहम प्रकारों में से एक है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारोबार करने वाले तीन प्रमुख प्रकारों में ब्रेंट और दुबई क्रूड के साथ डब्ल्यूटीआई शामिल है। तेल उद्योग में कम घनत्व और कम सल्फर सामग्री के कारण इसे अक्सर 'लाइट' और 'स्वीट' क्रूड कहा जाता है। कम सल्फर और बेहतर संरचना के चलते इसे रिफाइन करना बेहद आसान और किफायती माना जाता है, जिससे यह उच्च गुणवत्ता वाले ईंधनों के उत्पादन में पहली पसंद बनता है।

यह कच्चा तेल मुख्य रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका में निकाला जाता है और इसका वितरण कशिंग हब के जरिए होता है। ओक्लाहोमा स्थित इस कशिंग हब को विश्व में 'पाइपलाइनों का चौराहा' माना जाता है। डब्ल्यूटीआई पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार के लिए एक प्रमुख बेंचमार्क का काम करता है और वित्तीय मीडिया में तेल की दरों के लिए इसका भाव सबसे प्रमुखता से उद्धृत किया जाता है।

कीमतों को तय करने वाले मूलभूत कारक और ओपेक की भूमिका

किसी भी वित्तीय संपत्ति की तरह, डब्ल्यूटीआई तेल की कीमतें सीधे तौर पर मांग और आपूर्ति के बुनियादी नियमों पर आधारित होती हैं। जब दुनिया भर में आर्थिक विकास तेज होता है, तो औद्योगिक और परिवहन क्षेत्रों में तेल की मांग बढ़ती है, जिससे कीमतें चढ़ती हैं। इसके विपरीत, सुस्त वैश्विक विकास मांग को कमजोर करता है। वहीं दूसरी तरफ, राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध, व्यापारिक प्रतिबंध और तनाव सप्लाई लाइन को बाधित करते हैं, जिससे अचानक कीमतें उछल जाती हैं।

इसके अलावा, ओपेक यानी पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन कीमतों की दिशा तय करने में अत्यंत शक्तिशाली भूमिका निभाता है। ओपेक 12 प्रमुख तेल उत्पादक देशों का एक समूह है, जो हर साल दो बार आयोजित होने वाली बैठकों में सदस्य देशों के लिए उत्पादन कोटा सामूहिक रूप से तय करता है। जब ओपेक उत्पादन कोटा घटाने का फैसला करता है, तो बाजार में आपूर्ति सीमित हो जाती है और दरें बढ़ जाती हैं। जब यह संगठन उत्पादन बढ़ाने का निर्णय लेता है, तो अतिरिक्त आपूर्ति कीमतों को नीचे ले आती है। इसी व्यवस्था का विस्तार ओपेक+ के रूप में हुआ है, जिसमें 10 अतिरिक्त गैर-ओपेक देश शामिल हैं, जिनमें रूस सबसे प्रमुख सदस्य है।

अमेरिकी डॉलर के मूल्य का भी डब्ल्यूटीआई की कीमतों पर गहरा असर पड़ता है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का अधिकांश कारोबार अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर के कमजोर होने पर अन्य मुद्राओं के खरीदारों के लिए तेल खरीदना सस्ता हो जाता है, जिससे मांग में तेजी आती है। डॉलर मजबूत होने पर तेल अपेक्षाकृत महंगा हो जाता है, जो मांग को दबा देता है।

इन्वेंट्री रिपोर्ट्स का बाजार पर असर

कच्चे तेल की साप्ताहिक इन्वेंट्री के आंकड़े भी बाजार की दैनिक चाल को दिशा देते हैं। अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट और एनर्जी इंफॉर्मेशन एजेंसी द्वारा हर हफ्ते जारी की जाने वाली तेल इन्वेंट्री रिपोर्ट डब्ल्यूटीआई के दामों को सीधे प्रभावित करती हैं। इन गोदामों में जमा स्टॉक का घटना या बढ़ना वास्तविक मांग और आपूर्ति के अंतर को उजागर करता है।

यदि आंकड़ों में इन्वेंट्री में गिरावट दिखाई देती है, तो इसका सीधा संकेत होता है कि बाजार में मांग मजबूत हुई है, जो तेल की कीमतों को ऊपर की ओर ले जाती है। वहीं इन्वेंट्री में इजाफा यह दर्शाता है कि आपूर्ति खपत से अधिक हो चुकी है, जिससे कीमतें गिरती हैं। एपीआई अपनी रिपोर्ट प्रत्येक मंगलवार को जारी करता है, जबकि ईआईए का आधिकारिक डेटा इसके ठीक अगले दिन यानी बुधवार को सार्वजनिक किया जाता है। अधिकांश मौकों पर दोनों के परिणाम लगभग समान ही रहते हैं, और 75 प्रतिशत मामलों में उनके आंकड़ों में 1 प्रतिशत से भी कम का अंतर देखा जाता है। हालांकि, सरकारी एजेंसी होने के कारण बाजार प्रतिभागी ईआईए के आंकड़ों को अधिक विश्वसनीय मानते हैं।

मुद्रा और अन्य कमोडिटी बाजारों की स्थिति

कच्चे तेल में आई नरमी और बॉन्ड प्रतिफल में बदलाव का असर अन्य वैश्विक बाजारों पर भी स्पष्ट रूप से देखा गया। मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन मजबूत रुख के साथ कारोबार करता रहा और एशियाई सत्र में 0.7100 के स्तर से ऊपर टिका रहा। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई नरमी ने डॉलर पर दबाव डाला, जबकि इस महीने के अंत में रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती प्रदान की। हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के कड़े रुख और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने डॉलर की गिरावट को सीमित रखा।

उधर डॉलर बनाम जापानी येन में भी कुछ खरीदारी दर्ज की गई। शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार अगस्त में जापान की कोर उपभोक्ता मुद्रास्फीति बैंक ऑफ जापान के 2 प्रतिशत के लक्ष्य के करीब बनी रही। हाजिर बाजार में यह जोड़ी 156.00 से ऊपर रही, क्योंकि ट्रेडर्स बैंक ऑफ जापान द्वारा दरों को 31 साल के उच्चतम स्तर तक बढ़ाने की संभावना का इंतजार कर रहे हैं। जापान की दशकों पुरानी बेहद सस्ती ब्याज दरों ने वैश्विक स्तर पर खरबों डॉलर के निवेश को गति दी थी, जिससे येन सबसे सस्ता फंडिंग स्रोत बना रहा था। अब बैंक ऑफ जापान द्वारा नीति को और कड़ा किए जाने की तैयारियों के बीच यह दौर नए चरण में प्रवेश करता दिख रहा है।

कमोडिटी बाजार में सोने में भी लगातार दूसरे दिन बढ़त का रुख रहा और शुक्रवार को एशियाई सत्र के दौरान यह 4,350 डॉलर प्रति औंस से ऊपर बना रहा। कच्चे तेल में गिरावट के चलते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बहु-वर्षीय उच्च स्तरों से आई कमी ने डॉलर पर ब्रेक लगाया, जिससे गैर-उपज वाले सोने को सहारा मिला। हालांकि, फेडरल रिजर्व के आक्रामक मौद्रिक रुख ने पीली धातु की बढ़त को एक सीमित दायरे में बांधे रखा।

सवाल-जवाब

वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चा तेल किस स्तर पर कारोबार कर रहा है?
शुक्रवार को एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल फिसलकर लगभग 96.40 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
सऊदी अरब अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को कब तक पूरी तरह बहाल करेगा?
सऊदी अरब कुछ ही दिनों में लगभग आधी क्षमता बहाल करने का लक्ष्य बना रहा है और छह हफ्तों के भीतर पूरी परिचालन क्षमता पर लौटने की उम्मीद कर रहा है।
सऊदी अरब अपने तेल टैंकरों को हमलों से कैसे बचा रहा है?
वह हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल निकालने के लिए छोटे शटल जहाजों का उपयोग कर रहा है, जो जलडमरूमध्य के बाहर सुरक्षित खड़े बड़े टैंकरों में तेल लोड करते हैं।
चीन ने ईरान से क्या अपील की है?
रियाद से मिले अनुरोध के बाद चीन ने ईरान से आग्रह किया कि वह सऊदी ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमला करने वाले हूती विद्रोहियों को रोकने में मदद करे।
डब्ल्यूटीआई को 'लाइट' और 'स्वीट' क्रूड क्यों कहा जाता है?
डब्ल्यूटीआई को इसके अपेक्षाकृत कम घनत्व के कारण 'लाइट' और सल्फर की कम मात्रा के कारण 'स्वीट' कहा जाता है, जिससे इसे रिफाइन करना आसान होता है।
कच्चे तेल की इन्वेंट्री रिपोर्ट कौन सी एजेंसियां जारी करती हैं?
अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट मंगलवार को और एनर्जी इंफॉर्मेशन एजेंसी बुधवार को अपनी साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्ट जारी करती हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp