सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री तनाव अचानक गंभीर रूप ले चुका है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी ने टोगो के ध्वज वाले एक तेल टैंकर पर सैन्य कार्रवाई करने का दावा किया है। ईरानी सुरक्षा बल के अनुसार उक्त वाणिज्यिक पोत इस अहम जलमार्ग से अवैध रूप से गुजर रहा था, जिसके चलते उसे निशाना बनाया गया। इस हमले के बाद तेल टैंकर में भीषण आग लग गई और वह समुद्र के बीच में ही पूरी तरह रुक गया। इसके साथ ही ईरानी सैन्य नेतृत्व ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर उसका पूरा नियंत्रण बरकरार है और वह किसी भी आक्रामक अथवा गैर-कानूनी गतिविधि को यहां से गुजरने की अनुमति कतई नहीं देगा।
ओमान तट के समीप सुरक्षा घटना और समुद्री चेतावनी
इस ताजा हमले की पुष्टि अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियों ने भी की है। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस यानी यूकेएमटीओ ने गुरुवार को अधिकारिक तौर पर एक सुरक्षा घटना दर्ज किए जाने की सूचना जारी की। एजेंसी के अनुसार यह घटना होर्मुज जलडमरूमध्य के भीतर ओमान के खसाब से करीब 16 समुद्री मील उत्तर-पूर्व दिशा में घटित हुई। खाड़ी देशों से निकलने वाले वैश्विक कच्चे तेल के बड़े हिस्से के लिए यह जलडमरूमध्य मुख्य जीवनरेखा माना जाता है। इस महत्वपूर्ण चोकपॉइंट पर किसी भी वाणिज्यिक पोत को निशाना बनाए जाने से अंतरराष्ट्रीय नौवहन कंपनियों, तेल परिवहनकर्ताओं और व्यापारी जहाजों के बीच भारी अनिश्चितता का माहौल पैदा हो गया है।
डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान: ईरान पर व्यापक हमलों पर फैसला जल्द
मध्य पूर्व में जारी इस सैन्य गतिरोध के बीच वाशिंगटन से भी अत्यंत महत्वपूर्ण राजनीतिक और सैन्य संकेत सामने आए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि वह ईरान पर बड़े पैमाने के सैन्य हमलों को दोबारा शुरू करने अथवा न करने को लेकर एक निर्णायक और बड़े फैसले के बेहद करीब पहुंच रहे हैं। वाशिंगटन का प्रशासन महीनों से चल रहे इस युद्ध को समाप्त करने के विभिन्न विकल्पों, सैन्य रणनीतियों और कूटनीतिक परिणामों की समीक्षा करने में जुटा हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस रुख से साफ है कि यदि तेहरान की ओर से अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने का सिलसिला थमा नहीं, तो संघर्ष एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है।
वैश्विक तेल बाजार में हलचल: डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमतें फिसलीं
मध्य पूर्व के तनाव के बीच वैश्विक कमोडिटी बाजारों में भी असामान्य उतार-चढ़ाव देखने को मिला। आमतौर पर युद्ध अथवा आपूर्ति में रुकावट से कच्चे तेल की कीमतें तेजी से उछलती हैं, लेकिन ताजा कारोबारी सत्र में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल दैनिक आधार पर 1.12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज करते हुए 96.40 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया। डब्ल्यूटीआई अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में बेचे जाने वाले कच्चे तेल के प्रमुख प्रकारों में शामिल है। वैश्विक स्तर पर तीन बड़े तेल बेंचमार्क माने जाते हैं, जिनमें ब्रेंट और दुबई क्रूड के साथ डब्ल्यूटीआई का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।
तकनीकी रूप से डब्ल्यूटीआई क्रूड को हल्का और मीठा कच्चा तेल कहा जाता है। इसका कारण इसका अपेक्षाकृत कम गुरुत्वाकर्षण और बेहद कम सल्फर की मात्रा है। यह अत्यंत उच्च गुणवत्ता वाला कच्चा तेल माना जाता है, जिसे परिष्कृत करना और विभिन्न ईंधनों में बदलना काफी आसान होता है। इसका उत्पादन संयुक्त राज्य अमेरिका में होता है और इसका वितरण कुशिंग हब के माध्यम से किया जाता है, जिसे दुनिया का पाइपलाइन चौराहा भी कहा जाता है। यह तेल बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक बेंचमार्क है, जिसके मूल्य की चर्चा वित्तीय जगत और मीडिया में लगातार होती है।
कच्चे तेल की कीमतों को तय करने वाले प्रमुख कारक
दुनिया भर की किसी भी अन्य वित्तीय परिसंपत्ति की तरह डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतों का बुनियादी निर्धारण भी मांग और आपूर्ति के संतुलन पर निर्भर करता है। जब वैश्विक आर्थिक विकास मजबूत होता है, तो ऊर्जा और तेल की मांग में जोरदार वृद्धि होती है, जिससे कीमतें चढ़ती हैं। इसके विपरीत सुस्त आर्थिक विकास मांग को घटाकर कीमतों पर दबाव डालता है। दूसरी ओर भू-राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध, व्यापारिक प्रतिबंध और अंतरराष्ट्रीय तनाव आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करते हैं, जिससे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।
इसके अलावा प्रमुख तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक के फैसले भी कच्चे तेल के भाव को तय करने में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। वहीं अमेरिकी डॉलर का मूल्य भी डब्ल्यूटीआई के उतार-चढ़ाव को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का अधिकांश व्यापार अमेरिकी डॉलर में ही किया जाता है, इसलिए जब अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है, तो अन्य मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए तेल खरीदना अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है, जिससे मांग को समर्थन मिलता है। इसके उलट डॉलर के मजबूत होने पर तेल अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए महंगा पड़ जाता है।
एपीआई और ईआईए की साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्ट का असर
कच्चे तेल के अल्पकालिक और साप्ताहिक मूल्य निर्धारण में अमेरिकी पेट्रोलियम संस्थान यानी एपीआई और ऊर्जा सूचना एजेंसी यानी ईआईए द्वारा जारी की जाने वाली साप्ताहिक तेल भंडार रिपोर्ट अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वाणिज्यिक भंडारों में होने वाले बदलाव सीधे तौर पर मांग और आपूर्ति के वास्तविक उतार-चढ़ाव को दर्शाते हैं। यदि साप्ताहिक आंकड़ों में तेल के भंडारों में अप्रत्याशित गिरावट दिखाई देती है, तो यह बाजार में मजबूत मांग का संकेत होता है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें ऊपर चढ़ने लगती हैं। दूसरी तरफ भंडार में वृद्धि यह दर्शाती है कि बाजार में आपूर्ति जरूरत से ज्यादा है, जो कीमतों को नीचे धकेलने का काम करती है।
एपीआई अपनी साप्ताहिक रिपोर्ट प्रत्येक मंगलवार को सार्वजनिक करता है, जबकि इसके अगले ही दिन यानी बुधवार को ईआईए के आधिकारिक आंकड़े आते हैं। आमतौर पर दोनों के नतीजे एक समान दिशा दिखाते हैं और करीब 75 प्रतिशत मामलों में उनके आंकड़े एक दूसरे के एक प्रतिशत के दायरे में रहते हैं। हालांकि वित्तीय विश्लेषक और बड़े संस्थागत निवेशक ईआईए के आंकड़ों को अधिक विश्वसनीय मानते हैं, क्योंकि यह एक सरकारी एजेंसी है।
ओपेक और ओपेक प्लस की उत्पादन नीतियां
पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन यानी ओपेक कुल 12 तेल उत्पादक देशों का एक प्रभावशाली समूह है। यह समूह वर्ष में दो बार होने वाली अपनी बैठकों में सदस्य देशों के लिए सामूहिक रूप से तेल उत्पादन का कोटा तय करता है। उनके इस फैसले का सीधा और गहरा असर डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर पड़ता है। जब ओपेक सदस्य देश अपने उत्पादन कोटे में कटौती करने का निर्णय लेते हैं, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति सख्त हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप तेल के दाम बढ़ने लगते हैं। इसके विपरीत जब ओपेक उत्पादन बढ़ाने का फैसला करता है, तो बाजार में अतिरिक्त तेल आने से विपरीत प्रभाव पड़ता है और कीमतें नरम हो जाती हैं। वहीं ओपेक प्लस एक विस्तृत गठबंधन है, जिसमें ओपेक के अलावा दस अतिरिक्त गैर-ओपेक उत्पादक देश भी शामिल हैं, जिनमें सबसे प्रमुख देश रूस है।
मुद्रा बाजारों का रुख: ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और येन की चाल
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजारों में भी कई महत्वपूर्ण तकनीकी बदलाव देखने को मिले। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर यानी एयूडी/यूएसडी मुद्रा जोड़ी ने गुरुवार को वॉल स्ट्रीट के बंद होने के बाद जोरदार वापसी की। लगातार तीन दिनों की गिरावट के सिलसिले को तोड़ते हुए यह जोड़ी 0.7100 के स्तर को पार करने में सफल रही। अमेरिकी डॉलर में आई नरमी ने इस सुधार को मजबूत आधार प्रदान किया, जबकि बाजार प्रतिभागी फेडरल रिजर्व के बुधवार के आक्रामक संदेश के प्रभाव का आकलन कर रहे थे।
दूसरी ओर एशियाई बाजारों की शुरुआत से ठीक पहले यूएसडी/जेपीवाई मुद्रा जोड़ी में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई और यह 156.00 के दायरे में कारोबार करती नजर आई। इस जोड़ी ने अपने पिछले तीन दिनों के सकारात्मक क्रम की बढ़त गंवा दी और 156.50 के स्तर से ठीक पहले थम गई। मुद्रा बाजार के तमाम निवेशकों की नजरें शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान की बैठक पर टिकी हैं, जहां 25 आधार अंकों की ब्याज दर वृद्धि की व्यापक उम्मीदें लगाई जा रही हैं। बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीति बैठक केंद्रीय बैंकों के निर्णयों से भरे इस व्यस्त सप्ताह का समापन करेगी। बाजार विशेष रूप से इस बात की पुष्टि का इंतजार कर रहे हैं कि जापानी नीति में कड़े रुख का दौर आगे बढ़ेगा या नहीं, जिसने सितंबर में जापानी येन में जोरदार तेजी को गति दी थी।
जापान की दशकों पुरानी बेहद निचली ब्याज दरों ने दुनिया भर में खरबों डॉलर के वैश्विक निवेश के वित्तपोषण में अहम भूमिका निभाई थी, जिससे जापानी येन दुनिया के सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में से एक बन गया था। अब जब बैंक ऑफ जापान द्वारा नीति को और सख्त करने की तैयारी की जा रही है, तो लंबे समय से चला आ रहा यह फायदा एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। जब दुनिया की अधिकांश प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने मुद्रास्फीति से निपटने के लिए ब्याज दरों में भारी बढ़ोतरी की थी, तब भी जापान वैश्विक स्तर पर एक अपवाद बना रहा था।
सोने में भारी उछाल और कॉर्पोरेट ब्लॉकचेन डील
सुरक्षित निवेश विकल्प माने जाने वाले सोने की कीमतों में भी गुरुवार को तेज उछाल आया। पीली धातु ने ताजा साप्ताहिक उच्चतम स्तर को छू लिया, हालांकि यह तेजी प्रति ट्रॉय औंस 4,400 डॉलर के दायरे में आने के बाद कुछ शुरुआती प्रतिरोध का सामना करती दिखी। सोने की इस नई तेजी ने भी लगातार तीन कारोबारी सत्रों की गिरावट के क्रम को पलट दिया। अमेरिकी डॉलर में आई मामूली गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में आई कमजोरी ने सोने के इस पलटवार को खाद-पानी दिया।
वित्तीय और तकनीकी जगत से जुड़े एक बड़े घटनाक्रम में, वित्तीय डेटा और एनालिटिक्स कंपनी एसएंडपी ग्लोबल ने ब्लॉकचेन सुरक्षा फर्म ओपनजेपेलिन का अधिग्रहण करने पर सहमति व्यक्त की है। गुरुवार को घोषित इस सौदे का उद्देश्य एसएंडपी ग्लोबल की ऑन-चेन जोखिम मूल्यांकन क्षमताओं का विस्तार करना है। इस अधिग्रहण के माध्यम से ओपनजेपेलिन की स्मार्ट अनुबंध सुरक्षा सेवाएं, विकास से जुड़े उपकरण और ओपन-सोर्स लाइब्रेरी एसएंडपी ग्लोबल के मौजूदा डिजिटल एसेट और रिस्क असेसमेंट कारोबार का हिस्सा बन जाएंगी।
इसके अलावा पेरिस और बैंकॉक में सक्रिय डिजिटल उद्यमी लाला लिट श्रीजनदोर्न ने भी अपने व्यापारिक सफर को गति दी है, जो वर्ष 2019 से फ्रांस में निवास कर रही हैं। वैश्विक बाजारों में भू-राजनीतिक तनाव, मुद्रास्फीति, ऊर्जा आपूर्ति और केंद्रीय बैंकों की बदलती ब्याज दर नीतियों के बीच अनिश्चितता का यह दौर कई नई आर्थिक दिशाएं तय कर रहा है।



















