अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक के फैसले से ठीक पहले वैश्विक मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर अपनी बढ़त बनाए हुए है। छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा के मूल्य को दर्शाने वाला यूएस डॉलर इंडेक्स एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान लगातार छठे दिन मजबूती के साथ 99.70 के स्तर के करीब कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार प्रतिभागी केंद्रीय बैंक के ब्याज दर निर्णय और उसके बाद होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। ताज़ा बाजार आंकड़ों के मुताबिक डॉलर इंडेक्स 100.22 के स्तर पर पहुंच गया है, जहां 14-दिवसीय आरएसआई 60 के स्तर पर है और एमएसीडी 0.05 पर बुलिश हिस्टोग्राम संकेत दे रहा है। तकनीकी संरचना 100 से ऊपर आगे और बढ़त का समर्थन करती दिखाई दे रही है।
मुद्रास्फीति का दबाव और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की भारी संभावना
पिछले सप्ताह सामने आए अप्रत्याशित रूप से उच्च अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़ों ने वित्तीय बाजारों में इस धारणा को और पुख्ता कर दिया है कि केंद्रीय बैंक उधार लागत में सख्ती जारी रखेगा। वित्तीय बाजार व्यापक रूप से यह मानकर चल रहे हैं कि फेडरल रिजर्व बेंचमार्क ओवरनाइट ब्याज दर में 25 आधार अंकों (bps) की वृद्धि करेगा। इस संभावित बढ़ोतरी के साथ नीतिगत दर बढ़कर 3.75% से 4.00% के दायरे में पहुंच जाएगी। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक यह संकेत भी दे सकता है कि आने वाले समय में वित्तीय सख्ती का दौर अभी खत्म नहीं हुआ है। शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज के फेडवॉच टूल के ताजा आंकड़ों के अनुसार, बुधवार की नीतिगत बैठक में चौथाई प्रतिशत अंक दर वृद्धि की लगभग 92.4% संभावना जताई जा रही है।
सऊदी पाइपलाइन बंद होने और ऊर्जा संकट से उपजी चिंताएं
ऊर्जा बाजारों में मची उथल-पुथल ने महंगाई को लेकर चिंताओं को और गहरा कर दिया है। सऊदी अरब द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बायपास करने वाली अपनी एक प्रमुख पाइपलाइन को आपातकालीन स्थिति में बंद किए जाने के बाद कच्चे तेल की कीमतें अचानक चढ़ गईं। ऊर्जा लागत में निरंतर वृद्धि का सीधा असर व्यापक उपभोक्ता मुद्रास्फीति पर पड़ता है। कच्चे तेल के महंगे होने से परिवहन, उत्पादन और आम उपभोग की वस्तुएं महंगी हो जाती हैं, जिससे फेडरल रिजर्व को लंबे समय तक अपनी आक्रामक मौद्रिक नीति बनाए रखने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
चेयरमैन के बयानों और आगामी नीतिगत फैसलों पर नजर
ब्याज दर के ऐलान के तुरंत बाद बाजार का पूरा ध्यान फेड चेयरमैन केविन वॉर्श की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिक जाएगा। निवेशक और नीति विश्लेषक उनके हर शब्द का बारीकी से विश्लेषण करेंगे ताकि भविष्य की नीतिगत दिशा के स्पष्ट संकेत मिल सकें। वित्तीय हलकों में इस बात को लेकर भी अटकलें तेज हो रही हैं कि क्या केंद्रीय बैंक अक्टूबर या दिसंबर की आगामी बैठकों में भी दरों में अतिरिक्त बढ़ोतरी करने का मन बना रहा है। चेयरमैन का रुख तय करेगा कि डॉलर में यह तेजी आगे भी जारी रहेगी या बाजार में कोई मुनाफावसूली देखने को मिलेगी।
डॉलर इंडेक्स के प्रमुख तकनीकी स्तर और चार्ट विश्लेषण
तकनीकी चार्ट पर डॉलर इंडेक्स के लिए महत्वपूर्ण समर्थन और प्रतिरोध स्तर स्पष्ट रूप से उभर कर आ रहे हैं। गिरावट की स्थिति में 99.64 पर स्थित 50-दिवसीय ईएमए तत्काल समर्थन का काम कर रहा है, जबकि किसी गहरे सुधार की स्थिति में 99.35 पर स्थित 9-दिवसीय ईएमए एक द्वितीयक आधार प्रदान करता है। जब तक इंडेक्स इन गतिशील औसत समर्थनों से ऊपर बना रहता है, अल्पावधि में सकारात्मक रुख कायम रहने की पूरी संभावना है। वर्तमान सत्र के दैनिक तकनीकी स्तरों के लिहाज से पिवट स्तर 100.32 पर स्थित है। ऊपर की ओर पहला प्रतिरोध स्तर 100.46 और दूसरा प्रतिरोध 100.71 पर आंका गया है, जबकि नीचे की ओर समर्थन स्तर 100.07 और 99.93 पर मौजूद हैं। इंडेक्स का 52-सप्ताह का दायरा 95.55 से 101.80 के बीच रहा है, और इसका 20-दिवसीय दैनिक वोलैटिलिटी बफर (एटीआर) 0.44 है।
वैश्विक आरक्षित मुद्रा के रूप में अमेरिकी डॉलर का महत्व
अमेरिकी डॉलर संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक मुद्रा है, साथ ही यह दुनिया भर के कई अन्य देशों में स्थानीय नोटों के साथ वास्तविक मुद्रा के रूप में बड़े पैमाने पर चलन में है। 2022 के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक विदेशी मुद्रा कारोबार में अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी 88% से अधिक है, जिसका दैनिक लेन-देन औसतन 6.6 ट्रिलियन डॉलर बैठता है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिकी डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड की जगह लेते हुए विश्व की प्राथमिक आरक्षित मुद्रा का दर्जा हासिल किया था। अपने इतिहास के अधिकांश समय में डॉलर स्वर्ण भंडार पर आधारित था, लेकिन 1971 के ब्रेटन वुड्स समझौते के समाप्त होने के साथ गोल्ड स्टैंडर्ड पूरी तरह समाप्त हो गया।
फेडरल रिजर्व की नीतियां और मुद्रा मूल्यांकन की प्रक्रिया
अमेरिकी डॉलर के मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति है। फेडरल रिजर्व को दो प्रमुख जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जिनमें मूल्य स्थिरता हासिल करना यानी मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना और अधिकतम रोजगार को बढ़ावा देना शामिल है। इन दोनों लक्ष्यों को साधने के लिए केंद्रीय बैंक का प्राथमिक हथियार ब्याज दरों का समायोजन है। जब कीमतें तेजी से बढ़ती हैं और महंगाई फेड के 2% के लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाता है, जिससे अमेरिकी डॉलर को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत, जब महंगाई 2% से नीचे गिर जाती है या बेरोजगारी दर खतरनाक रूप से बढ़ जाती है, तो फेड ब्याज दरों में कटौती करता है, जिसका नकारात्मक असर डॉलर के मूल्य पर पड़ता है।
क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग का तंत्र
अत्यधिक गंभीर आर्थिक संकटों के समय फेडरल रिजर्व अतिरिक्त डॉलर छापकर क्वांटिटेटिव ईजिंग (QE) का सहारा भी ले सकता है। यह एक गैर-मानक नीतिगत उपाय है जिसके जरिए वित्तीय प्रणाली में ऋण प्रवाह को तेजी से बढ़ाया जाता है। इसका उपयोग तब किया जाता है जब बैंकों के बीच एक-दूसरे के डिफॉल्ट होने के डर से कर्ज देना पूरी तरह बंद हो जाता है और केवल ब्याज दरों में कटौती से राहत नहीं मिल पाती। 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान क्रेडिट संकट से निपटने के लिए फेड ने इसी हथियार का इस्तेमाल किया था, जिसके तहत वित्तीय संस्थानों से बड़े पैमाने पर सरकारी बॉन्ड खरीदे गए थे। क्वांटिटेटिव ईजिंग से आमतौर पर डॉलर कमजोर होता है। इसके विपरीत, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) वह प्रक्रिया है जिसमें केंद्रीय बैंक बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और परिपक्व होने वाले बॉन्ड के मूलधन का पुनर्निवेश नहीं करता। यह प्रक्रिया आम तौर पर अमेरिकी डॉलर के लिए सकारात्मक और मजबूती प्रदान करने वाली मानी जाती है।
विदेशी मुद्रा, सोना और डिजिटल संपत्तियों पर असर
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स में बहु-वर्षीय उछाल और डॉलर की मजबूती का सीधा असर अन्य वैश्विक संपत्तियों पर देखा जा रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) लगातार तीसरे दिन गिरावट में रहा और 0.7120 के आसपास तीन सप्ताह के निचले स्तर के करीब कारोबार कर रहा है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने सुरक्षित पनाहगाह के रूप में डॉलर की मांग को बढ़ाया है, जिससे जोखिम वाली मुद्राओं पर दबाव बना हुआ है। दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले डॉलर (USD/JPY) एशियाई सत्र के दौरान एक सप्ताह के नए उच्च स्तर पर पहुंच गया, हालांकि गुरुवार से शुरू हो रही बैंक ऑफ जापान की नीतिगत बैठक से पहले हाजिर भाव 155.00 के मध्य स्तर से नीचे बना हुआ है। जापान की लंबे समय से चली आ रही बेहद कम ब्याज दरों ने वैश्विक स्तर पर खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित करने में मदद की थी, जिससे येन दुनिया का सबसे सस्ता फंडिंग स्रोत बना रहा, लेकिन अब बैंक ऑफ जापान द्वारा नीति को और सख्त किए जाने की उम्मीदों से यह स्थिति बदल सकती है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स के बढ़ने से सोने की कीमतों पर भी दबाव दिखा और धातु 4,300 डॉलर से नीचे रही। दूसरी ओर, क्रिप्टोकरेंसी बाजार में सीनेट में क्लैरिटी एक्ट के आगे न बढ़ पाने के बाद एथेरियम गिरकर 2,400 डॉलर पर आ गया, हालांकि इस गिरावट और फेड की ब्याज दर वृद्धि की निश्चितता के बावजूद खरीदारों ने बाजार में नए सिरे से पूंजी लगाना जारी रखा है।



















