अंतरराष्ट्रीय मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले चीनी युआन सीमित दायरे में फंसा हुआ नजर आ रहा है। यूओबी में क्वेक सेर लियांग के अनुसार यूएसडी/सीएनएच बिना किसी स्पष्ट दिशा के लगभग 6.71 के आसपास काफी संकीर्ण दायरे में कारोबार कर रहा है। इस दौरान बाजार में किसी भी बड़े उतार-चढ़ाव या गति में बदलाव के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। 24 घंटे के दृष्टिकोण पर गौर करें तो इस विनिमय दर के 6.7060 और 6.7160 के बीच टिके रहने की संभावना जताई गई है। व्यापक रूप से 1 से 3 सप्ताह के समय में डॉलर के थोड़ा मजबूत होने की गुंजाइश बनी हुई है, लेकिन किसी भी प्रकार की बढ़त 6.7040 से 6.7290 के दायरे में सीमित रहने की उम्मीद है।
दैनिक कारोबार में युआन की दिशा और तकनीकी स्तर
विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में हालिया सत्रों के दौरान डॉलर और युआन के बीच बहुत कड़ा मुकाबला देखा गया है। पिछले शुक्रवार को डॉलर 6.7060 से 6.7146 के दायरे में कारोबार करता दिखा और अंततः 6.7093 के स्तर पर बंद हुआ, जो करीब 0.09 प्रतिशत की मामूली गिरावट थी। इसके बाद के सत्र में बाजार की गतिशीलता में न तो ऊपर और न ही नीचे की ओर कोई नया रुझान बना। तकनीकी आकलन के अनुसार मुद्रा के 6.7040 और 6.7120 के बीच कारोबार करने का अनुमान था, लेकिन वास्तविक कारोबार 6.7045 से 6.7143 के बीच हुआ और समाप्ति 6.7096 पर बिना किसी खास बदलाव के हुई। कीमतों की यह चाल स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि मौजूदा समय में कोई नए संकेत नहीं मिल रहे हैं, जिसके कारण दैनिक स्तर पर दायरा 6.7060 से 6.7160 तक ही बंधा रहने की संभावना है।
लंबी अवधि में संभावित बढ़त और सीमित दायरा
मध्यम अवधि यानी अगले 1 से 3 सप्ताह के परिदृश्य पर नजर डालें तो 11 सितंबर को जब स्पॉट स्तर 6.7140 पर था, तब बढ़ती हुई गति से यह अनुमान लगाया गया था कि अमेरिकी डॉलर मामूली बढ़त हासिल कर सकता है। हालांकि साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया था कि किसी भी प्रकार की तेजी 6.7040 से 6.7290 के दायरे के भीतर ही सीमित रहेगी। भले ही पिछले कुछ सत्रों के दौरान ऊपर की ओर बढ़ने की यह गति कुछ हद तक धीमी पड़ गई है, लेकिन तकनीकी विश्लेषकों का यही मानना है कि मौजूदा स्थिति में दृष्टिकोण में कोई बड़ा फेरबदल नहीं हुआ है और विनिमय दर इसी दायरे में घूमती रहेगी।
फेडरल रिजर्व की नीति से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव
वैश्विक करेंसी बाजार के अन्य हिस्सों में भी अमेरिकी डॉलर की ताकत का असर देखने को मिल रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) में सोमवार की गिरावट के बाद अतिरिक्त कमजोरी देखी गई। हालांकि एशिया के बाजारों में शुरुआती घंटी बजने से ठीक पहले यह जोड़ी किसी तरह 0.7100 के अहम स्तर से ऊपर खुद को बनाए रखने में सफल रही। स्पॉट कीमतों में यह नरमी सीधे तौर पर अमेरिकी डॉलर में आई मजबूती का नतीजा है। बुधवार को फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी किए जाने की बढ़ती उम्मीदों ने डॉलर को अतिरिक्त बल दिया है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा दबाव का सामना कर रही है।
येन के मुकाबले डॉलर 155.00 की ओर और केंद्रीय बैंकों का रुख
उधर डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) मंगलवार की सुबह 155.00 के स्तर की तरफ बढ़ता रहा और कारोबारी इसमें और तेजी की संभावनाएं तलाशते रहे। इस हफ्ते आने वाले एफओएमसी और बैंक ऑफ जापान की महत्वपूर्ण बैठकों से पहले ट्रेडर्स काफी सतर्क हैं। फेडरल रिजर्व की ओर से दर वृद्धि के बढ़ते दांव और कच्चे तेल के कारण बढ़ती महंगाई के जोखिमों ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को कई वर्षों के उच्चतम स्तर के करीब टिका रखा है। इस मजबूत बॉन्ड यील्ड ने अमेरिकी डॉलर और इस मुद्रा जोड़ी दोनों को सहारा दिया है। दूसरी तरफ बैंक ऑफ जापान के नीति सामान्यीकरण को लेकर आक्रामक उम्मीदें जापानी येन को भी समर्थन दे रही हैं, जो यूएसडी/जेपीवाई की तेज बढ़त को सीमित कर सकती हैं।
जापान की दशकों पुरानी बेहद कम ब्याज दरों ने एक समय में खरबों डॉलर के वैश्विक निवेश को वित्तीय पोषण दिया था, जिससे जापानी येन दुनिया में सबसे सस्ते फंड जुटाने वाले स्रोतों में से एक बन गया था। चूंकि अधिकांश प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं ने मुद्रास्फीति से निपटने के लिए ब्याज दरों में तेजी से बढ़ोतरी की, जापान लंबे समय तक दुनिया में एक अपवाद बना रहा। लेकिन अब बैंक ऑफ जापान द्वारा इस सप्ताह अपनी मौद्रिक नीति को और कड़ा करने की उम्मीदों के साथ यह पुराना लाभ एक नए दौर में प्रवेश करता नजर आ रहा है।
सोने में भारी गिरावट और भू-राजनीतिक तनाव का प्रभाव
फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले की नजदीकी और मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध के बीच अमेरिकी डॉलर ने अपनी मजबूत बढ़त को फिर से बहाल कर लिया है। डॉलर की इस नई मांग के सामने सुरक्षित निवेश माना जाने वाला सोना बुरी तरह लड़खड़ा गया है। हालांकि पीली धातु ने अगस्त की शुरुआत में अपनी खोई हुई चमक वापस पाने का हल्का प्रयास किया था, लेकिन डॉलर की बढ़ती खरीदारी के आगे सोने की तेजी टिक नहीं सकी। एक महीने पहले जहां सोना 4,700 डॉलर के उत्साहजनक शिखर पर था, वहीं अब यह गिरकर 4,000 डॉलर के स्तर के काफी करीब पहुंच चुका है। निवेशक अब केंद्रीय बैंकों के आगामी फैसलों और ब्याज दरों की भविष्य की दिशा पर नजर टिकाए हुए हैं।



















