चीन की अर्थव्यवस्था में आंतरिक मांग कमजोर बनी हुई है, जिसके चलते वहां की आर्थिक वृद्धि पूरी तरह निर्यात पर निर्भर नजर आ रही है। रियल एस्टेट और विनिर्माण क्षेत्र में निवेश घटने के साथ-साथ खुदरा बाजार और वाहन बिक्री में लगातार मंदी देखी जा रही है। मजबूत व्यापार अधिशेष के दम पर विदेशी पूंजी देश में आ रही है और यह मुद्रा को सहारा दे रही है, लेकिन इसके बावजूद चीनी युआन की अमेरिकी डॉलर के मुकाबले बढ़ने की रफ्तार काफी धीमी पड़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू अर्थव्यवस्था की यह सुस्ती लंबे समय तक खिंच सकती है, जिससे चालू वर्ष के बाकी महीनों में युआन की चाल बेहद सीमित रहने का अनुमान है। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर अमेरिकी केंद्रीय बैंक की नीतिगत घोषणाओं और ब्याज दर में बढ़ोतरी की आशंकाओं के चलते डॉलर को नया बल मिला है, जिसका सीधा असर एशियाई और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं पर साफ दिखाई दे रहा है।
चीन में आंतरिक निवेश और निर्माण गतिविधियों में तेज गिरावट
आंकड़ों के मुताबिक, साल के पहले आठ महीनों के दौरान कुल निवेश में पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 7.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इस आंकड़े का मासिक विश्लेषण दर्शाता है कि अकेले अगस्त के महीने में निवेश में सालाना आधार पर लगभग 11 प्रतिशत की कमी आई है। निर्माण क्षेत्र की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बनी हुई है, जहां नए निर्माण कार्यों की शुरुआत में सालाना आधार पर 30 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। संकट सिर्फ आवासीय या व्यावसायिक निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और विनिर्माण उद्योग में भी पूंजीगत निवेश लगातार सिकुड़ रहा है। इसके साथ ही वाहन बिक्री में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो घरेलू उपभोक्ताओं की हिचकिचाहट और घटती खर्च क्षमता को साफ उजागर करती है।
खुदरा बिक्री पर महंगाई का असर और वास्तविक खपत में कमी
घरेलू बाजार में खुदरा बिक्री के जो ताजा आंकड़े सामने आए हैं, वे भी निराशाजनक रहे हैं। नाममात्र यानी नॉमिनल आधार पर खुदरा बिक्री में सालाना आधार पर केवल 0.4 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज की गई। हालांकि जब इन आंकड़ों में से मुद्रास्फीति के प्रभाव को हटाकर वास्तविक बिक्री का आकलन किया जाता है, तो असल में बिक्री में 0.4 प्रतिशत की सालाना गिरावट दिखाई देती है। यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि घरेलू स्तर पर सामान और सेवाओं की कुल मात्रात्मक मांग में कमी आई है। जब तक स्थानीय उपभोक्ता बाजार में विश्वास बहाल नहीं होता और खर्च में वास्तविक तेजी नहीं आती, तब तक घरेलू अर्थव्यवस्था के अन्य सहायक क्षेत्रों पर भी मंदी का दबाव बना रहेगा।
निर्यात और व्यापार अधिशेष से मुद्रा को सीमित सहारा
आंतरिक मंदी के विपरीत, चीन की आर्थिक वृद्धि को मुख्य रूप से बाहरी व्यापार यानी निर्यात से सहारा मिल रहा है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, देश का व्यापार अधिशेष लगातार बढ़ रहा है, जिससे समग्र आर्थिक वृद्धि को सहारा मिल रहा है। विदेशी बाजारों में चीनी सामान की मजबूत मांग के कारण देश में विदेशी पूंजी का प्रवाह बना हुआ है, जिससे स्थानीय मुद्रा को समर्थन मिलता है। फॉरेन कैपिटल के इस निरंतर प्रवाह ने युआन को भारी गिरावट से तो बचा रखा है, लेकिन यह घरेलू मंदी की भरपाई करने में पूरी तरह सक्षम साबित नहीं हो रहा है।
डॉलर के मुकाबले युआन की मजबूती की रफ्तार आधी हुई
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले युआन के प्रदर्शन का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि हाल के दिनों में इसकी मजबूती की गति आधी रह गई है। साल के शुरुआती महीनों में, युआन अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 1 प्रतिशत प्रति माह की दर से बढ़ रहा था। इस दौरान केवल मार्च का महीना अपवाद रहा, जब ईरान संघर्ष की शुरुआत के चलते बाजार में अनिश्चितता फैली थी। हालांकि हालिया दौर में यह बढ़त घटकर महज 0.5 प्रतिशत प्रति माह रह गई है। फॉरेक्स विश्लेषक फोकमर बावर के अनुसार, घरेलू अर्थव्यवस्था की सुस्ती इस गिरावट का मुख्य कारण है और इसके बने रहने से युआन की धीमी चाल जारी रहने की संभावना है।
वैश्विक बाजार में डॉलर की धमक और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की स्थिति
चीन की स्थानीय परिस्थितियों से परे, वैश्विक मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर की मजबूती का रुख हावी है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा आगामी बुधवार को ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी के अनुमानों से डॉलर इंडेक्स को भारी मजबूती मिली है। इस दबाव के चलते ऑस्ट्रेलियाई डॉलर यानी AUD/USD में सोमवार की गिरावट का सिलसिला आगे बढ़ा, हालांकि यह एशियाई बाजार की शुरुआत से पहले 0.7100 के अहम स्तर से ऊपर बने रहने में कामयाब रहा। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तर के करीब बनी हुई है, जिसे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से उपजे मुद्रास्फीति जोखिमों से भी समर्थन मिल रहा है।
येन पर बैंक ऑफ जापान की बैठक और ब्याज दर के बदलाव
डॉलर के मुकाबले जापानी येन यानी USD/JPY मंगलवार तड़के 155.00 के स्तर की ओर बढ़ता नजर आया और कारोबारी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी और बैंक ऑफ जापान की इस सप्ताह होने वाली अहम बैठकों के नतीजों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। जापान की दशकों पुरानी बेहद कम ब्याज दरों ने दुनिया भर में खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित करने में मदद की थी, जिससे जापानी येन वैश्विक स्तर पर फंडिंग का सबसे सस्ता स्रोत बन गया था। जहां अधिकांश बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं ने मुद्रास्फीति से निपटने के लिए ब्याज दरें बढ़ा दी थीं, वहीं जापान लंबे समय तक अपवाद बना रहा। हालांकि, इस सप्ताह बैंक ऑफ जापान द्वारा मौद्रिक नीति को और कड़ा किए जाने की उम्मीदों से येन को कुछ सहारा मिल सकता है, जिससे USD/JPY की ऊपरी बढ़त पर ब्रेक लग सकता है।
भू-राजनीतिक तनाव और कीमती धातुओं में भारी गिरावट
मध्य पूर्व में युद्ध की तीव्रता बढ़ने और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति घोषणा की तारीख नजदीक आने के साथ ही अमेरिकी डॉलर सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में उभरकर सामने आया है। डॉलर की इस मजबूत मांग ने सोने की कीमतों पर भारी दबाव बनाया है। अगस्त की शुरुआत में सोने की कीमतों ने अपनी चमक दोबारा हासिल करने की हल्की कोशिश की थी, लेकिन डॉलर की तेज मांग के आगे पीली धातु बुरी तरह लड़खड़ा गई। एक महीने पहले 4,700 डॉलर के उत्साहजनक शिखर पर पहुंचने वाला सोना अब टूटकर 4,000 डॉलर के स्तर के बेहद करीब आ गया है, जिससे निवेशकों का रुख पूरी तरह अमेरिकी मुद्रा की ओर झुकता दिखाई दे रहा है।



















