वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की मजबूती के बीच ब्रिटिश पाउंड लगातार दबाव का सामना कर रहा है। जीबीपी/यूएसडी (GBP/USD) मुद्रा जोड़ी अपने 200 दिनों के मूविंग एवरेज (200-DMA) और अगस्त महीने के निचले स्तर की ओर गिरकर 1.3440 से 1.3420 के स्तर पर आ पहुंची है। विश्लेषकों का मानना है कि यह दायरा पाउंड के लिए एक संभावित सपोर्ट क्षेत्र का काम कर सकता है। हालांकि बाजार सहभागियों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या मुद्रा इस महत्वपूर्ण स्तर को बचा पाने में सफल होगी या फिर बिकवाली का यह रुख आने वाले दिनों में और अधिक गहराएगा।
तकनीकी नजरिए से देखा जाए तो मौजूदा गिरावट के बाद पाउंड में एक संक्षिप्त तकनीकी सुधार या संक्षिप्त उछाल देखने को मिल सकता है। इसके बावजूद किसी व्यापक तेजी की पुष्टि के लिए इस जोड़ी का हालिया पिवट हाई 1.3565 के ऊपर निकलना बेहद आवश्यक माना जा रहा है। यदि ब्रिटिश पाउंड 1.3420 के अहम स्तर से ऊपर टिकने में असमर्थ रहता है, तो इसमें कमजोरी और तेज हो सकती है। ऐसी परिस्थिति में नीचे की ओर अगले संभावित लक्ष्य 1.3360 और 1.3270 के अनुमानित स्तरों पर स्थित हो सकते हैं। इस तकनीकी उठापटक के बीच निवेशक केंद्रीय बैंकों के आगामी फैसलों और आर्थिक आंकड़ों पर बारीक नजर बनाए हुए हैं।
अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं पर अमेरिकी डॉलर का बढ़ता दबदबा
अमेरिकी डॉलर केवल पाउंड पर ही नहीं बल्कि अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं पर भी भारी पड़ रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले डॉलर की जोड़ी, यानी एयूडी/यूएसडी (AUD/USD), बुधवार के एशियाई कारोबारी सत्र में लगातार तीसरे दिन नकारात्मक दायरे में बनी रही। यह जोड़ी 0.7100 के स्तर का बचाव करने की कोशिश कर रही है और अपने मासिक निचले स्तर के बेहद करीब कारोबार कर रही है। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की प्रत्याशा और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण पैदा हुए महंगाई के डर ने अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल (बॉन्ड यील्ड) को कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है। इसके अतिरिक्त, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव सुरक्षित निवेश के तौर पर अमेरिकी डॉलर की मांग बढ़ा रहा है, जिसका सीधा नुकसान जोखिम के प्रति संवेदनशील मानी जाने वाली ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को उठाना पड़ रहा है।
वहीं दूसरी ओर जापानी मुद्रा येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की जोड़ी, यूएसडी/जेपीवाई (USD/JPY), बुधवार के एशियाई सत्र में 155.00 के पार निकलकर एक सप्ताह के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। कच्चे तेल से जुड़ी महंगाई की चिंताओं और फेडरल रिजर्व की संभावित दर वृद्धि ने अमेरिकी प्रतिफल को जो मजबूती दी है, उसने डॉलर को व्यापक समर्थन प्रदान किया है। इसके साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने डॉलर की वैश्विक आरक्षित मुद्रा (रिजर्व करेंसी) की स्थिति को और अधिक सशक्त बना दिया है। हालांकि बुधवार को फेडरल रिजर्व के आने वाले नीतिगत फैसले और गुरुवार से शुरू हो रही बैंक ऑफ जापान (BoJ) की बैठक से पहले खरीदार सतर्क नजर आ रहे हैं, जिसकी वजह से यह जोड़ी 155.50 के मध्य स्तर से नीचे बनी हुई है।
सोने के बाजार में सीमित कारोबार और केंद्रीय बैंकों के फैसले का इंतजार
विदेशी मुद्रा बाजारों में मचे इस उतार-चढ़ाव के बीच सोने की कीमतों में मिलाजुला रुख देखा गया। यूरोपीय कारोबारी सत्र के पहले हिस्से में सोने ने मामूली इंट्राडे बढ़त बनाए रखी, लेकिन इसमें लगातार खरीदारी का अभाव रहा और भाव 4,350 डॉलर प्रति औंस से नीचे ही बने रहे। दो सप्ताह के उच्च स्तर से अमेरिकी डॉलर में आई हल्की मुनाफावसूली ने सोने को थोड़ा सहारा जरूर दिया, लेकिन प्रमुख केंद्रीय बैंकों के बड़े नीतिगत आयोजनों से पहले ट्रेडर किसी भी दिशा में बड़े सौदे करने से हिचक रहे हैं और फिलहाल किनारे बैठकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं।
बाजार की इस पूरी दिशा को तय करने में सबसे महत्वपूर्ण कारक फेडरल रिजर्व का आगामी फैसला माना जा रहा है। इस महत्वपूर्ण बैठक से ठीक पहले आए अमेरिका के अगस्त माह के मजबूत रोजगार आंकड़ों ने दर बाजारों में फेडरल रिजर्व की दरों में आक्रामक बढ़ोतरी की संभावनाओं को फिर से हवा दे दी थी। हालांकि विश्लेषकों के अनुसार अगस्त के हालिया अमेरिकी सीपीआई (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) मुद्रास्फीति के आंकड़ों को बाजार ने और भी अधिक गंभीरता से लिया है, जिसने दर वृद्धि की चिंताओं को और गहरा कर दिया है।
बैंक ऑफ जापान की नीति और ऐतिहासिक फंडिंग मॉडल में बदलाव
वैश्विक वित्तीय तंत्र में लंबे समय से एक अहम भूमिका निभाने वाली जापानी मौद्रिक नीति भी अब एक ऐतिहासिक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। जापान की अति-कम ब्याज दरों ने एक दशक से भी अधिक समय तक दुनिया भर में खरबों डॉलर के वैश्विक निवेशों को वित्तीय पोषण देने में मदद की थी। इस व्यवस्था ने जापानी येन को दुनिया के सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में से एक बना दिया था। जहां अधिकांश बड़ी अर्थव्यवस्थाओं ने मुद्रास्फीति से निपटने के लिए अपनी ब्याज दरें तेजी से बढ़ाईं, वहीं जापान दुनिया भर में एक अपवाद बना रहा और उसने अपनी अत्यंत उदार मौद्रिक नीति को बरकरार रखा।
अब जबकि बैंक ऑफ जापान द्वारा इस सप्ताह अपनी नीति को फिर से कड़ा करने की उम्मीद जताई जा रही है, यह पुराना सस्ता फंडिंग लाभ एक नए चरण में प्रवेश कर सकता है। यदि जापानी केंद्रीय बैंक दरों में वृद्धि की दिशा में आगे बढ़ता है, तो इससे वैश्विक स्तर पर कैरी ट्रेड और पूंजी प्रवाह पर दूरगामी प्रभाव पड़ने की संभावना है। कुल मिलाकर, फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान के नीतिगत कदमों का यह संगम विदेशी मुद्रा, बॉन्ड और जिंस बाजारों में एक नए दौर की शुरुआत का संकेत दे रहा है।



















