अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व 16 सितंबर को देर रात अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा के फैसलों की घोषणा करने जा रहा है। वित्तीय बाजारों में इस बात की प्रबल संभावना जताई जा रही है कि फेड प्रमुख केविन वॉर्श और उनकी मौद्रिक नीति समिति ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का ऐलान कर सकती है। यदि यह कदम उठाया जाता है, तो साल 2023 के बाद पहली बार अमेरिकी नीतिगत दरों में बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। फिलहाल अमेरिकी फेड फंड दरें 3.25% से 3.75% के दायरे में स्थिर हैं। जैक्सन होल में दिए गए अपने हालिया संबोधन के बाद से ही केविन वॉर्श ने वित्तीय अर्थव्यवस्था का एक बेहद पेचीदा और धुंधला खाका प्रस्तुत किया था, जिससे बाजार विश्लेषकों को यह स्पष्ट संकेत मिला कि केंद्रीय बैंक दरों में इजाफे का नया चक्र शुरू करने का मानस बना चुका है।
दीर्घकालिक बॉन्ड यील्ड और महंगाई का दबाव
मौद्रिक नीति समिति के समक्ष इस समय सबसे बड़ी चिंता दीर्घकालिक ट्रेजरी यील्ड में लगातार हो रही बढ़त है। दस वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 5% के स्तर को छूने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसका मुख्य कारण वास्तविक यील्ड का ऊंचा बना रहना है, जो उत्पादकता वृद्धि की उम्मीदों, बड़े पैमाने पर नए बॉन्ड जारी होने के दबाव और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते कच्चे तेल के दामों में आए उछाल को दर्शा रहा है। जब तक वित्तीय बाजार में लंबी अवधि की उधारी लागत लगातार बढ़ती रहेगी, तब तक फेडरल ओपन मार्केट कमेटी के अधिकारी सतर्क मुद्रा में रहने के लिए बाध्य हैं।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति पिछले साढ़े पांच वर्षों से फेड के तय लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। अगस्त के आंकड़ों के अनुसार देश में हेडलाइन महंगाई दर सालाना आधार पर 3.4% पर स्थिर रही, जबकि कोर सीपीआई में मासिक आधार पर 0.29% की वृद्धि देखी गई और सालाना कोर मुद्रास्फीति 2.4% दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और युद्ध के प्रभाव के कारण डीजल की कीमतें 6 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच चुकी हैं। तेल की कीमतें भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल चुकी हैं, जिससे परिवहन और उत्पादन लागत लगातार महंगी हो रही है।
केविन वॉर्श के रुख में बदलाव और नीतिगत प्राथमिकताएं
केविन वॉर्श के नेतृत्व पर वित्तीय हलकों में बारीकी से नजर रखी जा रही है। जून में कड़ा रुख दिखाने के बाद जुलाई की प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके स्वर कुछ नरम पड़े थे, लेकिन जैक्सन होल संगोष्ठी में उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर केंद्रीय बैंक को यह भरोसा नहीं होता कि अंतर्निहित महंगाई दर नीचे आ रही है, तो उसके पास काम करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। वॉर्श ने अलग-अलग आंकड़ों पर निर्भर रहने के बजाय दीर्घकालिक आर्थिक रुझानों पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही है। पूर्ण रोजगार के माहौल में वित्तीय स्थितियां बहुत सख्त नहीं मानी जा रही हैं, जिसने नीति निर्माताओं को दरों में बढ़ोतरी के पक्ष में सोचने के लिए प्रेरित किया है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस नीतिगत बदलाव ने पूरी सोच को पलट कर रख दिया है। पहले अवधारणा यह थी कि जब तक आंकड़े सख्त बढ़ोतरी की मांग नहीं करेंगे, तब तक फेड दरों को स्थिर रखेगा। अब यह धारणा बन चुकी है कि फेड दरों में तभी रोक लगाएगा जब कोई स्पष्ट आंकड़ा ठहराव की मांग करे। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी का कोई भी सदस्य इस संभावित बढ़ोतरी का खुलकर विरोध नहीं कर रहा है। इसके साथ ही ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट भी बढ़ती हुई ट्रेजरी यील्ड को देखते हुए दरों में इस वृद्धि के पक्ष में नजर आ रहे हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में बयान दिया कि वॉर्श वही करेंगे जो उन्हें करना चाहिए। यह रुख पूर्व फेड प्रमुख जेरोम पॉवेल के प्रति ट्रंप के खुले असंतोष की तुलना में काफी अलग माना जा रहा है।
आर्थिक परिदृश्य और जानकारों का विश्लेषण
हालिया तिमाहियों के आर्थिक आंकड़ों में मिले-जुले संकेत देखने को मिले हैं। दूसरी तिमाही की जीडीपी रिपोर्ट उम्मीद से कमजोर रही थी और रोजगार सृजन की गति में भी नरमी के संकेत मिले थे, हालांकि अगस्त महीने में नौकरियों की रिपोर्ट अप्रत्याशित रूप से मजबूत आई थी। कुछ विशेषज्ञों का तर्क है कि कमजोर वेतन वृद्धि, टैरिफ रिफंड और स्थिर पड़ा रियल एस्टेट बाजार आगामी वर्ष में महंगाई को 2% के लक्ष्य तक लाने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं। इस दृष्टिकोण के अनुसार, दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी इस दिशा में सहायक हो सकती है।
वहीं दूसरी ओर यह भी तर्क दिया जा रहा है कि फेड के पास प्रतीक्षा करने का विकल्प भी मौजूद है। साल 2025 के उत्तरार्ध से अमेरिकी टैरिफ का असर और इस वसंत से ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने लागत बढ़ाई है। हालांकि, तुलना के लिए उच्च आधार मिलने पर एक वर्ष बाद इन अस्थायी प्रभावों के कम होने की संभावना जताई जाती है। इसके बावजूद बाजार इस बात पर संशय में है कि क्या यह नरमी महंगाई को फेड के 2% के लक्ष्य तक वापस लाने के लिए पर्याप्त होगी। वित्तीय बाजार में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की संभावना 60% से अधिक आंकी जा रही है, जिससे इंतजार करने के रुख का औचित्य साबित करना कठिन हो रहा है।
डॉट प्लॉट और आगामी आर्थिक अनुमान
इस बैठक में नीतिगत ब्याज दर की घोषणा के साथ ही अमेरिकी नीति निर्माता अपने अद्यतन आर्थिक अनुमान भी सार्वजनिक करेंगे। जून के नीतिगत दस्तावेज में शामिल डॉट प्लॉट चार्ट में दिखाया गया था कि नौ अधिकारियों ने इस वर्ष कम से कम एक ब्याज दर वृद्धि की उम्मीद जताई थी, जबकि छह सदस्यों ने कम से कम दो बार दरें बढ़ाने का अनुमान लगाया था। उस समय केविन वॉर्श ने अपना व्यक्तिगत अनुमान प्रस्तुत नहीं किया था।
दुनिया भर के वित्तीय बाजारों के लिए यह निर्णय काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फेडरल रिजर्व अपने नीतिगत फैसलों का आधिकारिक ऐलान 16 सितंबर को 18:00 जीएमटी यानी भारतीय समयानुसार रात 11:30 बजे करेगा। इस घोषणा के बाद वैश्विक पूंजी प्रवाह, मुद्राओं के उतार-चढ़ाव और शेयर बाजारों की चाल पर व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।



















