अमेरिकी डॉलर मुद्रा बाजारों में मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है और नीतिगत फैसलों से पहले निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है। पिछले पांच कारोबारी दिनों के दौरान जी10 मुद्राओं के समूह में डॉलर ने सबसे बेहतर प्रदर्शन दर्ज किया है। बाजार प्रतिभागियों का मानना है कि केंद्रीय बैंक अपनी ताजा बैठक में ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की घोषणा कर सकता है। अगर पूरे 12 महीनों के परिदृश्य पर नजर डालें, तो बाजार पहले से ही लगभग 100 बेसिस प्वाइंट तक की ब्याज दर वृद्धि का अनुमान लगाकर चल रहा है। वित्तीय विश्लेषकों का आकलन है कि यदि केंद्रीय बैंक इन सख्त अपेक्षाओं के अनुरूप फैसले नहीं लेता है, तो आने वाले सत्रों में अमेरिकी मुद्रा में कुछ गिरावट भी देखने को मिल सकती है।
नीतिगत फैसले और ब्याज दरों के अनुमान
रबोबैंक के रणनीतिकारों का मानना है कि बाजार ने आगामी वर्ष के लिए फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की मौद्रिक सख्ती को जरूरत से ज्यादा आंका है। यदि नीति निर्माता भविष्य में दरों में इजाफे को लेकर आक्रामक संकेत नहीं देते हैं, तो निवेशकों का भरोसा डगमगा सकता है। इसके बावजूद, आने वाले सत्रों में डॉलर को लेकर भारी बिकवाली का खतरा बेहद सीमित दिखाई दे रहा है। यूरो और डॉलर के विनिमय दर को लेकर अनुमान है कि अगले एक से तीन महीनों के दौरान यह जोड़ी 1.16 के स्तर के आसपास ही सीमित दायरे में कारोबार करती रहेगी।
सुरक्षित निवेश और ऊर्जा निर्यातक होने का लाभ
अगर आने वाले समय में फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें कम भी होती हैं, तब भी अमेरिकी डॉलर को मजबूत सहारा मिलता रहेगा। संयुक्त राज्य अमेरिका एक शुद्ध ऊर्जा निर्यातक देश बन चुका है, जिसका सीधा फायदा उसकी मुद्रा को मिलता है। इसके साथ ही वैश्विक अस्थिरता के दौर में डॉलर की सुरक्षित निवेश वाली पहचान कायम है। हालांकि भारी भरकम बजट घाटे को लेकर कुछ चिंताएं जरूर उठी हैं, जिससे इस साख को हल्का झटका लगा था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में ठोस वैकल्पिक सुरक्षित मुद्राओं की कमी के कारण वैश्विक पूंजी का प्रवाह लगातार डॉलर की ओर खिंचा चला आ रहा है।
एशियाई कारोबार में प्रमुख मुद्राओं की चाल
बुधवार के कारोबारी सत्र में एशियाई बाजारों के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में लगातार तीसरे दिन कमजोरी दर्ज की गई। ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा ने 0.7100 के अहम स्तर का बचाव करते हुए अपने मासिक निचले स्तर के करीब कारोबार किया। अमेरिकी डॉलर दो सप्ताह के उच्च स्तर के पास डटा हुआ है, जिसे बढ़ती बॉन्ड यील्ड का समर्थन मिल रहा है। तेल की कीमतों के चलते महंगाई भड़कने की आशंकाओं और ब्याज दर वृद्धि के अनुमान ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में गहराते तनाव ने भी सुरक्षित निवेश वाली अमेरिकी मुद्रा को मजबूती दी है, जबकि जोखिम से जुड़ी ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा दबाव में आ गई है।
उधर जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर ने नए एक सप्ताह के उच्चतम स्तर को छुआ और 155.00 के पार निकल गया। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने डॉलर की वैश्विक रिजर्व मुद्रा वाली हैसियत को और पुख्ता कर दिया है। हालांकि बुधवार को फेडरल रिजर्व के फैसले और गुरुवार से शुरू होने वाली बैंक ऑफ जापान की बैठक से पहले ट्रेडर्स सतर्क दिखे, जिससे डॉलर-येन जोड़ी 155.00 के मध्य स्तर से नीचे ही बनी रही।
सोने की वापसी और जापान की मौद्रिक नीति में मोड़
लगातार दो दिनों की गिरावट के सिलसिले को थामते हुए सोने की कीमतों में बुधवार को स्थिरता लौटती दिखी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पीली धातु सुधरकर 4,350 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के दायरे में पहुंच गई। अमेरिकी डॉलर में मजबूती के बावजूद सोने में यह सुधार तब देखने को मिला जब ब्याज दरों के फैसले से ठीक पहले ट्रेजरी यील्ड में नरमी आई थी।
दूसरी ओर, दशकों तक दुनिया भर के बाजारों में बेहद सस्ती फंडिंग का जरिया रहा जापानी येन अब नीतिगत बदलाव के मोड़ पर खड़ा है। बैंक ऑफ जापान द्वारा एक दशक से भी ज्यादा समय से जारी रखी गई अत्यंत कम ब्याज दरों ने खरबों डॉलर के वैश्विक निवेश को पोषित किया था। जब बाकी प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं महंगाई रोकने के लिए ब्याज दरें तेजी से बढ़ा रही थीं, तब जापान पूरी दुनिया में अकेला अलग रास्ता चुन रहा था। अब बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी मौद्रिक नीति को और कड़ा करने की उम्मीदों के साथ, यह लंबे समय से चला आ रहा सस्ता फंडिंग मॉडल एक नए दौर में प्रवेश करता दिख रहा है।



















