अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) ने अपनी दो दिवसीय समीक्षा बैठक के समापन पर नीतिगत ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट्स (bps) की वृद्धि का ऐलान किया है। इस ताजा बढ़ोतरी के साथ ही फेडरल फंड्स टारगेट रेंज बढ़कर 3.75% से 4.00% के दायरे में पहुंच गई है। ब्याज दरों में हुई इस वृद्धि ने अमेरिकी डॉलर को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अन्य प्रमुख प्रतिद्वंद्वी मुद्राओं के मुकाबले खासी मजबूती दी है, जबकि वित्तीय बाजारों में नीति निर्माताओं के कड़े रुख का असर साफ दिखाई देने लगा है।
नीतिगत फैसले के साथ जारी आधिकारिक बयान में यह स्पष्ट किया गया है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था ठोस रफ्तार से विस्तार कर रही है, लेकिन इसके बावजूद मुद्रास्फीति अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय बैंक ने मौद्रिक सख्ती का सिलसिला बरकरार रखा है। केंद्रीय बैंक द्वारा जारी समरी ऑफ इकोनॉमिक प्रोजेक्शंस (SEP) से भविष्य की नीतियों के स्पष्ट संकेत मिले हैं। इस प्रोजेक्शन के मुताबिक, 18 में से 12 नीति निर्माता चालू वर्ष के दौरान ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट्स की एक और वृद्धि के पक्ष में हैं। वहीं, 4 अधिकारियों का मानना है कि इस साल अभी दो और बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है, जबकि केवल 2 अधिकारी ऐसे हैं जो आगे किसी भी नई बढ़ोतरी के पक्ष में नहीं हैं।
सोने की कीमतों पर दबाव और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
फेडरल रिजर्व के इस फैसले के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय सराफा बाजार में सोने के भाव अपने दिन के उच्चतम स्तर से फिसल गए। यद्यपि सोने ने दिन के कुछ लाभ को अब भी बचाकर रखा है, लेकिन ब्याज दर में 25 बेसिस प्वाइंट्स की वृद्धि की पुष्टि होने के बाद कीमतों में नरमी का रुख गहरा गया है। कारोबार के दौरान XAU/USD ने कुछ समय के लिए $4,360 का स्तर पार कर लिया था, लेकिन ताजा दबाव के चलते यह फिसलकर $4,300 के आंकड़े के करीब पहुंच गया है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर टिके रहने और डॉलर में आई मजबूती ने गैर-यील्ड वाली संपत्तियों जैसे सोने पर सीधा दबाव बनाया है।
मुद्रा बाजार के अन्य मोर्चों पर भी इस सख्ती का व्यापक प्रभाव देखा जा रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र में डॉलर के मजबूत रहने के कारण AUD/USD लगातार तीसरे दिन दबाव में रहा। यह मुद्रा जोड़ी 0.7100 के स्तर का बचाव करते हुए अपने मासिक निचले स्तर के करीब कारोबार कर रही थी। कच्चे तेल की वजह से बढ़ती महंगाई की चिंताओं और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी ने डॉलर को व्यापक समर्थन दिया है। इसके अतिरिक्त, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने सुरक्षित पनाहगाह के तौर पर अमेरिकी डॉलर की मांग को और बढ़ाया है, जिसका सीधा नुकसान जोखिम वाली मुद्राओं जैसे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को उठाना पड़ा है।
जापानी येन और बैंक ऑफ जापान की आगामी बैठक
दूसरी ओर, एशियाई सत्र के दौरान USD/JPY चढ़कर 155.00 के पार एक हफ्ते के नए उच्च स्तर पर पहुंच गया। कच्चे तेल से जुड़ी मुद्रास्फीति की आशंकाओं और अमेरिका-ईरान तनाव ने अमेरिकी डॉलर को एक मजबूत वैश्विक रिजर्व करेंसी के रूप में सहारा दिया है। हालांकि, फेडरल रिजर्व के फैसले और बैंक ऑफ जापान (BoJ) की बैठक से पहले यह जोड़ी 155.00 के मध्य स्तर से नीचे बनी रही, क्योंकि निवेशक दोनों केंद्रीय बैंकों की दिशा को लेकर सतर्क दिखे।
जापान की अत्यधिक ढीली मौद्रिक नीति और बेहद कम ब्याज दरों ने एक दशक से भी अधिक समय तक दुनिया भर में खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित करने में मदद की है। इस व्यवस्था ने जापानी येन को वैश्विक स्तर पर फंड जुटाने का सबसे सस्ता स्रोत बना दिया था। जहां विश्व की अधिकांश प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं महंगाई से निपटने के लिए ब्याज दरें लगातार बढ़ा रही थीं, वहीं जापान इस दौड़ से बिल्कुल अलग खड़ा रहा था। हालांकि, बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी नीति सख्त किए जाने की उम्मीदों के बीच अब यह ऐतिहासिक लाभ एक नए दौर में प्रवेश करता दिख रहा है। वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में इस बदलाव से अंतरराष्ट्रीय पूंजी प्रवाह और करेंसी बाजार के समीकरण पूरी तरह बदलने लगे हैं।



















