अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दर को 3.75 प्रतिशत से 4.00 प्रतिशत के दायरे में अपरिवर्तित रखने का फैसला किया है। हालांकि, यह फैसला सर्वसम्मति से नहीं लिया गया। नीति-निर्धारकों के बीच नीतिगत रुख को लेकर मतभेद खुलकर सामने आए हैं। फेडरल रिजर्व की बैठक में दो अधिकारियों, लीसा कुक और बेथ हैमैक, ने ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी करने के पक्ष में मतदान किया। दूसरी ओर, फेड के चेयरमैन केविन वार्श ने जोर देकर कहा कि आने वाले महीनों में मिलने वाले आर्थिक आंकड़ों और सूचनाओं के प्रवाह का बारीक अध्ययन करने के बाद ही यह तय किया जाएगा कि आगे किसी अतिरिक्त नीतिगत कार्रवाई की आवश्यकता है या नहीं।
मजबूत आर्थिक आधार और घरेलू मांग का सहारा
फेडरल रिजर्व के आधिकारिक बयान में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूत और लचीली स्थिति का रेखांकित विवरण पेश किया गया है। वर्तमान समय में समग्र आर्थिक गतिविधियां तेज गति से विस्तार कर रही हैं। घरेलू स्तर पर उपभोक्ता और संस्थागत खर्च में निरंतर मजबूती बनी हुई है, जिससे बाजार की मांग को लगातार सहारा मिल रहा है। इसके साथ ही रोजगार के नए अवसर बनने की गति कार्यबल के विस्तार की रफ्तार के साथ पूरी तरह तालमेल बनाए हुए है, जिसके परिणामस्वरूप बेरोजगारी दर में बहुत कम बदलाव दर्ज किया गया है। उत्पादकता की वृद्धि दर और पूंजीगत निवेश दोनों के आंकड़े मजबूत बने हुए हैं। अर्थव्यवस्था की इसी दृढ़ता के कारण नीति निर्माताओं को यह सुविधा मिली है कि वे अपना पूरा ध्यान कीमतों में स्थिरता लाने यानी महंगाई पर नियंत्रण पाने पर केंद्रित रख सकें।
मुद्रास्फीति अब भी चिंता का मुख्य विषय
अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़ों के बावजूद नीति निर्माताओं के लिए मुद्रास्फीति का ऊंचा स्तर अभी भी सबसे गंभीर चुनौती बना हुआ है। केविन वार्श ने स्पष्ट किया कि हालिया आर्थिक आंकड़ों से मुद्रास्फीति की अंतर्निहित तस्वीर में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि विभिन्न क्षेत्रों में कीमतों में हो रही सापेक्ष वृद्धि किसी व्यापक और अनियंत्रित मुद्रास्फीति की समस्या में नहीं बदलनी चाहिए। फेडरल रिजर्व अपने 2 प्रतिशत के पीसीई यानी व्यक्तिगत उपभोग व्यय मुद्रास्फीति लक्ष्य को लेकर पूरी तरह अडिग है और इस लक्ष्य में किसी भी तरह की ढील या लचीला विकल्प स्वीकार नहीं किया जाएगा। हालांकि, राहत की एक बात यह है कि लंबी अवधि के मुद्रास्फीति अनुमान दर्शाते हैं कि आम परिवारों और कारोबारी संस्थानों का केंद्रीय बैंक की नीतिगत प्रतिबद्धता पर भरोसा अब भी कायम है।
नीतिगत ठहराव के पीछे सख्त रुख के संकेत
समग्र विश्लेषण के अनुसार, फेडरल रिजर्व का यह कदम सतर्कता से भरा ठहराव है, जिसके भीतर भविष्य में सख्ती बरतने के स्पष्ट संकेत छिपे हैं। केंद्रीय बैंक का मानना है कि सितंबर के महीने में की गई ब्याज दर वृद्धि ने बाजार पर अपना अनुकूल असर दिखाना शुरू कर दिया है। इसके बावजूद, यदि आने वाले समय में महंगाई के आंकड़े नीचे आने में विफल रहते हैं, तो फेडरल रिजर्व ने भविष्य में और सख्त कदम उठाने तथा ब्याज दरें बढ़ाने का विकल्प पूरी तरह खुला रखा है। चेयरमैन केविन वार्श ने अपनी बातचीत में आगामी बैठकों के नतीजों पर पहले से कोई राय बनाने या पूर्वानुमान लगाने से बार-बार परहेज किया। उनका स्पष्ट तर्क था कि भविष्य की मौद्रिक नीति किस दिशा में जाएगी, यह तय करने से पहले अगले कुछ महीने केंद्रीय बैंक को अत्यंत मूल्यवान और ठोस आर्थिक जानकारी प्रदान करेंगे।
फेडरल रिजर्व की मौद्रिक प्रणाली और कार्यप्रणाली
संयुक्त राज्य अमेरिका में पूरी मौद्रिक नीति का संचालन और निर्धारण फेडरल रिजर्व के हाथों में होता है। अमेरिकी संसद द्वारा केंद्रीय बैंक को दो प्रमुख जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जिन्हें दोहरा जनादेश कहा जाता है। इनमें से पहला लक्ष्य कीमतों में स्थिरता हासिल करना है और दूसरा लक्ष्य अधिकतम स्थायी रोजगार को बढ़ावा देना है। इन दोनों महत्वपूर्ण लक्ष्यों को साधने के लिए फेडरल रिजर्व मुख्य रूप से ब्याज दरों को घटाने या बढ़ाने के औजार का इस्तेमाल करता है।
जब अर्थव्यवस्था में कीमतें बहुत तेज गति से बढ़ने लगती हैं और वार्षिक मुद्रास्फीति फेड के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर देता है। ब्याज दरों के बढ़ने से समूची अर्थव्यवस्था में कर्ज लेना महंगा हो जाता है, जिससे खर्च और निवेश की गति धीमी पड़ती है। इसके परिणामस्वरूप अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, क्योंकि ऊंची ब्याज दरें अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को अपना धन अमेरिका में सुरक्षित रखने और निवेश करने के लिए अधिक आकर्षक बनाती हैं। इसके विपरीत, जब मुद्रास्फीति 2 प्रतिशत से नीचे गिर जाती है या बेरोजगारी की दर बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, तो फेडरल रिजर्व कर्ज लेने को प्रोत्साहित करने और आर्थिक गतिविधियों में तेजी लाने के लिए ब्याज दरों में कटौती करता है, जिससे अमेरिकी डॉलर के मूल्य पर दबाव पड़ता है और वह कमजोर होता है।
नीतिगत बैठकें और एफओएमसी का ढांचा
फेडरल रिजर्व अपनी आधिकारिक मौद्रिक नीतियों की समीक्षा और निर्णय के लिए एक कैलेंडर वर्ष में कुल आठ बैठकें आयोजित करता है। इन नियमित बैठकों में फेडरल ओपन मार्केट कमेटी यानी एफओएमसी देश की मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों का गहन आकलन करती है और ब्याज दरों से जुड़े औपचारिक निर्णय लेती है। एफओएमसी की इस नीतिगत बैठक में कुल बारह फेड अधिकारी मतदान में हिस्सा लेते हैं। इनमें फेडरल रिजर्व बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सात स्थायी सदस्य, फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क के अध्यक्ष, तथा बाकी बचे ग्यारह क्षेत्रीय रिजर्व बैंकों के अध्यक्षों में से चार अध्यक्ष शामिल होते हैं, जो एक-एक वर्ष के चक्रीय कार्यकाल के आधार पर समिति में अपनी सेवाएं देते हैं।
क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग के विशेष उपाय
अत्यधिक गंभीर या असाधारण आर्थिक संकटों के समय फेडरल रिजर्व लीक से हटकर अपरंपरागत मौद्रिक नीतियां भी अपना सकता है, जिसे क्वांटिटेटिव ईजिंग या क्यूई कहा जाता है। क्यूई एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत केंद्रीय बैंक किसी ठप या गंभीर दबाव में फंसे वित्तीय तंत्र में नकदी और कर्ज के प्रवाह को बड़े पैमाने पर बढ़ाता है। यह एक गैर-मानक नीतिगत उपाय है, जिसका प्रयोग गहरे वित्तीय संकटों या अत्यंत निम्न मुद्रास्फीति के दौर में ही किया जाता है। वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान फेडरल रिजर्व ने इस उपाय का सबसे बड़ा उपयोग किया था। इस प्रक्रिया में फेडरल रिजर्व अतिरिक्त डॉलर की नई मुद्रा तैयार करता है और उस पूंजी से प्रमुख वित्तीय संस्थानों से उच्च गुणवत्ता वाले सुरक्षित बॉन्ड खरीदता है। व्यापक रूप से बॉन्ड खरीद की यह प्रक्रिया आमतौर पर अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर को कमजोर करती है।
दूसरी ओर, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग यानी क्यूटी पूरी तरह से क्यूई की उल्टी प्रक्रिया है। क्यूटी के दौरान फेडरल रिजर्व वित्तीय संस्थानों से बॉन्ड खरीदना पूरी तरह बंद कर देता है। इसके साथ ही, उसके पास पहले से मौजूद जिन बॉन्डों की परिपक्वता अवधि पूरी हो जाती है, उनसे प्राप्त होने वाली मूलधन की राशि को वह नए बॉन्ड खरीदने में दोबारा निवेश नहीं करता। वित्तीय तंत्र से नकदी की इस निकासी का परिणाम यह होता है कि यह कदम आमतौर पर अमेरिकी डॉलर के मूल्य को मजबूती और सहारा प्रदान करता है।
वैश्विक मुद्रा बाजारों पर बैठक का तात्कालिक प्रभाव
फेडरल रिजर्व की नीतिगत घोषणाओं के साथ ही अंतरराष्ट्रीय वित्तीय और कमोडिटी बाजारों में हलचल देखने को मिली। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान बुधवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर जोड़ी में लगातार दूसरे दिन तेजी देखी गई और यह 23 सितंबर के बाद के अपने नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। ऑस्ट्रेलिया के मजबूत उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आंकड़ों ने रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा नवंबर में संभावित ब्याज दर वृद्धि के अनुमानों को हवा दी, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को बड़ा सहारा मिला। इसी बीच, एफओएमसी के बहुप्रतीक्षित दर निर्णय से पहले तीन दिनों की तेजी के बाद अमेरिकी डॉलर की बढ़त कुछ देर के लिए थमी, जिसने इस मुद्रा जोड़ी की तेजी को और मजबूती दी।
उधर अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन जोड़ी में भी बुधवार को लगातार तीसरे दिन खरीदारी देखने को मिली और यह एक महीने के निचले स्तर से उबरकर करीब दो सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गई। बाजार में यह उम्मीद बनी हुई थी कि बैंक ऑफ जापान शुक्रवार को अपनी नीतिगत घोषणा में आक्रामक रूप से ब्याज दरें बढ़ाने से पीछे हट सकता है, जिससे जापानी येन पर दबाव बना रहा। कमोडिटी बाजार में, एफओएमसी द्वारा फेड फंड्स दर को 4 प्रतिशत की सीमा पर स्थिर रखने के फैसले के बाद सोने की कीमतों में भी बढ़त दर्ज की गई। गोल्ड बनाम अमेरिकी डॉलर जोड़ी में तेजी आई, क्योंकि चेयरमैन केविन वार्श ने यह तर्क दिया कि पिछली दर वृद्धियां प्रभावी साबित हो रही हैं, जिससे दिसंबर महीने में 50 आधार अंकों की आक्रामक दर वृद्धि की बाजार की अटकलें काफी हद तक ठंडी पड़ गईं।



















