अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में मंगलवार के शुरुआती एशियाई सत्र के दौरान मजबूती देखने को मिली, जहां भाव 1.75 प्रतिशत की बढ़त के साथ लगभग 3,950 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गए। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों को लेकर बाजार में व्याप्त अनिश्चितता और मुद्रास्फीति तथा बजटीय घाटे से जुड़ी चिंताओं ने निवेशकों को पीली धातु जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर आकर्षित किया है। इसके साथ ही पश्चिम एशिया में तनाव कम करने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ताओं में किसी निर्णायक समझौते पर न पहुंच पाने की खबरों ने भी बाजार में सुरक्षात्मक रुख को बनाए रखा है। अमेरिकी कारोबारी घंटों के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने भी कीमती धातु की रिकवरी को सहारा दिया, जिससे शुक्रवार को 3,870 डॉलर के नए वार्षिक निचले स्तर को छूने और अक्टूबर माह में 6.87 प्रतिशत की मासिक गिरावट झेलने के बाद सोने को कुछ सहारा मिला है।
भू-राजनीतिक घटनाक्रम और वाशिंगटन-तेहरान वार्ता की स्थिति
पश्चिम एशिया के आठ महीने लंबे संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से अमेरिका और ईरान के बीच राजनयिक बातचीत का सिलसिला अभी जारी है। तेहरान की ओर से सोमवार को स्पष्ट किया गया कि दोनों पक्षों के बीच गतिरोध दूर करने के प्रयास चल रहे हैं। कतर के मध्यस्थों और ईरानी अधिकारियों के बीच कई दिनों तक चली गहन बैठकों में संशोधित प्रस्तावों पर चर्चा जरूर हुई, लेकिन कोई बड़ी निर्णायक सफलता हाथ नहीं लग सकी है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बातचीत की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए जानकारी दी कि सितंबर माह में ईरान द्वारा संघर्ष विराम के लिए सौंपा गया खाका ही वार्ता का मुख्य आधार बना हुआ है। इसके साथ ही बघाई ने शनिवार को विदेश मंत्री अब्बास अराघची के उस बयान की भी पुष्टि की, जिसमें उन्होंने संकेत दिया था कि प्रस्तावित समझौते के प्रारूप को संक्षिप्त और व्यावहारिक बनाया जा सकता है। क्षेत्रीय तनाव का लंबा खिंचना और नष्ट हुए बुनियादी ढांचे के कारण सामान्य स्थिति बहाल होने में हो रही देरी वैश्विक बाजारों के लिए जोखिम पैदा कर रही है, जिसका सीधा असर सुरक्षित संपत्तियों के आकर्षण पर देखा जा रहा है।
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव और ब्याज दरों पर फेडरल रिजर्व का रुख
अमेरिका में मंगलवार को हो रहे मध्यावधि चुनावों ने वैश्विक वित्तीय बाजारों की निगाहें वाशिंगटन की राजनीतिक दिशा पर टिका दी हैं। चुनावों के संभावित नतीजों को देखते हुए बाजार में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि आने वाले समय में सरकारी खर्च, बजटीय घाटे और महंगाई की चुनौतियां फिर से सिर उठा सकती हैं। चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों के अनुसार, प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स की जीत की संभावना मजबूत मानी जा रही है, जबकि सीनेट में बहुमत को लेकर स्थिति पूरी तरह अनिश्चित और पेचीदा बनी हुई है।
राजनीतिक अनिश्चितता के इस माहौल में अमेरिकी मौद्रिक नीति से जुड़े अनुमानों में भी बदलाव आया है। शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज के फेडवॉच टूल के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर में अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना अब घटकर लगभग 73 प्रतिशत रह गई है, जो कि एक सप्ताह पहले 80 प्रतिशत के स्तर पर आंकी जा रही थी। नीतिगत दरों में आक्रामकता की उम्मीदें घटने से गैर-उपज वाली संपत्तियों के प्रति बाजार का रुख अपेक्षाकृत सकारात्मक हुआ है।
तकनीकी संकेतक और चार्ट का विश्लेषण
दैनिक तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो XAU/USD पर मंदी का दबाव अभी भी बना हुआ है। कीमती धातु की कीमतें 20-पीरियड बोलिंजर बैंड सिंपल मूविंग एवरेज और 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज के नीचे कारोबार कर रही हैं, जिससे हाल के निचले स्तरों के करीब कीमतों का दायरा सीमित दिखाई दे रहा है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 36.88 के स्तर पर बना हुआ है, जो दर्शाता है कि बाजार ओवरसोल्ड क्षेत्र से मामूली ऊपर है और गिरावट की गति पूरी तरह थमी नहीं है।
वर्तमान में लाइव मार्केट के आंकड़ों के अनुसार, गोल्ड फ्यूचर्स 3,956 डॉलर के स्तर पर देखा जा रहा है, जो पिछले 3,899 डॉलर के बंद स्तर के मुकाबले 1.45 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। इसका 52-सप्ताह का दायरा 3,879 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच रहा है, जबकि ट्रेडिंग वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत का 0.01 गुना दर्ज किया गया है। लाइव डेटा में 14-दिवसीय आरएसआई 35 पर है और एमएसीडी -78.95 पर सिग्नल लाइन -67.72 के नीचे मंदी का संकेत दे रहा है। 50-दिवसीय ईएमए 4,201 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 4,413 डॉलर के स्तर पर डेथ क्रॉस स्थिति प्रदर्शित कर रहे हैं, जबकि 50-दिवसीय एसएमए 4,280 डॉलर और 200-दिवसीय एसएमए 4,516 डॉलर पर है। 14-दिवसीय एडीएक्स 31 पर एक ट्रेंडिंग बाजार का संकेत देता है, जबकि 14-दिवसीय एटीआर 79.96 के स्तर पर दैनिक अस्थिरता को दर्शाता है।
चार्ट पर ऊपरी स्तरों की बात करें तो पहला प्रतिरोध बोलिंजर बैंड के मध्य में 4,090 डॉलर के आसपास स्थित है। इसके ऊपर 100-दिवसीय एसएमए 4,210 डॉलर पर और ऊपरी बोलिंजर बैंड 4,255 डॉलर पर आपूर्ति क्षेत्र का निर्माण करते हैं। लाइव पिवट स्तर 3,956 डॉलर पर है, जिसके ऊपर रेजिस्टेंस R1 3,960 डॉलर और R2 3,964 डॉलर पर मौजूद हैं। नीचे की तरफ बोलिंजर निचला बैंड 3,920 डॉलर पर नजदीकी समर्थन प्रस्तुत करता है, जबकि 20-दिवसीय सपोर्ट 3,879 डॉलर के पास है। लाइव सपोर्ट स्तरों में S1 3,952 डॉलर और S2 3,949 डॉलर शामिल हैं। यदि 3,920 डॉलर का स्तर टूटता है तो कीमतें नए निचले स्तरों की ओर खिसक सकती हैं।
उद्योग जगत का दृष्टिकोण और केंद्रीय बैंकों की भूमिका
धातु क्षेत्र के मूलभूत ढांचे पर वित्तीय संस्थान एचएसबीसी का मानना है कि यह क्षेत्र कई सकारात्मक रुझानों से लाभान्वित हो रहा है, जिससे मांग और कीमतों को समर्थन मिल रहा है। संस्थान ने रेखांकित किया है कि कई प्रमुख कंपनियां मजबूत नकदी प्रवाह और अपेक्षाकृत बेहतर लाभांश दर्ज कर रही हैं, जबकि मूल्यांकन अन्य क्षेत्रों की तुलना में काफी निचले पायदान पर है। हालांकि, संस्थान ने यह चेतावनी भी दी है कि क्षेत्रीय भू-राजनीतिक संघर्ष साल के अंत तक खिंच सकते हैं, जिससे बुनियादी ढांचे की बहाली धीमी होगी और भू-राजनीतिक जोखिम बाजार के बुनियादी रुझानों पर भारी पड़ेंगे।
मानव इतिहास में सोने ने मूल्य संचय और विनिमय के माध्यम के रूप में एक मजबूत भूमिका निभाई है। आधुनिक दौर में आभूषणों के अतिरिक्त यह संपत्ति अनिश्चित दौर में सुरक्षित निवेश और मुद्रास्फीति के खिलाफ बचाव का प्रभावी साधन मानी जाती है। इसमें किसी विशेष संप्रभु जारीकर्ता का जोखिम नहीं होता। केंद्रीय बैंक अपनी मुद्राओं को संकट के समय स्थिरता देने और अर्थव्यवस्था की साख बढ़ाने के लिए अपने विदेशी मुद्रा भंडार का विविधीकरण करते हुए लगातार सोना खरीद रहे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, केंद्रीय बैंकों ने वर्ष 2022 में 1,136 टन सोना अपने भंडार में जोड़ा, जिसका मूल्य लगभग 70 अरब डॉलर था और यह इतिहास में दर्ज की गई सबसे बड़ी वार्षिक खरीद रही। भारत, चीन और तुर्की जैसे उभरते देशों के केंद्रीय बैंक अपनी स्वर्ण होल्डिंग्स को तेजी से बढ़ा रहे हैं।
सोने का अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड के साथ विपरीत संबंध देखा जाता है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो गैर-अमेरिकी खरीदारों के लिए सोना सस्ता हो जाता है, जिससे इसकी मांग बढ़ती है। इसी प्रकार, शेयर बाजारों में तेज उछाल के दौरान सोने पर बिकवाली का दबाव आ सकता है, जबकि जोखिम भरे बाजारों में गिरावट आने पर सोने में खरीदारी बढ़ती है। ब्याज दरों में नरमी आने पर बिना ब्याज वाली संपत्ति होने के कारण सोना अधिक आकर्षक बन जाता है, जबकि धन की लागत बढ़ने पर इसमें सुस्ती देखी जाती है।
अन्य मुद्रा जोड़ों और वैश्विक कॉर्पोरेट बाजारों का परिदृश्य
मुद्रा बाजार के अन्य हलकों में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सप्ताह की शुरुआत में 0.7000 के आसपास दबाव में रहा। निवेशक अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के बाद रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के नीतिगत फैसले की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक द्वारा मंगलवार को आधिकारिक कैश रेट को 25 आधार अंक बढ़ाकर 4.6 प्रतिशत से 4.85 प्रतिशत किए जाने की व्यापक संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है, तो यह वर्ष 2026 में आरबीए की ओर से की जाने वाली पांचवीं दर वृद्धि होगी, जिससे ब्याज दरें 18 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच जाएंगी।
उधर यूएसडी/जेपीवाई में नई तेजी देखने को मिली है, जहां बैंक ऑफ जापान के फैसले के बाद शुक्रवार को 157.00 से नीचे गए स्तरों से उबरकर यह एशियाई सत्र में 158.00 के करीब पहुंच गया। जापान की वित्त मंत्री तात्सुकी कातायामा की ओर से बाजार में हस्तक्षेप की नई चेतावनियों के बावजूद यह जोड़ी मजबूत बनी रही। कॉरपोरेट मोर्चे पर, वॉल स्ट्रीट पर सोमवार को एप्पल के चौथी तिमाही के नतीजों ने विश्लेषकों के अनुमानों को पीछे छोड़ दिया। आईफोन की मजबूत बिक्री ने कंपनी को सहारा दिया, जहां चौथी तिमाही में आईफोन की बिक्री 57.58 अरब डॉलर रही, जो अनुमान से एक अरब डॉलर से अधिक रही। हालांकि, आय और मुनाफे दोनों में अनुमान से बेहतर प्रदर्शन के बावजूद कंपनी के शेयर में बाद के कारोबार में लगभग 4 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।
























