तुर्की की मुद्रा लीरा लगातार कमजोर होती जा रही है और आने वाले दिनों में इसके ऊपर दबाव और अधिक गहराने के आसार दिखाई दे रहे हैं। ताजा आर्थिक विश्लेषणों के अनुसार, तुर्की के सांख्यिकी कार्यालय तुर्कस्टैट द्वारा अक्टूबर महीने के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई और उत्पादक मूल्य सूचकांक यानी पीपीआई आंकड़े जारी किए जाने हैं। बाजार की सर्वसम्मत उम्मीद यह है कि हेडलाइन मुद्रास्फीति सालाना आधार पर 29.5 प्रतिशत और कोर मुद्रास्फीति 28.5 प्रतिशत के स्तर पर रहेगी। हालांकि, केवल वार्षिक आंकड़ों को देखने के बजाय मौसमी समायोजन के बाद का मासिक आंकड़ा स्थिति की अधिक गंभीर तस्वीर पेश करता है। अनुमानों के मुताबिक मौसमी तालमेल के बाद हेडलाइन सीपीआई करीब 2.1 प्रतिशत महीने दर महीने और कोर कीमतें 1.9 प्रतिशत महीने दर महीने बढ़ने की उम्मीद है।
ईंधन की कीमतें और टैक्स छूट खत्म होने से बढ़ी चुनौती
सितंबर के दौरान आयातित ऊर्जा कीमतों में आई अस्थायी गिरावट ने तुर्की की महंगाई को कुछ राहत पहुंचाई थी। लेकिन अब वह फायदा तेजी से उलट चुका है। कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आई तेज उछाल और ईंधन पर बची हुई टैक्स राहत को समाप्त किए जाने से ईंधन और परिवहन लागत में नया उछाल आया है। इसके कारण मासिक महंगाई दर के फिर से 2 प्रतिशत से ऊपर जाने की मजबूत जमीन तैयार हो चुकी है।
तुर्की के सबसे बड़े कारोबारी शहर इस्तांबुल के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के हालिया आंकड़े भी इसी दिशा की ओर स्पष्ट संकेत कर रहे हैं। हालांकि इस्तांबुल में सालाना आधार पर महंगाई दर अक्टूबर में घटकर 32.5 प्रतिशत पर आ गई, जो सितंबर में 33.6 प्रतिशत दर्ज की गई थी, लेकिन महीने दर महीने के आधार पर कीमतों में 2.47 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह लगातार तीसरा महीना है जब मासिक महंगाई की रफ्तार तेज हुई है, क्योंकि इससे पहले अगस्त में यह दर 1.66 प्रतिशत और सितंबर में 2.11 प्रतिशत रही थी। इसके अलावा, दो महीने तक अप्रत्याशित रूप से शांत रहने के बाद खाद्य कीमतों में भी महीने दर महीने 2.6 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी देखने को मिली है।
केंद्रीय बैंक का रुख और लीरा पर निरंतर दबाव
महंगाई के इस बढ़ते दबाव के बावजूद तुर्की का केंद्रीय बैंक सीबीआरटी इस महीने के अंत में अपनी एक हफ्ते की रेपो दर में 100 आधार अंकों की एक और कटौती कर सकता है। सीबीआरटी इस समय ब्याज दरों में कटौती के चक्र में मजबूती से बंध चुका है, भले ही कागजी तौर पर वह यह दावा करता रहा है कि वह महंगाई के बढ़ते जोखिमों के प्रति सतर्क है और हर बैठक में अलग से फैसला लेता है। विश्लेषकों का मानना है कि महीने दर महीने महंगाई दर का फिर से 2 प्रतिशत के दायरे में लौटना और साथ ही मौद्रिक नीति में लगातार ढिलाई जारी रहना मुद्रास्फीति में कमी आने के आधिकारिक दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इसी नीतिगत असंतुलन की वजह से लीरा में लगातार गिरावट जारी है और मुद्रा पर दबाव बना रहने की प्रबल संभावना है।
एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और जापानी येन की चाल
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में मंगलवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान अन्य प्रमुख मुद्राओं में भी अहम उतार-चढ़ाव देखा गया। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया यानी आरबीए द्वारा ब्याज दरों में बहुप्रतीक्षित 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी किए जाने के बाद भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार दूसरे दिन कमजोर होकर दो हफ्ते के नए निचले स्तर पर आ गया। आरबीए का यह निर्णय पूरी तरह सर्वसम्मत नहीं था, क्योंकि बोर्ड के तीन सदस्यों ने दरों को 4.60 प्रतिशत पर यथावत रखने के पक्ष में राय दी थी। इस असहमति के कारण भविष्य में आगे और दरें बढ़ाए जाने की संभावनाओं को झटका लगा, जिससे अमेरिकी डॉलर की मामूली मजबूती के बीच ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर बिकवाली हावी रही।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी एशियाई सत्र में थोड़ी नरम रही और पिछले कारोबारी सत्र में 158.00 तक की बढ़त के एक हिस्से को गंवा दिया। ईरान से जुड़े कूटनीतिक घटनाक्रमों की उम्मीदों और अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले डॉलर में नरमी का रुख बना रहा। हालांकि जापानी मुद्रा अधिकारियों के संभावित हस्तक्षेप के जोखिम से येन को सहारा जरूर मिल रहा है, लेकिन बैंक ऑफ जापान की तरफ से अगली ब्याज दर बढ़ोतरी के समय को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण येन की बढ़त सीमित रही, जिससे यह जोड़ी एक जाने-पहचाने दायरे में ही फंसी रही।
सोने में फिसलन और कार्डानो की तकनीकी गिरावट
कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली और यह पीली धातु फिसलकर 3,950 डॉलर प्रति औंस के नीचे कारोबार करने लगी। यह गिरावट पिछले हफ्ते बने एक साल के निचले स्तर से आई हालिया रिकवरी को थामने वाली साबित हुई। सोमवार को सामने आए आंकड़ों से पता चला था कि अमेरिका के विनिर्माण क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार अक्टूबर में लगातार दसवें महीने जारी रहा। इंस्टीट्यूट फॉर सप्लाई मैनेजमेंट यानी आईएसएम का मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई अनुमानों से बेहतर रहा और सितंबर के 54.5 से बढ़कर अक्टूबर में 55.5 पर पहुंच गया। इस मजबूत आंकड़े ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त नीतिगत रुख की उम्मीदों को मजबूत किया और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी ला दी, जिससे बिना ब्याज वाली इस कीमती धातु पर नए सिरे से बिकवाली का दबाव आ गया।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में कार्डानो यानी ADA में गिरावट का रुख और आगे बढ़ गया। सोमवार को अपने अहम सपोर्ट क्षेत्र को गंवाने के बाद मंगलवार को कार्डानो 0.189 डॉलर से नीचे कारोबार करता दिखा। डेरिवेटिव बाजार के मिले-जुले आंकड़े और सतर्क ऑन-चेन मैट्रिक्स निवेशकों की धारणा पर भारी पड़ रहे हैं, जबकि कमजोर पड़ते तकनीकी संकेतक कार्डानो के लिए और अधिक गिरावट के जोखिम का संकेत दे रहे हैं।
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों पर टिकी वैश्विक निगाहें
राजनीतिक मोर्चे पर अमेरिका में मंगलवार को मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान हो रहा है, जिस पर दुनिया भर के बाजारों की नजरें टिकी हुई हैं। इस चुनाव में अमेरिकी सीनेट की लगभग एक-तिहाई सीटों और प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों का नवीनीकरण होना है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा खाली की गई सीटों को भरने के लिए फ्लोरिडा और ओहियो में विशेष चुनाव भी आयोजित किए जा रहे हैं। इन चुनावों के परिणामों का असर अमेरिकी आर्थिक नीतियों और डॉलर के रुख पर पड़ना तय माना जा रहा है।

















