अमेरिकी अर्थव्यवस्था में रोजगार के मोर्चे पर एक बार फिर मजबूती के संकेत मिले हैं। यूएस डिपार्टमेंट ऑफ लेबर की तरफ से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, साप्ताहिक बेरोजगारी भत्ते के लिए नए आवेदनों की संख्या गिरकर 197K पर आ गई है। यह आंकड़ा विश्लेषकों के 201K के अनुमान से काफी बेहतर है और पिछले हफ्ते के 198K (संशोधित 196K से) से भी कम दर्ज किया गया है। दूसरी तरफ लगातार लाभ पाने वालों यानी कंटीन्यूइंग जॉबलेस क्लेम्स की संख्या बढ़कर 1.719M तक पहुंच गई है। इन नए आंकड़ों ने वैश्विक वित्तीय बाजारों, मुद्रा विनिमय दरों और केंद्रीय बैंकों की भविष्य की नीतियों को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं।
साप्ताहिक आंकड़े और श्रम बाजार के बदलते रुझान
अमेरिकी श्रम विभाग द्वारा 19 सितंबर को समाप्त हुए सप्ताह के लिए जारी रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि कंपनियों द्वारा छंटनी की दर अभी भी नियंत्रित दायरे में है। चार हफ्तों का मूविंग एवरेज भी 1.75K घटकर 202.25K रह गया है, जबकि पिछले हफ्ते का संशोधित आंकड़ा 204K दर्ज किया गया था। मूविंग एवरेज में यह गिरावट अल्पकालिक उतार-चढ़ाव को हटाकर यह दर्शाती है कि अमेरिकी रोजगार बाजार में स्थिरता बनी हुई है।
इन मजबूत श्रम आंकड़ों के सामने आने के बाद विदेशी मुद्रा बाजार में ग्रीनबैक यानी अमेरिकी डॉलर ने अपनी बढ़त जारी रखी। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) चढ़कर 101.30 के आसपास पहुंच गया, जो इसका ताजा दो महीने का उच्चतम स्तर है। निवेशक और बड़े संस्थान इन आंकड़ों का बारीक विश्लेषण कर रहे हैं, क्योंकि मजबूत जॉब मार्केट सीधे तौर पर केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों की दिशा तय करने में मदद करता है।
अर्थव्यवस्था, मुद्रा मूल्यांकन और केंद्रीय बैंकों की भूमिका
किसी भी देश की अर्थव्यवस्था का स्वास्थ्य मापने के लिए लेबर मार्केट की स्थिति सबसे महत्वपूर्ण पैमानों में से एक होती है। जब बेरोजगारी दर कम होती है और रोजगार के अवसर अधिक होते हैं, तो उपभोक्ताओं की खर्च करने की क्षमता बढ़ती है। उपभोक्ता खर्च में यह इजाफा समग्र आर्थिक विकास को गति प्रदान करता है, जिसका सीधा सकारात्मक असर स्थानीय मुद्रा के मूल्य पर पड़ता है।
इसके अलावा, यदि श्रम बाजार अत्यधिक तंग यानी टाइट हो जाता है, जहां खाली पदों के मुकाबले कर्मचारियों की कमी होने लगती है, तो वेतन में तेज वृद्धि देखने को मिलती है। ऊंची वेतन वृद्धि महंगाई को बढ़ावा देती है क्योंकि परिवारों के पास खर्च करने के लिए अधिक पूंजी होती है, जिससे उपभोक्ता वस्तुओं के दाम बढ़ते हैं। ऊर्जा की कीमतों जैसे अस्थायी कारकों की तुलना में वेतन वृद्धि को दीर्घकालिक महंगाई का अहम हिस्सा माना जाता है, क्योंकि बढ़ी हुई तनख्वाह में कटौती करना आसान नहीं होता।
यही वजह है कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक ब्याज दरों पर निर्णय लेते समय मजदूरी वृद्धि और रोजगार आंकड़ों पर पैनी नजर रखते हैं। यूएस फेडरल रिजर्व के पास दोहरा दायित्व है, जिसमें अधिकतम रोजगार सुनिश्चित करने के साथ-साथ कीमतों में स्थिरता बनाए रखना शामिल है। इसके विपरीत, यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) का प्राथमिक उद्देश्य मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखना है। हालांकि विभिन्न केंद्रीय बैंकों के लक्ष्य अलग हो सकते हैं, लेकिन आर्थिक सेहत के सबसे बड़े संकेतक के रूप में रोजगार के आंकड़े सभी नीति निर्माताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बने रहते हैं।
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार और संपत्तियों की स्थिति
अमेरिकी आंकड़ों के साथ-साथ दुनिया के अन्य प्रमुख क्षेत्रों से आए आर्थिक घटनाक्रमों ने विदेशी मुद्रा बाजार में भारी उतार-चढ़ाव पैदा किया है। ऑस्ट्रेलियाई जॉब्स रिपोर्ट जारी होने के बाद एशियाई सत्र में AUD/USD कमजोर होकर 0.7000 के स्तर की तरफ फिसलता नजर आया। ऑस्ट्रेलिया में बेरोजगारी दर बढ़कर 4.6% हो गई, जो अनुमानित 4.5% से अधिक रही, हालांकि रोजगार परिवर्तन का आंकड़ा उम्मीदों को पीछे छोड़ते हुए 39.5K दर्ज किया गया।
उधर जापानी येन के मुकाबले डॉलर के समीकरण में भी दिलचस्प मोड़ देखने को मिला है। एशियाई सत्र में USD/JPY तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर से फिसलकर 158.00 के करीब आ गया था, जिसे बढ़ते जापानी बॉन्ड यील्ड और संभावित सरकारी हस्तक्षेप के जोखिम का समर्थन मिला। हालांकि, फेड की सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती के चलते डॉलर अपनी बढ़त बचाने में सफल रहा है। वर्तमान लाइव मार्केट डेटा के अनुसार, USD/JPY 158.80 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद भाव 157.46 से 0.85% की बढ़त दिखाता है। तकनीकी स्तरों पर इसका आरएसआई (RSI 14) 59 पर है और दैनिक पिवट 158.49 के आसपास बना हुआ है, जबकि प्रतिरोध R1 159.20 और समर्थन S1 158.10 पर केंद्रित है।
केंद्रीय बैंकों के नीतिगत फैसले और भू-राजनीतिक बैठक
जापान के केंद्रीय बैंक (Bank of Japan) ने अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है। यह फैसला 7-2 के बहुमत से लिया गया, जो बाजार की उम्मीदों के पूरी तरह अनुकूल रहा। वहीं दूसरी ओर, स्विस नेशनल बैंक (SNB) ने अपनी प्रमुख नीतिगत दर को बिना किसी बदलाव के 0% पर बनाए रखा। स्विस बैंक ने 2026 के लिए महंगाई दर 0.7% रहने का अनुमान लगाया है, जो पहले के 0.6% से थोड़ा अधिक है। स्विस बैंक का मानना है कि उनकी अर्थव्यवस्था के लिए मुख्य जोखिम वैश्विक आर्थिक गतिविधियों से जुड़ा हुआ है।
कमोडिटी बाजार में सोने पर लगातार दूसरे दिन दबाव देखा गया और यूरोपीय सत्र के पहले हिस्से में यह 4,300 डॉलर के स्तर से नीचे गिरकर एक सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया। निवेशक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली अहम बैठक को लेकर सतर्क हैं। हालांकि इस बैठक से किसी बड़े समझौते की उम्मीदें कम हैं, लेकिन बाजार प्रतिभागी दुर्लभ पृथ्वी खनिजों, प्रौद्योगिकी प्रतिबंधों और अमेरिका-चीन के बीच मौजूदा व्यापारिक युद्धविराम के विस्तार पर किसी भी सकारात्मक प्रगति पर नजरें गड़ाए हुए हैं।


















