वैश्विक वित्तीय बाजारों में मची हलचल के बीच सोने की कीमतों में जोरदार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। सप्ताह के शुरुआती सत्रों में अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में आई आक्रामक तेजी ने कीमती धातुओं पर भारी बिकवाली का दबाव बनाया, जिसके चलते पीली धातु फिसलकर 4,100 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के बेहद करीब पहुंच गई थी। निवेशकों में यह आशंका तेजी से गहराने लगी थी कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अक्टूबर की आगामी बैठक में नीतिगत ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी कर सकता है। नीति निर्माताओं के सख्त बयानों और हालिया मजबूत वृहद आर्थिक आंकड़ों ने बॉन्ड यील्ड को ऊपर की ओर धकेलने में अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि, सप्ताह के उत्तरार्ध में कमजोर आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक ऋण बाजारों में आई गिरावट के चलते सुरक्षित निवेश की मांग निकलने से सोने को निचली सतहों पर जरूरी सहारा मिला।
शुरुआती झटकों के बाद वृहद आर्थिक आंकड़ों से मिला सहारा
सप्ताह की शुरुआत में भारी गिरावट झेलने के बाद मंगलवार के कारोबारी सत्र में सोने में रिकवरी के संकेत दिखे। अमेरिका में जारी हुए जॉब ओपनिंग्स एंड लेबर टर्नओवर सर्वे यानी JOLTS के आंकड़ों के अनुसार अगस्त में नौकरी के रिक्त पदों की संख्या घटकर 7.079 मिलियन रह गई, जो जुलाई में 7.335 मिलियन दर्ज की गई थी। इसके साथ ही कॉन्फ्रेंस बोर्ड द्वारा जारी उपभोक्ता विश्वास सूचकांक सितंबर में गिरकर 81.9 पर आ गया, जबकि अगस्त में यह 88.6 था, जिसे पहले 89.4 से संशोधित किया गया था। इन दोनों कमजोर आंकड़ों ने अमेरिकी डॉलर की बढ़त पर लगाम लगाई, जिससे XAU/USD ने उस दिन 1% से अधिक की छलांग लगाते हुए सोमवार के नुकसान की आंशिक भरपाई कर ली।
बुधवार को यूएस ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक एनालिसिस यानी BEA द्वारा जारी महंगाई आंकड़ों ने बाजार की दिशा को और प्रभावित किया। व्यक्तिगत उपभोग व्यय यानी PCE मूल्य सूचकांक में वार्षिक बदलाव के आधार पर मापी गई महंगाई दर अगस्त में 3.4% पर स्थिर रही। इस दौरान अस्थिर खाद्य और ऊर्जा कीमतों को छोड़कर आंका जाने वाला कोर PCE मूल्य सूचकांक 3% बढ़ा, जो जुलाई की वृद्धि दर के बिल्कुल बराबर रहा। यह आंकड़ा विश्लेषकों के अनुमान से काफी नीचे रहा, और BEA ने जुलाई के प्रिंट में 0.3% की कटौती करते हुए संशोधन किया। हालांकि नरम महंगाई ने शुरुआत में डॉलर को कमजोर किया, लेकिन दूसरी तिमाही के वार्षिक सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP वृद्धि के 1.5% से सुधरकर 2.2% होने और निजी क्षेत्र के रोजगार में उम्मीद से अधिक 90,000 की बढ़ोतरी दर्ज होने से डॉलर ने अपने नुकसान को सीमित कर लिया, जिससे सोने की उछाल पर विराम लग गया।
रिकॉर्ड बॉन्ड यील्ड और सुरक्षित परिसंपत्ति की मांग
गुरुवार को अमेरिकी डॉलर ने प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले फिर से बढ़त हासिल की क्योंकि 10 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड अप्रैल 2002 के बाद के अपने उच्चतम स्तर को पार करते हुए 5.3% के पार निकल गई। आम तौर पर बॉन्ड यील्ड में इतनी तेज वृद्धि बिना ब्याज वाली कीमती धातुओं के लिए नकारात्मक मानी जाती है, लेकिन वैश्विक ऋण बाजारों में जारी तेज बिकवाली ने अप्रत्याशित रूप से सोने में सुरक्षित निवेश की मांग पैदा कर दी। विभिन्न मुद्राओं में सोने की कीमतों में आए उछाल ने पूंजी के पुनर्वितरण को स्पष्ट रूप से दर्शाया।
गुरुवार को ही XAU/EUR, XAU/GBP और XAU/JPY जैसे मुद्रा जोड़ों में लगभग 1% की बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह साफ संकेत मिला कि यूरोपीय, ब्रिटिश और जापानी मुद्राओं से पूंजी निकलकर कीमती धातुओं में शरण ले रही थी। इसके अलावा, फेडरल रिजर्व के कुछ नीति निर्माताओं की ओर से नीतिगत दरों को और कड़ा करने पर संयम बरतने वाले बयानों ने भी सप्ताह के दूसरे हिस्से में सोने को 4,150 डॉलर के ऊपर टिके रहने में मदद की।
कमजोर पेरोल रिपोर्ट ने घटाई दर वृद्धि की संभावना
शुक्रवार को यूएस ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स यानी BLS की तरफ से जारी नॉन-फार्म पेरोल्स रिपोर्ट ने बाजार का रुख एक बार फिर पलट दिया। सितंबर महीने में गैर-कृषि रोजगार में केवल 29,000 की वृद्धि दर्ज की गई। यह आंकड़ा अगस्त के 133,000 के संशोधित आंकड़े से काफी कमजोर था, जिसे पहले 162,000 बताया गया था, जबकि बाजार को 90,000 की बढ़ोतरी की उम्मीद थी। रिपोर्ट के अन्य विवरणों के अनुसार बेरोजगारी दर मामूली रूप से बढ़कर 4.2% पर पहुंच गई, जबकि श्रम बल भागीदारी दर 61.6% से सुधरकर 61.8% दर्ज की गई।
औसत प्रति घंटा कमाई में बदलाव के आधार पर वार्षिक वेतन मुद्रास्फीति भी नरम होकर 3.1% से 3% पर आ गई, जो विश्लेषकों के 3.2% के अनुमान से नीचे रही। इस रोजगार रिपोर्ट के सामने आते ही अक्टूबर में फेड द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की संभावनाएं काफी हद तक समाप्त हो गईं। हालांकि, पेरोल रिपोर्ट के बाद सोने में आई तेजी 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के ऊपर टिक नहीं सकी और सप्ताह के अंत में भाव फिसलकर 4,180 डॉलर के दायरे में आ गया, जहां निवेशक अनिश्चितता के बीच नई दिशा तलाश रहे हैं।
कच्चे तेल में नरमी और भू-राजनीतिक समीकरण
बॉन्ड बाजारों पर केंद्रित निवेशकों का ध्यान इस दौरान कच्चे तेल की कीमतों में आ रही निरंतर गिरावट पर कम गया है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड में लगातार तीसरे सप्ताह 3% से अधिक की गिरावट आई है। यह नरमी मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली तेल आपूर्ति में उल्लेखनीय सुधार की वजह से दर्ज की गई है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को सुलझाने के लिए औपचारिक समझौता न होने के बावजूद तेल आपूर्ति में सुधार देखा गया है। यदि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का यह दौर लंबा खिंचता है, तो मुद्रास्फीति के दबाव में कमी आ सकती है, जो अल्पकाल में कीमती धातुओं को मजबूती प्रदान कर सकता है।
अन्य वैश्विक वित्तीय बाजारों और मुद्राओं की स्थिति
वैश्विक वित्तीय बाजारों में शुक्रवार के सत्र में बहुआयामी उतार-चढ़ाव देखा गया। एशियाई कारोबारी घंटों में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सुधरकर 0.6950 के स्तर पर पहुंचा। यह उछाल वैश्विक यील्ड और मुद्रास्फीति जोखिमों के बीच नवंबर में ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीदों से प्रेरित रहा। इसके विपरीत, USD/JPY 158.00 के करीब संघर्ष करता नजर आया, जहां टोक्यो कोर मुद्रास्फीति उम्मीद से अधिक रहने और अमेरिकी डॉलर में आई सामान्य नरमी के बीच व्यापारियों ने मुनाफावसूली की।
यूरोपीय मुद्रा EUR/USD गिरकर मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर 1.1312 पर पहुंच गई, जो जनवरी के 1.2082 के शिखर से काफी नीचे है। यह गिरावट यूरोप के ऊर्जा संकट और मजबूत अमेरिकी डॉलर के दोहरे दबाव को दर्शाती है। वहीं डिजिटल संपत्ति बाजार में रिकवरी का रुख दिखा, जहां बिटकॉइन 86,000 डॉलर के पार निकल गया, एथेरियम 2,700 डॉलर के स्तर को पार कर 2,800 डॉलर के प्रतिरोध का सामना कर रहा था, और रिपल 1.54 डॉलर के आसपास कारोबार करता रहा। आगामी दिनों में कनाडा के रोजगार आंकड़े, जापानी वेतन आंकड़े, यूरोपीय सेंट्रल बैंक यानी ECB की मिनट्स और अमेरिकी फेड की मिनट्स के साथ-साथ ISM सेवा PMI पर नजरें रहेंगी।
तकनीकी परिदृश्य और लाइव मार्केट डेटा
लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, गोल्ड फ्यूचर्स का भाव वर्तमान में 4,203 डॉलर पर बना हुआ है, जो पिछले 4,202 डॉलर के बंद स्तर से 0.02% की मामूली बढ़त दर्शाता है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 3,843 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच है, जबकि कारोबारी वॉल्यूम अपने 20-दिवसीय औसत का 0.68 गुना है। दैनिक चार्ट पर रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI(14) वर्तमान में 37 पर स्थित है, जो ओवरसोल्ड क्षेत्र के करीब है। MACD इंडिकेटर -60.24 पर बना हुआ है जबकि इसकी सिग्नल लाइन -37.97 पर है, जिसका हिस्टोग्राम -22.27 की मंदी की पुष्टि करता है।
मूविंग एवरेज के मोर्चे पर, 20-दिवसीय घातीय मूविंग एवरेज यानी EMA 4,313 डॉलर, 50-दिवसीय EMA 4,348 डॉलर और 200-दिवसीय EMA 4,439 डॉलर पर है। 50-दिवसीय सरल मूविंग एवरेज यानी SMA 4,367 डॉलर और 200-दिवसीय SMA 4,554 डॉलर पर स्थित है। 50-दिवसीय मूविंग एवरेज के 200-दिवसीय स्तर से नीचे जाने से बना डेथ क्रॉस स्पष्ट करता है कि धातु दीर्घकालिक डाउनट्रेंड में है। 20-दिवसीय बोलिंजर बैंड 4,143 डॉलर से 4,530 डॉलर के दायरे में है। ADX(14) 19 पर कमजोर ट्रेंड को दर्शाता है, जबकि स्टोकेस्टिक की फास्ट लाइन 20 और सिग्नल लाइन 18 पर है। 14-दिवसीय ATR 96.03 डॉलर है, जो स्टॉप-लॉस बफर के रूप में काम आ सकता है। प्रमुख लेवल्स में पिवट 4,208 डॉलर पर है, जहां पहला प्रतिरोध 4,254 डॉलर और दूसरा 4,304 डॉलर है। गिरावट की स्थिति में पहला सपोर्ट 4,158 डॉलर और दूसरा सपोर्ट 4,112 डॉलर पर स्थित है, जबकि नीचे 4,000 डॉलर से 3,970 डॉलर का दायरा मार्च-अगस्त के डाउनट्रेंड का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
केंद्रीय बैंकों की भूमिका और ऐतिहासिक महत्व
मानव इतिहास में सोने ने हमेशा मूल्य के संचय और विनिमय के माध्यम के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए रखी है। आभूषणों के अलावा, इसे संकट के समय में सबसे विश्वसनीय वित्तीय सुरक्षा कवच माना जाता है। किसी सरकारी संस्था या संप्रभु जारीकर्ता पर निर्भर न होने के कारण इसे मुद्रास्फीति और गिरती मुद्राओं के खिलाफ बेहतरीन हेज माना जाता है। केंद्रीय बैंक दुनिया में सोने के सबसे बड़े धारक हैं। जब घरेलू मुद्राओं पर दबाव बढ़ता है, तो वे अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की मजबूती प्रदर्शित करने के लिए सोना खरीदते हैं। उच्च स्वर्ण भंडार किसी भी देश की वित्तीय साख का आधार माना जाता है।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 में केंद्रीय बैंकों ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार में लगभग 70 बिलियन डॉलर मूल्य का रिकॉर्ड 1,136 टन सोना जोड़ा था, जो इतिहास में किसी एक वर्ष की सबसे बड़ी खरीदारी थी। चीन, भारत और तुर्की जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंक अपने स्वर्ण भंडार में तेजी से बढ़ोतरी कर रहे हैं। आम तौर पर जब अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर-मूल्यवान सोने की मांग बढ़ती है। वहीं शेयर बाजार की तेजी सोने को कमजोर करती है, जबकि जोखिम भरे बाजारों में गिरावट आने पर निवेशक सुरक्षित विकल्प के रूप में सोने की ओर रुख करते हैं।

















