अमेरिकी इक्विटी वायदा कारोबार में शुक्रवार के शुरुआती घंटों के दौरान सुस्ती और उतार-चढ़ाव की स्थिति देखी गई, क्योंकि बाजार के प्रतिभागी सितंबर महीने के महत्वपूर्ण श्रम बाजार आंकड़ों की घोषणा से पहले कोई बड़ा जोखिम लेने से बच रहे हैं। न्यूयॉर्क में नियमित सत्र के दौरान डाउ जोंस, नैस्डैक और एसएंडपी 500 में बने सतर्कता भरे माहौल का असर वायदा सौदों पर भी साफ नजर आया। बाजार से जुड़े लोगों की मुख्य नजर रोजगार रिपोर्ट पर टिकी है, जो अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के आगामी मौद्रिक नीतिगत कदमों की दिशा तय करने में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। मौजूदा समय में कारोबारी इस महीने होने वाले ब्याज दर फैसलों को लेकर अलग-अलग आकलन कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर बहुराष्ट्रीय कंपनियों के तिमाही वित्तीय नतीजे वॉल स्ट्रीट का रुख तय कर रहे हैं। हाल के दिनों में अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के कई दशकों के उच्चतम स्तर छूने और डॉलर में आई मजबूती ने भी इक्विटी बाजारों की चाल को दोनों तरफ घुमाया है।
वायदा बाजार के ताजा आंकड़े और प्रमुख संकेतकों की स्थिति
शुरुआती वायदा कारोबार के दौरान प्रमुख सूचकांकों में मिलीजुली हलचल दर्ज की गई। डाउ जोंस फ्यूचर्स लगभग 28 अंक की मामूली गिरावट के साथ 51,213 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इसके विपरीत, तकनीकी कंपनियों के प्रभुत्व वाले नैस्डैक 100 फ्यूचर्स में 56 अंक यानी 0.2 प्रतिशत की बढ़त देखी गई और यह 30,816.50 पर पहुंच गया। व्यापक बाजार का प्रतिनिधित्व करने वाला एसएंडपी 500 वायदा अनुबंध भी लगभग 3 अंक की बहुत हल्की बढ़त के साथ 7,726.75 के आसपास टिका हुआ था। निवेशकों की यह सतर्क चाल दर्शाती है कि जब तक आधिकारिक श्रम आंकड़े सामने नहीं आ जाते, तब तक बाजार किसी एक दिशा में आक्रामक दांव लगाने से परहेज कर रहा है।
बीते सत्र में वॉल स्ट्रीट का प्रदर्शन
इससे पहले रात के नियमित कारोबारी सत्र में भी अमेरिकी शेयर बाजारों में सीमित दायरे का ही कारोबार देखा गया था। डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 20.51 अंक की हल्की मजबूती दर्ज करते हुए 50,926.56 के स्तर पर बंद हुआ था। एसएंडपी 500 सूचकांक भी संकीर्ण दायरे में उतार-चढ़ाव झेलते हुए अंततः 15 अंक अथवा 0.2 प्रतिशत चढ़कर 7,666.45 के स्तर पर बंद होने में कामयाब रहा। इसी प्रकार नैस्डैक कंपोजिट में 10.53 अंक की बढ़त आई और यह 26,871.60 पर स्थिर हुआ। नियमित सत्र के दौरान जब ट्रेजरी यील्ड अपने कई दशकों के शीर्ष स्तर से थोड़ी नीचे फिसली, तब एसएंडपी 500 0.19 प्रतिशत मजबूत हुआ था, जबकि डाउ और नैस्डैक कंपोजिट में 0.04-0.04 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई थी।
कॉर्पोरेट नतीजों का मिलाजुला प्रभाव: नाइकी में गिरावट, एक्सेंचर चमका
व्यक्तिगत कंपनियों के स्तर पर आ रहे वित्तीय नतीजों ने भी विभिन्न शेयरों में तेज उतार-चढ़ाव पैदा किया। खेल उत्पाद बनाने वाली दिग्गज कंपनी नाइकी के शेयरों में करीब 9 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि कंपनी की पहली वित्तीय तिमाही के आंकड़े बाजार के अनुमानों से कमजोर रहे। नाइकी का राजस्व वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 11.21 अरब डॉलर रहा, जबकि बाजार विश्लेषकों ने इसके 11.32 अरब डॉलर रहने का अनुमान लगाया था। साथ ही कंपनी की शुद्ध आय सालाना आधार पर 2 प्रतिशत घटकर 712 मिलियन डॉलर रह गई। इन कमजोर नतीजों के अलावा नाइकी ने अपने पूरे साल के राजस्व अनुमान को भी घटा दिया है और वित्त वर्ष 2027 में इसमें उच्च एकल-अंक प्रतिशत की गिरावट की आशंका जताई है। कंपनी ने अपने समायोजित प्रति शेयर लाभ का दायरा 1.15 डॉलर से 1.35 डॉलर के बीच रहने का अनुमान व्यक्त किया है।
इसके विपरीत आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एक्सेंचर के शेयरों में लगभग 16 प्रतिशत की जोरदार तेजी देखी गई। कंपनी के वित्त वर्ष 2026 की एक अतिरिक्त तिमाही के नतीजे अनुमान से काफी बेहतर रहे। एक्सेंचर का राजस्व एक साल पहले के 17.6 अरब डॉलर से बढ़कर 18.68 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जबकि इसकी शुद्ध आय सालाना आधार पर करीब 41 प्रतिशत की छलांग लगाकर 1.413 अरब डॉलर से 1.99 अरब डॉलर दर्ज की गई। आगामी वित्त वर्ष 2027 के लिए एक्सेंचर ने राजस्व वृद्धि 3 प्रतिशत से 6 प्रतिशत के दायरे में रहने का अनुमान दिया है, जो वित्त वर्ष 2025 में दर्ज 6.5 प्रतिशत की राजस्व वृद्धि की तुलना में अपेक्षाकृत धीमी रफ्तार को दर्शाता है।
दिग्गज टेक और अन्य बड़े शेयरों की चाल
अन्य प्रमुख कंपनियों में भी मिलीजुला रुझान देखने को मिला। एनवीडिया का शेयर 1 प्रतिशत चढ़ने में सफल रहा, जबकि माइक्रोन के शेयरों में 3 प्रतिशत से अधिक की शानदार तेजी दर्ज की गई। इसके विपरीत एप्पल के शेयर में लगभग 1 प्रतिशत और अल्फाबेट में 2 प्रतिशत के करीब की गिरावट आई। स्पेसएक्स और ब्रॉडकॉम के शेयरों में भी 2-2 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज हुई। सैमसंग और एली लिली के शेयर भी लगभग 1-1 प्रतिशत नीचे बंद हुए। इसके अलावा कॉर्पोरेट जगत में चर्चा है कि एंथ्रोपिक कंपनी नवंबर के मध्य तक शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के विकल्पों की तलाश कर रही है। शुक्रवार को घोषित होने वाले तिमाही नतीजों की सूची में केवल एक कंपनी ट्रिलॉजी मेटल्स इंक शामिल है।
फेडरल रिजर्व की नीति और ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें
फेडरल रिजर्व के आगामी कदमों को लेकर बाजार में गहरा मंथन चल रहा है। केंद्रीय बैंक ने पिछले हफ्ते अपनी ब्याज दरों में चौथाई प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी, जो तीन वर्षों में उसकी पहली दर वृद्धि थी, और साथ ही आगे भी बढ़ोतरी जारी रखने का संकेत दिया था। एक्सिस सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का कहना है कि सीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार ट्रेडर्स अक्टूबर में दर वृद्धि की 66 प्रतिशत और दिसंबर में 93 प्रतिशत संभावना मानकर चल रहे हैं। दूसरी ओर बाजार के कुछ अन्य आकलनों के अनुसार ट्रेडर्स इस महीने दरों में कोई बदलाव न होने की संभावना लगभग 75 प्रतिशत तक आंक रहे हैं, जिसका अर्थ है कि ब्याज दरों में दोबारा बढ़ोतरी की शर्त के लिए रोजगार आंकड़ों का बेहद मजबूत आना जरूरी होगा।
अर्थव्यवस्था के अन्य संकेतकों की बात करें तो शुक्रवार को नॉनफार्म पेरोल के साथ-साथ औसत प्रति घंटा आय, औसत कार्य सप्ताह, व्यावसायिक इन्वेंट्री, फैक्ट्री ऑर्डर और बेरोजगारी दर से जुड़े आंकड़े भी जारी होने हैं। वित्तीय संस्था एमयूयूएफजी ने सितंबर 2026 के नॉनफार्म पेरोल में 90 हजार नई नौकरियों के जुड़ने का अनुमान लगाया है। यह ब्लूमबर्ग योगदानकर्ताओं के 85 हजार के औसत अनुमान के काफी करीब है और 71 हजार के तीन महीने के औसत से थोड़ा ऊपर है। बेरोजगारी दर सितंबर में 4.1 प्रतिशत पर स्थिर रहने की संभावना जताई गई है। वरिष्ठ श्रमिकों (55 वर्ष और उससे अधिक) की श्रम भागीदारी में संभावित कमी, जो सेवानिवृत्ति के कारण कार्यबल से बाहर होने वालों में वृद्धि दर्शाती है, मुख्य कामकाजी उम्र (25 से 54 वर्ष) के श्रमिकों की बढ़ी हुई भागीदारी के असर को संतुलित कर सकती है। हालांकि महीने-दर-महीने आधार पर सामान्य उतार-चढ़ाव के चलते नौकरियों में संभावित कटौती बेरोजगारी दर को 4.2 प्रतिशत तक भी धकेल सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि श्रम बाजार की स्थिरता की पुष्टि करने वाले आंकड़े बाजार में कोई बहुत आक्रामक प्रतिक्रिया पैदा नहीं करेंगे, बल्कि ब्याज दर वक्र के शुरुआती हिस्से में नरमी जारी रह सकती है।
पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा संकट
इक्विटी बाजारों पर आर्थिक आंकड़ों के अलावा वैश्विक भू-राजनीतिक हालात भी भारी दबाव बनाए हुए हैं। पश्चिम एशिया के क्षेत्र में संकट गहराता जा रहा है, जहां अमेरिका इस क्षेत्र में एक और विमानवाहक पोत तथा अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की योजना पर विचार कर रहा है। इस कदम से ईरान के साथ संघर्ष और अधिक भड़कने की आशंका जताई जा रही है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार की सैन्य तैनाती से पहले से ही दबाव झेल रही क्षेत्रीय ऊर्जा आपूर्ति में और अधिक व्यवधान उत्पन्न हो सकता है, जिससे कच्चे तेल और गैस की कीमतों में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। यही कारण है कि निवेशक रोजगार रिपोर्ट और भू-राजनीतिक घटनाओं दोनों के बीच अत्यधिक सतर्कता बरत रहे हैं।



















