गांधी जयंती के राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर 2 अक्टूबर 2026 को देश के वित्तीय बाजारों में अवकाश रहेगा। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर किसी भी प्रकार का नियमित लेनदेन नहीं होगा। इस दौरान शेयर बाजार से जुड़े सभी प्रमुख मंच पूरी तरह बंद रहेंगे। 2 अक्टूबर शुक्रवार के दिन पड़ने के कारण इसके बाद 3 अक्टूबर को शनिवार और 4 अक्टूबर को रविवार का साप्ताहिक अवकाश भी रहेगा। इस प्रकार दलाल स्ट्रीट के कारोबारियों और खुदरा निवेशकों को लगातार तीन दिनों का लंबा कारोबारी ब्रेक मिलेगा।
इन सभी कारोबारी सेगमेंट्स में रहेगा अवकाश
वर्ष 2026 की आधिकारिक अवकाश सूची के अनुसार यह बंदी केवल मुख्य शेयरों की खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं है। इक्विटी सेगमेंट के साथ इक्विटी डेरिवेटिव्स और करेंसी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में भी कोई कामकाज नहीं होगा। इसके अतिरिक्त एनडीएस-आरएसटी (NDS-RST), ट्राई पार्टी रेपो (Tri Party repo), बॉन्ड बाजार और सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग (एसएलबी) सेगमेंट के तहत होने वाले सभी लेन-देन पूरी तरह स्थगित रहेंगे। इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स और कमोडिटी डेरिवेटिव्स में भी निवेशक किसी नए सौदे की शुरुआत या पुराने सौदों का निपटान नहीं कर पाएंगे।
सामान्य तौर पर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर दो अलग-अलग सत्रों में कामकाज होता है। पहला सुबह का सत्र 9 बजे से शाम 5 बजे तक चलता है और दूसरा शाम का सत्र 5 बजे से रात 11:30 या 11:55 बजे तक संचालित होता है। इन सत्रों में सोने, चांदी, कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, लेड, कॉपर और जिंक जैसी कमोडिटीज में बड़े पैमाने पर ट्रेडिंग होती है। सामान्य सार्वजनिक छुट्टियों के मौकों पर एमसीएक्स का केवल सुबह का सत्र बंद रहता है और शाम का सत्र खुला रखा जाता है, लेकिन गांधी जयंती एक राष्ट्रीय अवकाश होने के कारण एमसीएक्स के सुबह और शाम, दोनों सत्रों में ट्रेडिंग पूरी तरह बंद रहेगी।
महात्मा गांधी के सम्मान में राष्ट्रीय अवकाश
दो अक्टूबर को देश भर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती मनाई जाती है। ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले महात्मा गांधी ने पूरी दुनिया को सत्य, अहिंसा और एकता का संदेश दिया। वैश्विक स्तर पर उनके अहिंसा और शांति के सिद्धांतों को गहराई से सराहा जाता है और उनका चित्र भारतीय मुद्रा के हर नोट पर अंकित है। इसी ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व को देखते हुए पूरे देश में इस दिन अवकाश रहता है, जिसके चलते बैंकिंग और एक्सचेंज सेवाएं बंद रखी जाती हैं।
बाजार में पिछले कारोबारी सत्रों की गिरावट और रुझान
छुट्टी से ठीक पहले के कारोबारी सत्र में घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स में भारी कमजोरी दर्ज की गई थी। सेंसेक्स 571 अंक या 0.8 प्रतिशत गिरकर 71,909.70 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50 में 199 अंक या 0.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,421.95 के स्तर पर आ गया। यदि पिछले पांच कारोबारी सत्रों का हिसाब देखें, तो बाजार की चाल बेहद कमजोर रही है। इस अवधि में सेंसेक्स 1,690.3 अंक लुढ़क चुका है, जबकि निफ्टी 50 में 694 अंकों की तेज गिरावट दर्ज की गई है।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर के अनुसार, छुट्टी के कारण छोटे रहे इस हफ्ते में घरेलू बाजार बेहद दबाव में दिखे। वैश्विक मोर्चे पर बिगड़ते हालात ने घरेलू समर्थन को बेअसर कर दिया, जिसके चलते प्रमुख बेंचमार्क एक अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गए। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में सख्ती की आशंका से अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड दो दशक के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गई। इससे भारत और अमेरिका के बॉन्ड यील्ड का अंतर घट गया, जिसने सीधे तौर पर भारतीय रुपये पर नकारात्मक दबाव डाला।
संस्थागत बिकवाली, आईपीओ और सेक्टोरल दबाव
विनोद नायर ने आगे स्पष्ट किया कि पूरे सप्ताह विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने अपनी बिकवाली को लगातार तेज किया। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने लगातार खरीदारी करते हुए विदेशी निवेशकों द्वारा बेची गई पूंजी के बड़े हिस्से को बाजार में खपाया। इससे बाजार को कुछ हद तक सहारा तो मिला, लेकिन यह इंडेक्स की लगातार गिरावट को रोकने के लिए काफी साबित नहीं हुआ। फ्रंटलाइन इंडेक्स के साथ व्यापक बाजार में भी तेज गिरावट देखने को मिली। इसके साथ ही नए आईपीओ (IPO) के भारी प्रवाह ने द्वितीयक बाजार से तरलता को काफी हद तक खींच लिया।
सेक्टरों की बात करें तो ब्याज दरों और कमोडिटी की कीमतों के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों में कमजोरी सबसे अधिक केंद्रित रही। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, पीएसयू बैंक, रियल्टी और मेटल सेक्टर लगातार दबाव में बने रहे। ऑटोमोबाइल शेयरों में होलसेल बिक्री के कमजोर आंकड़ों के सामने आने के बाद और भी आक्रामक बिकवाली देखने को मिली। दूसरी ओर, गिरते रुपये के बीच केवल आईटी सेक्टर एकमात्र ऐसा क्षेत्र रहा, जिसने बढ़त दर्ज की और बाजार की कमजोरी के बीच निवेशकों को राहत दी।
आगे की दिशा: केंद्रीय बैंक और वैश्विक ट्रिगर्स
आने वाले दिनों के बाजार रुख पर बात करते हुए नायर का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति का निर्णय सबसे बड़ा घरेलू ट्रिगर साबित होगा। रुपये को मजबूती देने और आयातित महंगाई को सीमित रखने की जरूरत के बीच नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें मजबूत हो रही हैं। इसके अलावा भारत के पीएमआई आंकड़े यह साफ करेंगे कि वैश्विक चुनौतियों के बीच घरेलू आर्थिक गतिविधियां कितनी मजबूत हैं।
वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी पेरोल, पीएमआई आंकड़े और एफओएमसी (FOMC) की बैठकों के मिनट्स से फेडरल रिजर्व के रुख और वैश्विक यील्ड की दिशा तय होगी। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के कॉरपोरेट नतीजे पहली तिमाही की तुलना में कमजोर रहने के अनुमान हैं, जिससे निवेशकों का सेंटिमेंट नाजुक बना रह सकता है। हालांकि, पश्चिम एशिया में यदि तनाव कम होता है, तो बाजार में एक तेज रिलीफ रैली की संभावना बन सकती है। जब तक ऐसी स्थिति नहीं बनती, निवेशकों को सतर्क रहकर केवल मजबूत बैलेंस शीट और स्पष्ट अर्निंग्स वाली कंपनियों पर ही ध्यान देना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशक मौजूदा गिरावट का उपयोग चुनिंदा उच्च गुणवत्ता वाले शेयरों को धीरे-धीरे जोड़ने के लिए कर सकते हैं।
निफ्टी और बैंक निफ्टी के लिए तकनीकी स्तर
कोटक सिक्योरिटीज के टेक्निकल रिसर्च वीपी अमोल आठवले के अनुसार, बाजार का अल्पकालिक ढांचा कमजोर जरूर है, लेकिन यह ओवरसोल्ड क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है। इसलिए मौजूदा स्तरों से एक पुलबैक रैली की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। नीचे की ओर 22,200/71300 का दायरा एक बहुत ही महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन है, जबकि ऊपर की तरफ 22,500/72200 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस के रूप में काम करेगा।
यदि बाजार 22,500/72200 के पार निकलने में सफल होता है, तो यह पुलबैक रैली 22,700-22,800/73000-73200 के स्तर तक खिंच सकती है। इसके विपरीत, यदि 22,200/71300 का स्तर टूटता है, तो बाजार में बिकवाली का दबाव अचानक तेज हो सकता है और निफ्टी तथा सेंसेक्स क्रमशः 22,000-21,950 और 71000-70700 के स्तर तक नीचे फिसल सकते हैं। बैंक निफ्टी के मामले में आठवले ने रेखांकित किया कि 54,000 एक अत्यंत महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन है। यदि यह इंडेक्स 54,000 से ऊपर टिके रहने में कामयाब रहता है, तो इसमें 55,000-55,500 तक का बाउंस बैक देखा जा सकता है। लेकिन 54,000 के नीचे ब्रेकडाउन होने पर बिकवाली तेज होगी, जिससे इंडेक्स 53,500-53,200 तक टूट सकता है।
















