वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में गुरुवार के कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर स्पष्ट दबाव देखा गया। ऑस्ट्रेलियाई सांख्यिकी ब्यूरो (एबीएस) द्वारा जारी किए गए अगस्त महीने के श्रम बाजार आंकड़ों में मिश्रित रुझान सामने आने के बाद मुद्रा में कमजोरी दर्ज की गई। रोजगार सृजन की कुल संख्या में भले ही अनुमान से बेहतर उछाल दिखा हो, लेकिन बेरोजगारी दर में हुई बढ़ोतरी और पूर्णकालिक नौकरियों में आई कमी ने निवेशकों के विश्वास को कमजोर कर दिया है। इसके अलावा, अमेरिका में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की संभावनाओं के बीच अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई तेजी अमेरिकी डॉलर को लगातार मजबूत बनाए हुए है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 7 अगस्त के निचले स्तरों के करीब बना हुआ है।
ऑस्ट्रेलिया के श्रम आंकड़ों और विनिर्माण सुस्ती का असर
ऑस्ट्रेलियाई सांख्यिकी ब्यूरो (एबीएस) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में नियोजित लोगों की कुल संख्या में 39 हजार की वृद्धि दर्ज की गई। बाद के संशोधित और विस्तृत आंकड़ों में यह रोजगार बदलाव 39.5 हजार पर देखा गया। यह आंकड़ा बाजार के 20 हजार के अनुमान से काफी बेहतर था, विशेष रूप से तब जब पिछले महीने इसमें 15.8 हजार की शुद्ध गिरावट दर्ज की गई थी। हालांकि, इस शुरुआती सकारात्मक वृद्धि के बावजूद बाजार की धारणा में सुधार नहीं हो सका, क्योंकि इस दौरान पूर्णकालिक नौकरियों में स्पष्ट गिरावट आई। इसके साथ ही, देश की बेरोजगारी दर जुलाई के 4.5 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 4.6 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि विश्लेषक इसे 4.5 प्रतिशत पर स्थिर रहने का अनुमान लगा रहे थे।
श्रम बाजार के इस मिश्रित परिदृश्य से पहले ऑस्ट्रेलिया के फ्लैश पीएमआई आंकड़ों ने भी अर्थव्यवस्था के लिए निराशाजनक संकेत दिए थे। फ्लैश पीएमआई के अनुसार, सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में स्पष्ट सुस्ती आई है और विनिर्माण क्षेत्र संकुचन के दायरे में बना हुआ है। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद यह माना जा रहा है कि रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (आरबीए) द्वारा आगामी सप्ताह में संभावित 25 आधार अंकों (बीपीएस) की ब्याज दर वृद्धि के बाद आगे की सख्त मौद्रिक कार्रवाई की गति धीमी पड़ सकती है। इस नीतिगत अनिश्चितता ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कमजोर करने का काम किया है।
श्रम बाजार संकेतक और मौद्रिक नीति का संबंध
ऑस्ट्रेलियाई सांख्यिकी ब्यूरो (एबीएस) द्वारा महीने के अंत के लगभग 15 दिनों बाद जारी की जाने वाली श्रम बाजार रिपोर्ट को नीति निर्माता और ट्रेडर बेहद करीब से देखते हैं। बेरोजगारी दर एक ऐसा पैमाना है जो सीधे तौर पर उपभोक्ता खर्च और मुद्रास्फीति के रुझान से जुड़ा होता है। यद्यपि बेरोजगारी दर को एक लैगिंग इंडिकेटर यानी पिछली अवधि का असर दिखाने वाला पैमाना माना जाता है, फिर भी यह रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (आरबीए) के नीतिगत ब्याज दर निर्णयों को गहराई से प्रभावित करता है। आमतौर पर मजबूत और उत्साहजनक आंकड़े ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन देते हैं, जबकि वर्तमान कमजोर विवरणों ने मुद्रा पर विपरीत दबाव बनाया है।
तकनीकी स्तर और रेजिस्टेंस के प्रमुख पड़ाव
तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) गुरुवार को एशियाई कारोबारी सत्र में 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर की ओर लुढ़कता दिखाई दिया। यदि मुद्रा में कोई सुधार की कोशिश होती है, तो ऊपर की दिशा में पहला रेजिस्टेंस 50.0 प्रतिशत रिट्रेसमेंट स्तर यानी 0.7050 पर स्थित है। इसके ऊपर निकलने पर अगला महत्वपूर्ण स्तर 38.2 प्रतिशत रिट्रेसमेंट 0.7094 पर देखा जाएगा। इसके बाद 23.6 प्रतिशत रिट्रेसमेंट स्तर 0.7149 पर मौजूद है, जहां ऊपर की ओर बढ़ने की गति सीमित या धीमी हो सकती है। फिलहाल बाजार में अनिश्चितता के कारण कारोबारी आक्रामक दांव लगाने से बच रहे हैं।
वैश्विक मुद्राओं, बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की हलचल
व्यापक वित्तीय बाजारों में अमेरिकी डॉलर की मजबूती का असर अन्य प्रमुख परिसंपत्तियों पर भी साफ देखा गया। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड कई वर्षों के नए उच्च स्तर पर पहुंच गई है, जिससे अमेरिकी डॉलर बुधवार को दो महीने के उच्चतम स्तर के करीब पहुंचने के बाद अपनी बढ़त को बरकरार रखने में सफल रहा। इस मजबूत डॉलर और बढ़ती यील्ड के चलते बिना ब्याज वाली परिसंपत्ति यानी सोना दबाव में आ गया और एशियाई सत्र में यह 4,300 डॉलर प्रति औंस के नीचे संघर्ष करता नजर आया। हालांकि, आगामी ट्रंप-शी बैठक को देखते हुए सोने के मंदड़ियों ने भी अतिरिक्त आक्रामक बिकवाली से परहेज किया।
दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर से फिसलकर एशियाई सत्र में 158.00 के स्तर के पास नुकसान में रहा। जापानी बॉन्ड यील्ड में आए उछाल और सरकारी हस्तक्षेप के बढ़ते जोखिम ने येन को समर्थन प्रदान किया। इसी बीच, बैंक ऑफ जापान (बीओजे) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया। बीओजे का यह निर्णय 7-2 के बहुमत से लिया गया, जो देश की मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और अपेक्षित कदम था। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और बढ़ती यील्ड के कारण इक्विटी बाजारों की हालिया तेजी भी पटरी से उतर गई है, जिससे वैश्विक सूचकांकों पर दबाव बढ़ गया है।
ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन को लेकर बाजार में सतर्कता
मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में इस उतार-चढ़ाव के बीच वैश्विक निवेशकों की निगाहें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली उच्च स्तरीय बैठक पर टिकी हैं। दो सबसे बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के शीर्ष नेताओं के बीच होने वाली इस बातचीत के नतीजों को लेकर व्यापारी सतर्क हैं। भू-राजनीतिक और व्यापारिक मोर्चे पर किसी बड़े बदलाव की आशंका के चलते बाजार प्रतिभागी किसी भी दिशा में बड़े सौदे करने से हिचकिचा रहे हैं, जिससे व्यापारिक गतिविधियां सीमित दायरे में सिमट गई हैं।



















