अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में उस वक्त भारी हलचल देखने को मिली जब बुधवार को अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यानी ट्रेजरी यील्ड कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। निवेशकों की आक्रामक बिकवाली और आर्थिक आंकड़ों के दबाव के चलते 10 साल और 30 साल की परिपक्वता वाले ट्रेजरी नोटों पर मिलने वाला रिटर्न महत्वपूर्ण 5 फीसदी के स्तर को पार कर गया। मजबूत कारोबारी आंकड़ों, केंद्रीय बैंक द्वारा मौद्रिक नीति को और सख्त किए जाने की बढ़ती उम्मीदों और ट्रेजरी बॉन्ड की हालिया नीलामी में कमजोर मांग ने मिलकर यील्ड्स को नई ऊंचाइयों पर धकेल दिया है। इस अप्रत्याशित उछाल ने दुनियाभर के कर्ज बाजार, शेयर बाजारों और मुद्राओं को गहरे दबाव में ला खड़ा किया है।
फेडरल रिजर्व की सख्ती और मजबूत आर्थिक आंकड़ों का असर
बुधवार को सामने आए एसएंडपी ग्लोबल परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी पीएमआई के शुरुआती आंकड़ों ने अमेरिकी कारोबारी गतिविधियों में अप्रत्याशित मजबूती दिखाई। उच्च ऊर्जा कीमतों के बीच बढ़ते परिचालन खर्च और मजबूत मजदूरी वृद्धि ने यह संकेत दिया कि अर्थव्यवस्था अब भी गर्म बनी हुई है। इन आंकड़ों के आने के बाद निवेशकों के बीच यह धारणा और पुख्ता हो गई कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक को आर्थिक गति को जरूरत से ज्यादा तेज होने से रोकने के लिए जल्द ही मौद्रिक नीति को और अधिक कड़ा करना होगा।
बाजार की इन आशंकाओं को उस समय और बल मिला जब फेडरल रिजर्व के गवर्नर माइकल बार ने आधिकारिक तौर पर कड़े रुख की पुष्टि की। बार ने दो टूक शब्दों में कहा कि महंगाई को समय पर 2 फीसदी के लक्ष्य पर वापस लाने के लिए दरों में और बढ़ोतरी की जरूरत हो सकती है। उनके इस आक्रामक बयान के बाद बॉन्ड बाजार में सरकारी प्रतिभूतियों की बिकवाली और तेज हो गई, जिससे यील्ड सीधे तौर पर उछलकर बहु-वर्षीय रिकॉर्ड पर पहुंच गई।
आम जनता और कंपनियों की कर्ज लागत पर पड़ेगा भारी दबाव
ट्रेजरी यील्ड का 5 फीसदी के पार निकलना केवल वित्तीय विशेषज्ञों के लिए एक आंकड़ा भर नहीं है, बल्कि यह आम परिवारों और कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए महंगे कर्ज का सीधा संदेश लेकर आया है। जब अमेरिकी सरकार के दीर्घावधि बॉन्ड पर यील्ड बढ़ती है, तो उसका सीधा असर मॉर्गेज दरों, क्रेडिट कार्ड की ब्याज दरों और व्यावसायिक ऋणों पर पड़ता है। अत्यधिक ऊंची उधारी लागत कंपनियों के लिए विस्तार करना और नए रोजगार पैदा करना मुश्किल बना देती है, जबकि आम परिवारों के मासिक बजट पर कर्ज की किस्तों का बोझ बढ़ जाता है। इन परिस्थितियों के चलते आर्थिक विकास की रफ्तार पर गहरा दबाव बनने की आशंका प्रबल हो गई है। बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति के चलते वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि अमेरिकी डॉलर मजबूत होकर नई ऊंचाई पर पहुंच गया।
मुद्रा बाजारों में उथल-पुथल और कैरी ट्रेड का बढ़ता जोखिम
बॉन्ड यील्ड में आए इस भारी तूफान के बीच वित्तीय सेवा समूह एमयूएफजी ने मुद्रा बाजारों को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। संस्थान का मानना है कि विदेशी मुद्रा बाजार अब कैरी ट्रेड के टूटने के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो चुका है, क्योंकि हाल के दिनों में विनिमय दरों की बेहद कम अस्थिरता के बीच ऐसे सौदों ने असाधारण मुनाफा कमाया था। विश्लेषकों का स्पष्ट अनुमान है कि यदि यह अनवाइंडिंग शुरू होती है, तो उभरते बाजारों की उच्च यील्ड वाली मुद्राओं को सबसे तगड़ा झटका लगेगा। दूसरी तरफ, अनिश्चितता और घबराहट के इस माहौल में जापानी येन और स्विस फ्रैंक जैसी पारंपरिक सुरक्षित संपत्तियों में जोरदार मजबूती आएगी, क्योंकि वैश्विक निवेशक जोखिम भरे सौदों से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करेंगे।
वैश्विक मुद्राओं, सोने और प्रमुख केंद्रीय बैंकों के फैसले
अमेरिकी डॉलर के दो महीने के उच्चतम स्तर पर टिके रहने और यील्ड में उछाल के बीच दुनिया भर की अन्य प्रमुख संपत्तियों में भी तेज उठापटक देखने को मिली। एशियाई सत्र में गुरुवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 0.7000 के स्तर की ओर फिसल गया। ऑस्ट्रेलिया के अगस्त रोजगार आंकड़ों में बेरोजगारी दर बढ़कर 4.6 फीसदी दर्ज की गई, जबकि 4.5 फीसदी का अनुमान था। हालांकि रोजगार बदलाव के आंकड़े 39.5 हजार पर आकर उम्मीदों से बेहतर रहे, लेकिन ट्रेडर्स अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली महत्वपूर्ण बैठक से पहले सतर्क दिखे।
वहीं अमेरिकी डॉलर और जापानी येन के मुकाबले में डॉलर तीन सप्ताह के उच्च स्तर से पीछे हटकर 158.00 के करीब नुकसान में टिका रहा। जापान में सरकारी बॉन्ड यील्ड के बढ़ने और संभावित सरकारी हस्तक्षेप के जोखिम ने येन को समर्थन दिया। कीमती धातुओं के बाजार में सोना लगातार दूसरे दिन गिरावट के दबाव में दिखा और यूरोपीय सत्र के पहले हिस्से में 4,300 डॉलर प्रति औंस के नीचे एक सप्ताह के निचले स्तर पर कारोबार करता रहा। बाजार भागीदार अमेरिका-चीन के बीच दुर्लभ धातुओं, प्रौद्योगिकी प्रतिबंधों और मौजूदा व्यापार समझौते के विस्तार पर किसी ठोस प्रगति की उम्मीद लगाए हुए हैं।
इसी बीच स्विट्जरलैंड और जापान के केंद्रीय बैंकों से भी नीतिगत निर्णय सामने आए। स्विस नेशनल बैंक ने अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दर को बाजार की उम्मीदों के अनुसार 0 फीसदी पर यथावत रखा है। बैंक ने स्पष्ट किया कि उसके पास रखी जाने वाली बैंकों की मांग जमाओं पर एक सीमा तक इस दर से ब्याज मिलता रहेगा। स्विस नेशनल बैंक ने साल 2026 के लिए महंगाई दर का अनुमान पिछले 0.6 फीसदी से बढ़ाकर 0.7 फीसदी कर दिया है और वैश्विक अर्थव्यवस्था के घटनाक्रम को स्विट्जरलैंड के लिए मुख्य जोखिम माना है। दूसरी ओर, बैंक ऑफ जापान ने मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00 फीसदी से बढ़ाकर 1.25 फीसदी कर दिया। यह निर्णय 7-2 के बहुमत से लिया गया, जो पिछले कई हफ्तों से बाजार की व्यापक उम्मीदों के पूरी तरह अनुकूल था।


















