अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजारों में जापानी येन भारी उठापटक के दौर से गुजर रहा है, जहां अमेरिकी डॉलर के मुकाबले विनिमय दर में तेज हलचल दर्ज की गई है। एमयूएफजी के तेप्पेई इनो ने हालिया मूल्य उतार-चढ़ाव की समीक्षा करते हुए बताया कि डॉलर और येन की जोड़ी की शुरुआत 153.41 के करीब हुई थी। इसके बाद फेडरल ओपन मार्केट कमेटी यानी एफओएमसी और बैंक ऑफ जापान की अहम बैठकों से पहले अमेरिकी डॉलर की आक्रामक खरीदारी ने इस विनिमय स्तर को 157.50 के पार पहुंचा दिया। एफओएमसी का सख्त रुख, बैंक ऑफ जापान का असहमति मतों के साथ दरें बढ़ाना और अगस्त के नरम उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आंकड़ों ने मिलकर येन को डॉलर के सामने दबाव में ला दिया।
शुरुआती दौर में डॉलर-येन की जोड़ी को 155 के आसपास अतिरिक्त बढ़त हासिल करने के लिए संघर्ष करना पड़ा, लेकिन 16 सितंबर को संपन्न हुई एफओएमसी बैठक के बाद यह तेजी से 156 के स्तर से ऊपर निकल गई। बाजार ने फेडरल रिजर्व के इस फैसले को काफी सख्त माना, जिसमें सर्वसम्मति से 25 आधार अंकों की ब्याज दर वृद्धि को मंजूरी दी गई थी। इसके तुरंत बाद, 17 सितंबर को कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के चलते डॉलर-येन का विनिमय अनुपात फिसलकर 155.50 से नीचे आ गया।
बैंक ऑफ जापान की दर वृद्धि और गवर्नर के बयान का प्रभाव
बैंक ऑफ जापान ने अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। बैंक ने अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया। यह निर्णय 7-2 के बहुमत से लिया गया, जो पिछले कई हफ्तों से बाजार की व्यापक उम्मीदों के पूरी तरह अनुकूल रहा। इस निर्णय में दो सदस्यों के असहमति मत भी शामिल रहे, जिसने बाजार विश्लेषकों का ध्यान आकर्षित किया।
गवर्नर काजुओ उएदा की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने शुरुआत में कुछ येन खरीदारी को प्रेरित किया, लेकिन यह गति ज्यादा देर टिक नहीं सकी। अंततः बाजार का रुख पलट गया और येन फिर से कमजोर हो गया, जिससे डॉलर-येन का स्तर बढ़कर 157.50 के पार पहुंच गया। गुरुवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान जापानी येन तीन सप्ताह के उच्च स्तर से थोड़ा पीछे हटा और 158.00 के करीब ठहराव दिखाता नजर आया। जापानी बॉन्ड यील्ड में आई तेजी और संभावित सरकारी हस्तक्षेप के जोखिम ने येन को सहारा दिया, जबकि अमेरिकी बॉन्ड की ऊंची यील्ड और फेडरल रिजर्व की सख्त नीतियों की उम्मीदों ने अमेरिकी डॉलर को दो महीने के उच्च स्तर पर बनाए रखा।
ऑस्ट्रेलियाई रोजगार आंकड़े और अन्य एशियाई मुद्राएं
एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने भी कमजोरी दिखाई। गुरुवार के कारोबार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर की जोड़ी 0.7000 के स्तर की तरफ फिसलती नजर आई। यह दबाव ऑस्ट्रेलिया के अगस्त माह के रोजगार आंकड़े जारी होने के बाद बना। आंकड़ों के अनुसार, देश की बेरोजगारी दर बढ़कर 4.6 प्रतिशत हो गई, जबकि अर्थशास्त्रियों ने इसके 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था।
हालांकि, रोजगार बदलाव के आंकड़ों ने पूर्वानुमानों को पीछे छोड़ दिया। अर्थव्यवस्था में 39.5 हजार नए रोजगार जुड़े, जो अनुमान से काफी बेहतर रहे। रोजगार वृद्धि में इस मजबूती के बावजूद बेरोजगारी दर में बढ़ोतरी ने निवेशकों को सतर्क कर दिया। साथ ही वैश्विक भू-राजनीतिक मोर्चे पर अनिश्चितताओं ने भी मुद्रा कारोबारियों के विश्वास को प्रभावित किया।
ट्रंप और शी जिनपिंग की आगामी वार्ता तथा सोने का रुख
वैश्विक वित्तीय बाजारों में कारोबारी वर्तमान में किसी बड़े दांव से बच रहे हैं। इसका मुख्य कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके चीनी समकक्ष शी जिनपिंग के बीच होने वाली अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक है। इस उच्चस्तरीय वार्ता को लेकर बाजार में किसी नाटकीय या क्रांतिकारी समझौते की उम्मीदें बेहद सीमित हैं, फिर भी निवेशक दुर्लभ पृथ्वी खनिजों, तकनीकी प्रतिबंधों और मौजूदा अमेरिका-चीन युद्धविराम के विस्तार से जुड़ी प्रगति पर पैनी नजर गड़ाए हुए हैं।
इस भू-राजनीतिक घटनाक्रम से पहले सोने की कीमतों में भी ठहराव का रुख देखा गया। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान सोना एक सप्ताह के निचले स्तर के पास कंसोलिडेट करता दिखा। बाजार प्रतिभागी किनारे बैठकर यह देख रहे हैं कि दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों के बीच चर्चा किस दिशा में आगे बढ़ती है, जिससे सुरक्षित निवेश संपत्तियों की मांग तय होगी।
स्विस नेशनल बैंक की मौद्रिक नीति समीक्षा
यूरोपीय मोर्चे पर, स्विस नेशनल बैंक ने वित्तीय विश्लेषकों की अपेक्षाओं के अनुरूप अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दरों को 0 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा है। बैंक के मौद्रिक नीति मूल्यांकन में स्पष्ट किया गया कि स्विस नेशनल बैंक में रखे जाने वाले वाणिज्यिक बैंकों के मांग जमा को एक निश्चित सीमा तक नीतिगत दर के बराबर प्रतिफल दिया जाएगा।
मुद्रास्फीति के मोर्चे पर, स्विस नेशनल बैंक ने वर्ष 2026 के लिए अपने महंगाई अनुमान को संशोधित कर 0.7 प्रतिशत कर दिया है, जो इसके पिछले 0.6 प्रतिशत के अनुमान से थोड़ा अधिक है। अपने आर्थिक दृष्टिकोण के जोखिमों का उल्लेख करते हुए केंद्रीय बैंक ने रेखांकित किया कि स्विट्जरलैंड के आर्थिक परिदृश्य के लिए सबसे बड़ा खतरा वैश्विक अर्थव्यवस्था में होने वाले घटनाक्रमों से जुड़ा हुआ है।















