अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर पर दबाव बना रहा, क्योंकि निवेशक अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा बॉन्ड प्रतिफल में आ रही गिरावट को थामने के लिए उठाए जा रहे कदमों का गहराई से विश्लेषण कर रहे हैं। टोक्यो से लेकर लंदन तक के वित्तीय बाजारों में दरों को लेकर विभिन्न केंद्रीय बैंकों का रुख अलग-अलग दिखाई दे रहा है। एक तरफ जहां अमेरिका में राजकोषीय नीति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, वहीं दूसरी तरफ जापान में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के नए आंकड़ों ने मौद्रिक नीति में सख्ती के संकेत दिए हैं। बाजार विशेषज्ञ डेरेक हैलपेनी के अनुसार, वित्तीय स्थिरता बनाए रखने की वाशिंगटन की कोशिशों के बावजूद अमेरिकी डॉलर में बड़ी बढ़त की संभावना फिलहाल सीमित नजर आ रही है।
जापान में महंगाई का उछाल और BoJ की दर वृद्धि की संभावनाएं
जापानी सरकारी बॉन्ड (JGB) के प्रतिफल में शुक्रवार को जोरदार तेजी देखने को मिली, जिसका मुख्य कारण जुलाई महीने के लिए जारी हुए राष्ट्रव्यापी CPI आंकड़े रहे। आंकड़ों के अनुसार, जापान में मुख्य मुद्रास्फीति की दर एक बार फिर 2.0% के स्तर की ओर बढ़ गई है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी और बाहर खाने-पीने के खर्च में आए उछाल के कारण कोर-कोर CPI दर बढ़कर 1.9% पर पहुंच गई है। यह आंकड़ा इस बात की पुष्टि करता है कि जापानी अर्थव्यवस्था में अंदरूनी मुद्रास्फीति का दबाव लगातार बना हुआ है।
मुद्रास्फीति के इन मजबूत आंकड़ों के आधार पर बाजार विश्लेषकों और एमयूएफजी का मानना है कि बैंक ऑफ जापान (BoJ) अपनी आगामी सितंबर नीति बैठक में ब्याज दरों में 25 आधार अंकों (25bps) की बढ़ोतरी कर सकता है। बैंक ऑफ जापान द्वारा मौद्रिक नीति को सख्त करने की दिशा में उठाए जाने वाले इस संभावित कदम से जापानी येन को समर्थन मिल रहा है, जबकि वैश्विक बाजारों में यील्ड का संतुलन बदल रहा है।
अमेरिकी राजकोषीय नीति पर संदेह और ट्रेजरी का बड़ा कदम
जापान के विपरीत, अमेरिका से मौद्रिक और राजकोषीय मोर्चे पर अलग संकेत मिल रहे हैं। स्कॉट बेसेंट द्वारा यह कहे जाने के बाद कि ट्रेजरी विभाग राजकोषीय समेकन पर अपना ध्यान केंद्रित करने की घोषणा जल्द ही करेगा, वित्तीय बाजारों में हलचल तेज हो गई है। हालांकि, बाजार सहभागी और विशेषज्ञ इस बात को लेकर काफी आशंकित हैं कि अमेरिकी प्रशासन कोई भी ऐसा ठोस कदम उठा पाएगा जिससे विश्वसनीय राजकोषीय समेकन हासिल किया जा सके। इस संशय ने अमेरिकी डॉलर के सेंटिमेंट को प्रभावित किया है।
इसी बीच, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने अपने तय कैलेंडर से हटकर बुधवार को 12:32 GMT पर एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव की घोषणा की। ट्रेजरी ने 10-वर्ष से 20-वर्ष और 20-वर्ष से 30-वर्ष वाले दीर्घकालिक सेक्टरों में तरलता सहायता पुनर्खरीद (बायबैक) अभियानों के आकार को कम से कम दोगुना करने का फैसला किया है। इसके तहत प्रति ऑपरेशन अधिकतम सीमा को $2 बिलियन से बढ़ाकर कम से कम $4 बिलियन कर दिया गया है। यह नई व्यवस्था 9 सितंबर से लागू होगी और 4 नवंबर तक जारी रहेगी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बॉन्ड बाजार में तरलता बनाए रखना और प्रतिफल में बड़ी गिरावट को रोकना है।
यूरो और स्टर्लिंग में उतार-चढ़ाव: EUR/USD और GBP/USD का हाल
यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान विदेशी मुद्रा बाजार में विभिन्न मुद्राओं का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। EUR/USD जोड़ी 1.1700 के स्तर के आसपास समेकित होती दिखी। जर्मनी और संपूर्ण यूरोज़ोन से आए मिश्रित PMI आंकड़ों के बाद निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। निवेशक अब अमेरिका के प्रारंभिक अगस्त PMI सर्वेक्षणों के जारी होने का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, डॉलर में बनी व्यापक कमजोरी के कारण यूरो अपनी हालिया साप्ताहिक बढ़त को बनाए रखने में सफल रहा है, यद्यपि निकट अवधि में इसके बहुत ऊपर जाने की गुंजाइश सीमित मानी जा रही है।
दूसरी ओर, GBP/USD जोड़ी सकारात्मक दायरे में कारोबार करती हुई 1.3650 के स्तर के करीब पहुंची। ब्रिटेन में निराशाजनक रिटेल सेल्स आंकड़ों के बावजूद, उम्मीद से बेहतर आए PMI आंकड़ों ने पाउंड स्टर्लिंग को सहारा दिया। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा बॉन्ड खरीदारी बढ़ाने के निर्णय से डॉलर पर बने दबाव ने पाउंड को अमेरिकी PMI आंकड़ों से ठीक पहले अपनी स्थिति मजबूत रखने में मदद की।
सोने में मजबूती और 200-दिवसीय SMA के ऊपर ब्रेकआउट
कीमती धातुओं के बाजार में सोने का प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है। शुक्रवार को यूरोपीय सत्र की शुरुआत से ठीक पहले सोना $4,550 प्रति औंस से ऊपर कारोबार करता हुआ देखा गया। यह जून की शुरुआत के बाद का इसका उच्चतम स्तर है। सोने की कीमतों को तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) के ऊपर मिले ब्रेकआउट से अतिरिक्त गति मिल रही है।
सोने में आई इस तेजी का एक बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर का कमजोर होना और अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) की ब्याज दर नीति को लेकर बदलती उम्मीदें हैं। पिछले सप्ताह जारी अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों ने मूल्य दबावों के शांत होने के संकेत दिए थे, जिसके बाद कारोबारियों ने फेड द्वारा तत्काल ब्याज दर बढ़ाने की दांव-पेचों को घटा दिया है। इस ढीले मौद्रिक माहौल से बिना ब्याज वाली संपत्ति जैसे सोने को फायदा पहुंच रहा है।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में तेजी: बिटकॉइन $77,000 के पार
डिजिटल परिसंपत्तियों के बाजार में शुक्रवार को मजबूत लिवाली का रुख देखा गया। क्रिप्टोकरेंसी बाजार में तेजी की अगुवाई बिटकॉइन (BTC) ने की, जिसने $77,000 के स्तर को सफलतापूर्वक पार कर लिया। मुख्य क्रिप्टो परिसंपत्ति में आई इस तेजी का असर अन्य ऑल्टकॉइन्स पर भी देखने को मिला।
एथेरियम (ETH) और रिपल (XRP) ने भी बिटकॉइन के सकारात्मक रुझान का अनुसरण किया। एथेरियम $2,400 के करीब कारोबार करता नजर आया, जबकि रिपल लगभग $1.35 के स्तर के पास मजबूती से टिका रहा। समग्र रूप से, डॉलर की कमजोरी और वैश्विक वित्तीय अनिश्चितता के बीच निवेशक वैकल्पिक परिसंपत्तियों की ओर रुख करते दिखाई दे रहे हैं।



















