अंतरराष्ट्रीय मुद्रा विनिमय बाजार और वैश्विक वित्तीय परिसंपत्तियों में तीसरी तिमाही के अंतिम हफ्तों के दौरान काफी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों को लेकर उठाए जा रहे कदमों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच यूरो, अमेरिकी डॉलर और सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली संपत्तियों में तेज फेरबदल दर्ज किया जा रहा है। ऊर्जा की कीमतों में गिरावट और बॉन्ड यील्ड में जारी हलचल के बावजूद वैश्विक जोखिम धारणा में सतर्कता बनी हुई है, जिससे कई प्रमुख करेंसी जोड़ों में मिलाजुला असर देखने को मिल रहा है।
यूरोपीय मुद्रा पर दबाव और ब्याज दरों का समीकरण
विदेशी मुद्रा बाजार में यूरो और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर को लेकर निकट अवधि में गिरावट के जोखिम बने हुए हैं। वित्तीय डेरिवेटिव्स और मुद्रा बाजारों में साल के अंत तक 33 से 37 आधार अंकों की ब्याज दर बढ़ोतरी पहले से ही आंकी जा चुकी है, जबकि अगले साल जुलाई तक 80 से 90 आधार अंकों की बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। दोनों प्रमुख केंद्रीय बैंकों की ओर से चालू वर्ष में केवल एक और दर वृद्धि की उम्मीद की जा रही है, जिसके बाद दरों में लंबे ठहराव का दौर शुरू हो सकता है।
यदि यह नीतिगत समायोजन ऊर्जा कीमतों में गिरावट के बीच होता है, तो आगे चलकर यह यूरो के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है। हालांकि, मौजूदा सप्ताह के दौरान यूरो पर नीचे की तरफ दबाव अधिक बना हुआ है। जून के महीने में देखे गए 1.1320 से 1.1330 के निचले स्तरों का दोबारा परीक्षण अभी जल्दबाजी लग सकता है और यह अल्पकालिक फेयर वैल्यू मॉडल से मेल नहीं खाता है। लेकिन अगर ब्रेंट क्रूड की कीमतें दोबारा 110 डॉलर प्रति बैरल के स्तर की ओर बढ़ती हैं और बाजार अक्टूबर में फेडरल रिजर्व की दर वृद्धि की अधिक संभावना जताने लगते हैं, तो यूरो में इस तरह की गिरावट एक वास्तविक परिदृश्य बन सकती है।
एशियाई मुद्राओं और केंद्रीय बैंकों की स्थिति
एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 0.7100 के स्तर से ऊपर स्थिर बना हुआ है। अमेरिकी डॉलर जुलाई के अंत के बाद के अपने उच्चतम स्तर से मामूली वापसी के बाद ठहर गया है, जिसके पीछे भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं प्रमुख कारण हैं। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना द्वारा लोन प्राइम रेट में कोई बदलाव न करने के यथास्थिति फैसले से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव बना, लेकिन रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की ओर से एक और ब्याज दर वृद्धि के कयासों और आगामी ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन से इसे समर्थन मिला है।
दूसरी ओर, डॉलर और जापानी येन का विनिमय दर एशिया में सोमवार को 157.00 के नीचे आ गया। शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान द्वारा दरों की समीक्षा के बाद संभावित बाजार हस्तक्षेप के जोखिमों ने येन को थोड़ी मजबूती दी। जापान में स्थानीय अवकाश के बीच रूस और यूक्रेन तथा पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने व्यापारियों को सतर्क बनाए रखा है। इस बीच, अमेरिकी डॉलर की गिरावट रुकने से इस मुद्रा जोड़े की और अधिक कमजोरी सीमित रही है। इसके साथ ही बैंक ऑफ जापान ने अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है, जो काफी हद तक बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहा।
सोने और क्रिप्टोकरेंसी बाजार की चाल
कमोडिटी बाजार में सोने में यूरोपीय सत्र के पहले हिस्से तक बिकवाली का दबाव देखा गया। पीली धातु 0.50% से अधिक टूटकर लगभग 4,350 डॉलर के आसपास कारोबार कर रही है। इसके बावजूद सोना पिछले बुधवार को छुए गए छह सप्ताह के निचले स्तर से काफी ऊपर बना हुआ है। कारोबारी पश्चिम एशिया के संकट से जुड़े ताजा घटनाक्रमों और मुद्रास्फीति पर इसके असर पर नजर बनाए हुए हैं। महंगाई की यह स्थिति आगे चलकर ब्याज दर संबंधी उम्मीदों को तय करेगी, जो बिना ब्याज देने वाले सोने की मांग को प्रभावित करती है।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में ज़ेडकैश ने मजबूत प्रदर्शन दिखाया है और यह 1,500 डॉलर के स्तर से ऊपर कारोबार कर रहा है। पिछले हफ्ते इसमें 40% से अधिक की तेजी दर्ज की गई, जिसे संस्थागत पूंजी प्रवाह और व्यापक क्रिप्टो बाजार में आई रिकवरी से समर्थन मिला। ग्रेस्केल के ZEC-केंद्रित एक्सचेंज ट्रेडेड फंड में पिछले सप्ताह 98.21 मिलियन डॉलर का निवेश देखा गया, जबकि इसके डेवलपर्स निजी भुगतान की गति बढ़ाने के लिए NU7 अपग्रेड पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
सरकारी बॉन्ड यील्ड और शेयर बाजार का रुख
वित्तीय बाजार तीसरी तिमाही के आखिरी पड़ाव में एक अजीब स्थिति से गुजर रहे हैं। जहां एक तरफ कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिल रही है, वहीं दूसरी तरफ अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव लगातार हावी हैं। यूरोपीय और अमेरिकी शेयर बाजार सोमवार को बढ़त के साथ खुलने की स्थिति में दिखे। हालांकि, बाजार का असली तनाव सरकारी बॉन्ड में केंद्रित है, जहां शुक्रवार देर रात यूरोपीय और अमेरिकी यील्ड में अचानक उछाल देखा गया जिसने निवेशकों को चौकन्ना कर दिया है।

















