अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में मंगलवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ताजा खरीदारी देखने को मिली है। अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई के दाम पिछले सत्र में लगभग दो हफ्ते के निचले स्तर पर चले गए थे, जहां से उबरते हुए कीमतों ने चार दिनों से जारी गिरावट का सिलसिला तोड़ दिया है। भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया के ताजा घटनाक्रमों पर निवेशकों की नजरें टिकी हुई हैं, जिससे बाजार में जोखिम प्रीमियम बना हुआ है और कीमतों को जरूरी सहारा मिल रहा है।
डब्ल्यूटीआई क्रूड सोमवार को फिसलकर 91.00 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया था, लेकिन मंगलवार को इसमें लगभग 1.40% की मजबूती दर्ज की गई। बाजार में ताजा हलचल के चलते भाव 93.00 डॉलर के करीब पहुंचते दिखे हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार क्लोज-बेल सत्र में कच्चा तेल 93.55 डॉलर पर दर्ज किया गया, जबकि इसका पिछला बंद भाव 95.78 डॉलर रहा था, जो 2.33% की गिरावट दर्शाता है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 54.98 डॉलर से 119.48 डॉलर के बीच रहा है और मौजूदा कारोबारी वॉल्यूम 20 दिनों के औसत का 0.07 गुना है।
तकनीकी स्तर और महत्वपूर्ण सपोर्ट
तकनीकी चार्ट पर कच्चे तेल का रुझान फिलहाल तेजी के पक्ष में बना हुआ है। कीमतें अपने 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज यानी 85.05 डॉलर के स्तर से ऊपर बनी हुई हैं। इसके अलावा फिबोनाची सपोर्ट बैंड में 61.8% रिट्रेसमेंट स्तर 84.27 डॉलर पर और 38.2% रिट्रेसमेंट स्तर 90.96 डॉलर पर स्थित है, जिसने गिरावट को थामने में बड़ी भूमिका निभाई है। ताजा गणना के अनुसार 50-दिवसीय एसएमए 87.20 डॉलर और 200-दिवसीय एसएमए 81.04 डॉलर पर है, जबकि 20-दिवसीय ईएमए 94.77 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 89.53 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 79.64 डॉलर पर मौजूद है। पचास और दो सौ दिनों के मूविंग एवरेज के बीच गोल्डन क्रॉस बना हुआ है, जो मध्यम और लंबी अवधि में तेजी के रुझान की पुष्टि करता है।
हालांकि तेजी के इस ढांचे के बावजूद मोमेंटम संकेतकों में कुछ नरमी देखी गई है। दैनिक रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई 54 के आसपास न्यूट्रल जोन में मंडरा रहा था, जबकि लाइव 14-दिवसीय आरएसआई 51 पर दर्ज है। मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस यानी एमएसीडी अपने सिग्नल लाइन से नीचे फिसल चुका है और हिस्टोग्राम नकारात्मक रुख दिखा रहा है। लाइव स्तरों पर एमएसीडी 3.88 और सिग्नल लाइन 4.28 पर है, जिससे हिस्टोग्राम -0.40 पर मंदी का संकेत देता है। स्टोकेस्टिक संकेतक की फास्ट लाइन 27 और सिग्नल लाइन 48 पर है, वहीं एडीएक्स 32 पर ट्रेंडिंग गति को दर्शा रहा है।
ऊपरी स्तरों पर नजर डालें तो पहला महत्वपूर्ण प्रतिरोध 23.6% रिट्रेसमेंट स्तर 95.10 डॉलर पर बना हुआ है। यदि कीमतें इस सीमा को पार कर जाती हैं, तो अगला लक्ष्य 101.79 डॉलर के आसपास का चक्र उच्च क्षेत्र होगा। इस ऊंचे स्तर पर खरीदारों को भारी मुनाफावसूली का सामना करना पड़ सकता है। दैनिक स्तरों के लिहाज से पिवट स्तर 92.96 डॉलर है, जबकि रेजिस्टेंस आर1 94.16 डॉलर व आर2 94.78 डॉलर पर है। नीचे की तरफ सपोर्ट एस1 92.34 डॉलर और एस2 91.14 डॉलर पर है, वहीं 20-दिवसीय सपोर्ट 79.62 डॉलर और रेजिस्टेंस 106.75 डॉलर पर देखा जा रहा है। बोलिंजर बैंड 78.98 डॉलर से 108.43 डॉलर के दायरे में है और इसका मध्य स्तर 93.70 डॉलर पर स्थित है। एटीआर 4.42 डॉलर पर दैनिक उतार-चढ़ाव को दर्शाता है, जिसे स्टॉप-लॉस बफर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बिकने वाले प्रमुख कच्चे तेल के प्रकारों में से एक है। वैश्विक ऊर्जा व्यापार में ब्रेंट और दुबई क्रूड के साथ डब्ल्यूटीआई को दुनिया के तीन सबसे बड़े तेल बेंचमार्क में गिना जाता है। इस कच्चे तेल को इसके कम घनत्व और कम सल्फर मात्रा के कारण लाइट और स्वीट क्रूड भी कहा जाता है। यह उच्च गुणवत्ता वाला तेल माना जाता है, जिसे रिफाइनरियों में आसानी से पेट्रोल, डीजल और अन्य उत्पादों में बदला जा सकता है।
डब्ल्यूटीआई की निकासी मुख्य रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका में होती है और इसका प्रमुख वितरण केंद्र ओक्लाहोमा का कुशिंग हब है। कुशिंग को वैश्विक स्तर पर द पाइपलाइन क्रॉसरोड्स ऑफ द वर्ल्ड के नाम से जाना जाता है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार के लिए यह एक बुनियादी मानक है और समाचार माध्यमों में तेल की कीमतों का हवाला देते समय डब्ल्यूटीआई की दरों का प्रमुखता से उल्लेख किया जाता है।
कच्चे तेल की कीमतों को तय करने वाले कारक
वित्तीय और कमोडिटी बाजारों के अन्य संपत्तियों की तरह ही कच्चे तेल का भाव भी सीधे तौर पर मांग और आपूर्ति के संतुलन से तय होता है। जब वैश्विक आर्थिक विकास दर तेज होती है, तो उद्योगों और परिवहन क्षेत्र में ईंधन की खपत बढ़ती है, जिससे मांग में उछाल आता है। इसके विपरीत वैश्विक मंदी या धीमी विकास दर के दौरान ऊर्जा की मांग कमजोर पड़ती है और कीमतें गिरती हैं।
राजनीतिक अस्थिरता, क्षेत्रीय युद्ध और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध आपूर्ति श्रृंखला में बड़ा व्यवधान पैदा कर सकते हैं। जब भी आपूर्ति बाधित होने की आशंका पैदा होती है, तो कीमतों में तेजी आ जाती है। इसके अलावा कच्चे तेल का अंतरराष्ट्रीय व्यापार मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर की विनिमय दर भी तेल के भाव को गहराई से प्रभावित करती है। अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने पर अन्य मुद्रा धारकों के लिए कच्चा तेल सस्ता हो जाता है, जिससे मांग बढ़ती है, जबकि डॉलर के मजबूत होने पर तेल खरीदना महंगा हो जाता है।
ओपेक और ओपेक प्लस की रणनीतिक भूमिका
कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति और मूल्य नियंत्रण में पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन यानी ओपेक की भूमिका अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। ओपेक 12 प्रमुख तेल उत्पादक देशों का एक समूह है, जिसके सदस्य साल में दो बार होने वाली बैठकों में सामूहिक रूप से उत्पादन कोटा निर्धारित करते हैं। जब यह समूह उत्पादन कोटा घटाने का फैसला करता है, तो बाजार में आपूर्ति तंग हो जाती है और भाव बढ़ जाते हैं। वहीं उत्पादन बढ़ाने पर बाजार में अतिरिक्त तेल आने से कीमतें नीचे आ जाती हैं।
ओपेक के विस्तार के रूप में ओपेक प्लस अस्तित्व में आया, जिसमें संगठन के 12 सदस्यों के अलावा 10 गैर-ओपेक तेल उत्पादक देश भी शामिल हैं। इन गैर-ओपेक देशों में सबसे प्रमुख देश रूस है। यह विस्तारित समूह मिलकर दुनिया के तेल उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा नियंत्रित करता है और उनके नीतिगत फैसले वैश्विक ऊर्जा बाजार की दिशा तय करते हैं।
इन्वेंट्री रिपोर्ट्स और साप्ताहिक आंकड़ों का प्रभाव
अमेरिकी ऊर्जा बाजार में तेल के भंडारों में आने वाले बदलावों पर भी ट्रेडर्स बारीक नजर रखते हैं। अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट यानी एपीआई और अमेरिकी सरकारी संस्था एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन यानी ईआईए द्वारा हर हफ्ते जारी की जाने वाली इन्वेंट्री रिपोर्ट्स डब्ल्यूटीआई के भाव पर सीधा असर डालती हैं। भंडार में कमी आना बढ़ती मांग या घटती आपूर्ति का संकेत देता है, जिससे दाम बढ़ते हैं। वहीं भंडार में बढ़ोतरी कमजोर मांग या अतिरिक्त आपूर्ति को दर्शाती है, जिससे कीमतों पर दबाव बनता है।
एपीआई अपने आंकड़े हर मंगलवार को जारी करता है, जबकि ईआईए की रिपोर्ट उसके ठीक अगले दिन बुधवार को सामने आती है। आंकड़ों के लिहाज से दोनों संस्थाओं के नतीजे आमतौर पर एक-दूसरे से काफी मेल खाते हैं और लगभग 75% मामलों में दोनों के बीच का अंतर 1% के भीतर रहता है। हालांकि बाजार में ईआईए के आंकड़ों को अधिक विश्वसनीय और प्रामाणिक माना जाता है, क्योंकि यह एक आधिकारिक सरकारी एजेंसी है।
मुद्रा और अन्य वैश्विक संपत्तियों का रुख
ऊर्जा बाजार के साथ-साथ विदेशी मुद्रा और कीमती धातुओं के बाजार में भी मंगलवार को एशियाई सत्र में हलचल देखी गई। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.7100 के स्तर से ऊपर कारोबार करता नजर आया। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की असिस्टेंट गवर्नर सारा हंटर और गवर्नर मिशेल बुलक के सख्त बयानों ने मुद्रा को समर्थन दिया। हालांकि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और फेडरल रिजर्व के कड़े रुख के कारण अमेरिकी डॉलर में मजबूती बनी हुई है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बढ़त सीमित रह सकती है। इसके अलावा ट्रंप और शी के बीच सप्ताह के अंत में होने वाली शिखर वार्ता पर भी दुनिया भर की नजरें हैं।
यूएसडी/जेपीवाई की जोड़ी 157.50 के आसपास मामूली बढ़त के साथ कारोबार कर रही है, जहां संभावित सरकारी हस्तक्षेप की आशंका जापानी येन में बड़ी गिरावट को रोक रही है। बैंक ऑफ जापान ने अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में कदम उठाते हुए ब्याज दरों के लक्ष्य को 7-2 के बहुमत से 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है, जो 31 साल का उच्चतम स्तर है। वहीं सोने के बाजार में 4,350 डॉलर के आसपास संघर्ष की स्थिति बनी हुई है, जहां ऊंचे स्तरों पर बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है। डॉलर में ठहराव, ट्रेजरी यील्ड में गिरावट और न्यूट्रल आरएसआई के बीच सोने का तकनीकी ढांचा मिला-जुला नजर आ रहा है।


















