जुलाई की शुरुआत के बाद से मुद्रा बाजार में स्विस फ्रैंक पर लगातार दबाव देखा जा रहा है। यूरो और स्विस फ्रैंक की जोड़ी यानी EUR/CHF लगभग 0.92 के स्तर से लगातार मजबूत होते हुए 0.95 के दायरे के करीब पहुंच चुकी है। विदेशी मुद्रा बाजार में इस बदलाव के पीछे मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी और यूरोपीय सेंट्रल बैंक की तरफ से मौद्रिक सख्ती जारी रखने के बढ़ते कयास हैं। दूसरी ओर, स्विस नेशनल बैंक से उतनी आक्रामक सख्ती की उम्मीद बाजार नहीं लगा रहा है, जिससे दिसंबर के अंत तक दोनों केंद्रीय बैंकों के नीतिगत फैसलों के बीच का फासला दोगुने से भी अधिक हो गया है।
स्विस नेशनल बैंक का रुख और विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप
विदेशी मुद्रा विश्लेषक माइकल फिफ्स्टर के अनुसार, स्विस नेशनल बैंक यानी एसएनबी मौजूदा विनिमय दर में हो रहे इस बदलाव से काफी हद तक सहज नजर आ रहा है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान स्विस अधिकारियों ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि वे बढ़ती महंगाई पर ब्याज दरों में बदलाव के जरिए काबू पाते हैं, जबकि फ्रैंक की विनिमय दर में होने वाले भारी उतार-चढ़ाव को संभालने के लिए सीधे बाजार हस्तक्षेप और ब्याज दरों दोनों का सहारा लेते हैं। चार साल पहले जब आयातित महंगाई का भारी दबाव था, तब अधिकारियों ने फ्रैंक को कृत्रिम तौर पर मजबूत रखने के लिए भारी मात्रा में वित्तीय संसाधन झोंके थे।
हालांकि मौजूदा आर्थिक हालात चार साल पहले जैसे नहीं हैं। स्विट्जरलैंड में इस समय मुद्रास्फीति का स्तर काफी शांत और नियंत्रित बना हुआ है, इसलिए केंद्रीय बैंक के सामने अपनी मुद्रा को मजबूत करने के लिए बाजार में सीधे बड़े पैमाने पर हस्तक्षेप करने की कोई तात्कालिक मजबूरी नहीं दिख रही है। माइकल फिफ्स्टर का मानना है कि यूरोपीय क्षेत्र और स्विट्जरलैंड के बीच नीतिगत उम्मीदों का अंतर अब अपने चरम पर पहुंच रहा है और इससे अधिक फैलने की गुंजाइश सीमित है। यही वजह है कि EUR/CHF में आई हालिया बढ़त 0.95 के आसपास आकर सुस्त पड़ने के संकेत दे रही है।
एशियाई सत्र में प्रमुख वैश्विक मुद्राओं और बॉन्ड यील्ड की स्थिति
गुरुवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर यानी AUD/USD की जोड़ी कमजोर होकर 0.7000 के स्तर की तरफ फिसलती नजर आई। ऑस्ट्रेलिया के अगस्त माह के रोजगार आंकड़े सामने आने के बाद यह दबाव बढ़ा है, जहां बेरोजगारी दर अनुमानित 4.5 प्रतिशत के मुकाबले बढ़कर 4.6 प्रतिशत पर पहुंच गई। हालांकि रोजगार सृजन के आंकड़े अनुमान से बेहतर रहे और यह 39.5 हजार दर्ज किए गए। इसके साथ ही दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की होने वाली अहम बैठक को लेकर भी विदेशी मुद्रा व्यापारी सतर्क नजर आए।
उधर डॉलर और येन यानी USD/JPY की जोड़ी तीन सप्ताह के उच्च स्तर से पीछे हटते हुए एशियाई सत्र में 158.00 के आसपास नुकसान झेलती दिखी। जापान में सरकारी बॉन्ड की प्रतिफल दरों में हुई भारी वृद्धि और अधिकारियों द्वारा संभावित हस्तक्षेप की आशंका ने येन को सहारा दिया। वहीं दूसरी तरफ, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा सख्त रुख बनाए रखने के दांव और मजबूत अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के चलते अमेरिकी डॉलर ने रात भर की बढ़त को बनाए रखते हुए दो महीने के उच्च स्तर को थामे रखा।
बैंक ऑफ जापान की दर वृद्धि और अमेरिका-चीन व्यापार संघर्ष
बैंक ऑफ जापान ने अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने 7-2 के बहुमत से अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत करने का फैसला किया। बाजार पिछले कई हफ्तों से नीतिगत दरों में इस बढ़ोतरी का अनुमान लगा रहा था, इसलिए यह फैसला काफी हद तक उम्मीदों के अनुरूप रहा।
कमोडिटी बाजार में सोना एशियाई सत्र के दौरान एक सप्ताह के निचले स्तर के करीब सीमित दायरे में कारोबार करता रहा। बाजार भागीदार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली उच्च स्तरीय मुलाकात से पहले कोई बड़ा दांव लगाने से बचते दिखे। इस वार्ता से किसी क्रांतिकारी घोषणा की उम्मीदें तो बहुत कम हैं, लेकिन बाजार रेयर अर्थ खनिजों, तकनीकी पाबंदियों और मौजूदा व्यापार संघर्ष विराम के विस्तार पर बारीक नजर बनाए हुए है। इस बीच वाशिंगटन में एक अनिर्धारित बैठक के बाद अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट और चीन के उप प्रधानमंत्री हे लिफेंग के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते की समयसीमा को आगे बढ़ाने पर सहमति बन गई है। पहले यह व्यवस्था नवंबर में समाप्त होने वाली थी, जिसे अब बढ़ाकर 10 जनवरी तक जारी रखने का फैसला हुआ है।
















