जोवाई: जोवाई पॉलिटेक्निक इंस्टीट्यूट की तरफ से आयोजित तकनीकी प्रदर्शनी टेक्नोफिलिया 2 का मुख्य आकर्षण छात्रों द्वारा तैयार किए गए नए और रचनात्मक प्रोजेक्ट रहे। यह विशेष आयोजन संस्थान के रजत जयंती समारोह के सिलसिले में किया गया था, जिसका मकसद क्लासरूम की पढ़ाई को सीधे व्यावहारिक दुनिया की चुनौतियों से जोड़ना था। इस प्रदर्शनी के जरिए विद्यार्थियों को अपनी तकनीकी क्षमताओं और कौशल को खुलकर दिखाने का शानदार मौका मिला।
व्यावहारिक और कौशल-आधारित शिक्षा पर जोर
कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के कमिश्नर और सेक्रेटरी विजय कुमार मंत्री मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने अपने संबोधन में पारंपरिक किताबों वाली पढ़ाई से आगे बढ़कर व्यावहारिक और कौशल-केंद्रित शिक्षा अपनाने की पुरजोर वकालत की। उन्होंने शिक्षण संस्थानों से अपील की कि वे अपने शुरुआती शैक्षणिक चरणों से ही प्रयोगशाला के काम, वर्कशॉप और प्रोजेक्ट आधारित ट्रेनिंग को बढ़ावा दें।
उन्होंने यह भी कहा कि आज के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल प्लेटफॉर्म के प्रसार के कारण जानकारी पाना बहुत आसान हो गया है। ऐसे समय में असली महत्व इस बात का है कि किसी के पास व्यावहारिक समझ कितनी है और वह अपने ज्ञान का इस्तेमाल कैसे कर सकता है। इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि तकनीकी संस्थानों को अपनी पाठ्यचर्या यानी सिलेबस में लगातार बदलाव करने चाहिए ताकि वे तेजी से बदलती तकनीक और उद्योग जगत की उम्मीदों के साथ कदमताल कर सकें।
खास क्षेत्रों और नई तकनीकों पर फोकस
कार्यक्रम के दौरान ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग और टेक्सटाइल डिजाइन जैसे विषयों का विशेष उदाहरण दिया गया। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इस बात पर रोशनी डाली कि परिधान पैटर्न बनाने जैसे कामों में विशेष व्यावहारिक कौशल का होना कितना जरूरी है। इसके अलावा विद्यार्थियों को इलेक्ट्रिक वाहनों जैसी उभरती हुई तकनीकों को समझने के लिए प्रयोग करने और उनके प्रोटोटाइप विकसित करने के लिए भी प्रेरित किया गया।
वास्तु कला सहायक यानी आर्किटेक्चरल असिस्टेंटशिप के संबंध में यह सुझाव दिया गया कि निर्माण की ऐसी डिजाइन तैयार की जानी चाहिए जो स्थानीय भूगोल और मौसम के मिजाज को ध्यान में रखते हुए पारंपरिक सुंदरता और आधुनिक जरूरतों का बेहतरीन मेल पेश करें। मेघालय राज्य के संदर्भ में यह बात विशेष रूप से रेखांकित की गई कि यहां होने वाली भारी बारिश के कारण ढलान वाली छतों और पानी की निकासी की मजबूत व्यवस्था का होना बेहद जरूरी है ताकि दीवारों में सीलन और नमी की समस्या से बचा जा सके।
उद्योग जगत के साथ मजबूत सहयोग की जरूरत
शिक्षा संस्थानों और उद्योगों के बीच आपसी तालमेल को मजबूत करने की दिशा में भी कई अहम बातें रखी गईं। मुख्य अतिथि ने जोवाई पॉलिटेक्निक को आंतरिक राजस्व सृजन नीति के तहत कंसल्टेंसी और बुनियादी ढांचे के डिजाइन से जुड़े अवसरों को तलाशने की सलाह दी। उन्होंने डिप्टी कमिश्नर के कार्यालय के साथ मिलकर ऐसे प्रोजेक्ट्स की पहचान करने का सुझाव दिया जिनमें शिक्षक और छात्र दोनों मिलकर अपना योगदान दे सकें।
उच्च और तकनीकी शिक्षा निदेशालय के संयुक्त निदेशक एफ.बी.एस. रामसिएज ने संस्थान को 25 साल पूरे होने पर बधाई दी और इस सफर में योगदान देने वाले सभी पूर्व व वर्तमान प्राध्यापकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और पूर्व छात्रों के योगदान को सराहा। उन्होंने प्रयोगशालाओं के आधुनिकीकरण, शैक्षणिक सुविधाओं को बेहतर बनाने और संस्थान को तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता का केंद्र बनाने के संकल्प को दोहराया।
उच्च और तकनीकी शिक्षा निदेशालय के उप निदेशक एफ. रुमनोंग ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत व्यावसायिक और बहु-विषयक शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने तकनीकी और सामान्य शिक्षण संस्थानों के बीच संसाधनों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए एक हब-एंड-स्पोक मॉडल का प्रस्ताव रखा, जिससे वास्तुकला, ऑटोमोबाइल और गारमेंट टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में साझा शिक्षा को बढ़ावा मिल सके।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में मुख्य अतिथि ने प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और विभिन्न स्टॉल पर जाकर विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए प्रोजेक्ट्स और उनके नए विचारों को बहुत करीब से देखा व समझा। इस दौरान उनके साथ निदेशालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे जिन्होंने छात्रों की इस रचनात्मक पहल की सराहना की।



















