बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक विजयादशमी के पर्व पर देश के कई हिस्सों में प्राचीन परंपरा के अनुसार शस्त्र पूजन किया गया। गुजरात के जामनगर से लेकर मध्य प्रदेश के छतरपुर और जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ तक पुलिस बलों और राजपूत समुदाय के लोगों ने अपने हथियारों की वंदना कर धर्म और संस्कृति की रक्षा का संदेश दिया। इस अवसर पर कई दिग्गज नेता और अधिकारी भी पारंपरिक अनुष्ठानों में शामिल हुए।
जामनगर में रिवाबा जडेजा ने की पिस्तौल की पूजा
गुजरात के जामनगर राजपूत युवा संघ की तरफ से एक पारंपरिक शस्त्र पूजन समारोह का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में राज्य की शिक्षा राज्य मंत्री रिवाबा जडेजा ने भी शिरकत की और अपनी रिवॉल्वर के आगे हाथ जोड़कर पूजा-अर्चना की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति, गौरव और गौरवशाली परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है। उन्होंने यह भी कहा कि क्षत्रिय समाज ने हमेशा राष्ट्र हित को प्राथमिकता दी है और यह हमारी जिम्मेदारी है कि आने वाली पीढ़ी संस्कारों से जुड़ी शिक्षा प्राप्त करे और देश के विकास में अपना योगदान दे।
राजकोट और किश्तवाड़ में भी हुआ शस्त्र पूजन
राजकोट के पुलिस मुख्यालय में भी दशहरे के मौके पर विशेष शस्त्र पूजा का आयोजन किया गया। यह अनुष्ठान पुलिस कमिश्नर ब्रजेश झा और जेसीपी चैतन्य मंडलिक की उपस्थिति में संपन्न हुआ। कमिश्नर झा ने कहा कि नवरात्रि का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ है और आज शाम रावण दहन के साथ समाज की बुराइयों का भी अंत होना चाहिए। दूसरी तरफ, जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में आरएसएस की ओर से शस्त्र पूजन का कार्यक्रम रखा गया, जहां बीवीएम हायर सेकेंडरी स्कूल से लेकर शहर के मुख्य बाजार तक एक भव्य रैली निकाली गई।
छतरपुर पुलिस लाइन्स में भी निभाई गई परंपरा
मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित पुलिस लाइन्स में भी विजयादशमी के अवसर पर शस्त्रों की पूजा की गई। इस पारंपरिक कार्यक्रम में राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार के साथ-साथ कई विधायक, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। जानकारों के अनुसार, शस्त्र पूजा हिंदू धर्म का एक ऐसा पारंपरिक अनुष्ठान है जो हथियारों और कर्तव्य के साधनों का सम्मान करता है, और यह आयोजन विजयादशमी या महानवमी के दिन विधि-विधान से पूरा किया जाता है।
















