उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुए सनसनीखेज हत्याकांड में अदालत ने फैसला सुनाते हुए मुख्य अभियुक्त मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला उर्फ मोहित को फांसी की सजा सुनाई है। यह खौफनाक मामला मार्च 2025 में सामने आया था, जब घर के भीतर रखे एक नीले प्लास्टिक के ड्रम में कंक्रीट और सीमेंट के बीच दबी हुई सौरभ राजपूत की क्षत-विक्षत लाश बरामद हुई थी। पुलिस जांच और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने 30 सितंबर 2026 को दोनों को हत्या व सबूत मिटाने का दोषी ठहराया था, जिसके बाद 14 अक्टूबर 2026 को दोनों को मौत की सजा और जुर्माने का आदेश सुनाया गया। अदालत ने हत्या के जुर्म में दोनों पर पचास-पचास हजार रुपये तथा सबूत छिपाने के अपराध में बीस-बीस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
बचपन के प्यार से भागकर की थी शादी
इस पूरे मामले की जड़ें कई साल पुरानी हैं। मुस्कान रस्तोगी जब करीब ग्यारह वर्ष की थी, तब 2011-2012 के दौरान उसकी जान-पहचान सौरभ राजपूत से हुई थी। मुस्कान उस समय ब्रह्मपुरी में अपने नाना के पास रहती थी, जो स्थानीय स्तर पर ज्योतिष का काम करते थे। सौरभ अपनी मां के साथ अक्सर कुंडली दिखाने वहां आया करता था। यहीं से दोनों के बीच जान-पहचान बढ़ी जो आगे चलकर प्रेम प्रसंग में तब्दील हो गई। दोनों के परिवारों ने इस रिश्ते का कड़ा विरोध किया। विरोध के चलते दोनों ने कई बार घर से भागने की कोशिश भी की।
साल 2016 में जब मुस्कान कक्षा नौ में पढ़ती थी, तब वह दोबारा सौरभ के साथ चली गई थी। उस वक्त मुस्कान की मां कविता ने थाने पहुंचकर नाबालिग बेटी के अपहरण का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। दोनों परिवारों के बीच इस बात पर सहमति बनी थी कि मुस्कान के 18 वर्ष का होने के बाद ही दोनों का विवाह कराया जाएगा। मुस्कान की मां कविता के अनुसार, एक बार दोपहर में मुस्कान घर से निकली और दो दिनों तक नहीं लौटी। पुलिस ने दो दिन बाद दोनों को खोज निकाला और घर वापस पहुंचाया। परिजनों ने मुस्कान को समझाने का प्रयास किया कि सौरभ भले ही उससे प्रेम करता हो, लेकिन उसका परिवार उसे कभी स्वीकार नहीं करेगा। परिजनों के समझाने के बावजूद दोनों एक-दूसरे से अलग होने को तैयार नहीं थे।
आखिरकार जब दोनों 18 वर्ष के हुए, तब मुस्कान सुबह पांच बजे परिजनों के सोते समय घर से निकल गई। इसके बाद दोनों ने शादी कर ली। शादी होते ही सौरभ के परिजनों ने उसे घर से निकाल दिया, जिसके बाद पति-पत्नी किराए के मकान में रहने लगे। सौरभ ने मुस्कान की खातिर अपना घर छोड़ दिया था, जिससे धीरे-धीरे मुस्कान के मायके वालों का भरोसा उस पर जम गया। कोविड-19 महामारी के दौरान जब सौरभ की नौकरी छूटी, तब मुस्कान के मायके वालों ने दोनों की आर्थिक मदद भी की थी।
स्कूल के पुराने साथी की वापसी और बढ़ता फासला
शादी के बाद सौरभ मर्चेंट नेवी में काम करने लगा और लंदन चला गया। इसी दौरान मुस्कान की जिंदगी में साहिल शुक्ला की दोबारा एंट्री हुई। साहिल और मुस्कान ब्रह्मपुरी स्थित विवेकानंद स्कूल में आठवीं कक्षा तक साथ पढ़े थे। दोनों स्कूल के दिनों में दोस्त थे, लेकिन बाद में संपर्क टूट गया था। साल 2019 में स्कूल के एक वॉट्सऐप ग्रुप के जरिए साहिल ने मुस्कान से दोबारा संपर्क साधा। उस वक्त सौरभ विदेश में था।
सौरभ की शराब पीने की आदत से मुस्कान परेशान रहती थी। साहिल से बातचीत शुरू होने के बाद दोनों करीब आने लगे। साहिल मुस्कान के साथ संबंध बढ़ाने लगा और उसे नशा कराने लगा। इस दौरान मुस्कान की छह साल की बेटी पीहू अधिकतर समय अपने ननिहाल में रहती थी, जिससे मुस्कान को साहिल के साथ वक्त बिताने का मौका मिल जाता था। मुस्कान साहिल को अपने घर भी बुलाने लगी, जबकि परिवार इस रिश्ते से पूरी तरह बेखबर था। बाद में सौरभ को इस प्रेम प्रसंग की भनक लग गई। सौरभ फरवरी 2025 में लंदन से मेरठ वापस लौटा था।
3 मार्च की रात: नशीली दवा, धारदार हथियार और नीले ड्रम का खौफनाक राज
अभियोजन पक्ष के अनुसार, कत्ल की साजिश 3 मार्च 2025 की रात को अंजाम दी गई। मुस्कान ने रात के खाने में सौरभ को नशीला पदार्थ मिलाकर खिला दिया। सौरभ के बेहोश होते ही साहिल घर पहुंच गया। इसके बाद दोनों ने धारदार हथियारों से सौरभ पर हमला कर उसकी हत्या कर दी। हत्या करने के बाद आरोपियों ने शव के कई टुकड़े किए और उसे एक नीले रंग के प्लास्टिक ड्रम के अंदर डाल दिया। शव की बदबू दबाने और सबूत मिटाने के लिए ड्रम के भीतर सीमेंट, रेत और पानी का घोल भरकर उसे पूरी तरह सील कर दिया गया।
वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों आरोपी हिमाचल प्रदेश के शिमला-मनाली क्षेत्र की ओर भाग गए। जांच में यह भी सामने आया कि मुस्कान ने सौरभ के मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए उसके परिजनों को संदेश भेजे, ताकि परिवार को लगे कि सौरभ जिंदा है और काम के सिलसिले में बाहर गया हुआ है।
ऐसे खुला राज: 'पापा ड्रम में हैं'
सौरभ से कई दिनों तक संपर्क न हो पाने पर उसके परिजनों को अनहोनी की आशंका हुई। 17 मार्च 2025 को सौरभ के रिश्तेदार स्थानीय प्रशासन और पुलिस के साथ घर पहुंचे। तलाशी के दौरान कमरे में सीमेंट से भरा हुआ नीला प्लास्टिक ड्रम दिखाई दिया। जब पुलिस ने ड्रम को तोड़ा, तो उसके अंदर से सौरभ के शव के अवशेष बरामद हुए। इसके बाद सौरभ के भाई की तहरीर पर मुकदमा दर्ज हुआ और पुलिस ने 18 मार्च 2025 को मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार कर लिया।
सौरभ की मां रेनू देवी ने बताया कि छह साल की बेटी पीहू पड़ोसियों से बार-बार यही कह रही थी कि 'पापा ड्रम में हैं'। बच्ची की इस बात ने मामले में कई सवाल खड़े किए कि घटना के समय उसने क्या देखा था। मकान मालिक ने जब कमरे की मरम्मत के लिए मजदूरों को भेजा था, तब मजदूर उस भारी ड्रम को हिला भी नहीं पाए थे। उस समय मुस्कान ने मजदूरों से कहा था कि ड्रम में कबाड़ भरा हुआ है।
अदालत में साक्ष्यों की कड़ी और 126 सुनवाइयां
इस हत्याकांड का कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं था। अभियोजन ने पूरी तरह परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की मजबूत कड़ी के सहारे अदालत में केस साबित किया। नीला ड्रम, सीमेंट, रेत और धारदार औजार बेचने वाले दुकानदार इस मामले में अहम गवाह बने। पुलिस ने इन सामानों की खरीद को सीधे शव छिपाने की साजिश से जोड़ा। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने भी साबित किया कि मौत धारदार हथियार के वार से हुई थी।
कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मोबाइल टावर की लोकेशन ने साबित किया कि वारदात के वक्त साहिल उसी घर में मौजूद था। दोनों आरोपियों के हिमाचल प्रदेश में ठहरने और यात्रा से जुड़े होटलों के रिकॉर्ड भी जुटाए गए। पुलिस ने करीब 1,000 पन्नों से अधिक का आरोप पत्र अदालत में पेश किया था। मुकदमे के दौरान कुल 22 गवाहों के बयान दर्ज किए गए और 126 तारीखों पर सुनवाई हुई। बचाव पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शी न होने की दलील दी, लेकिन अदालत ने हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोपों को पूरी तरह सही माना।
फैसले के बाद मां का सवाल और आगे की कानूनी राह
अदालत के फैसले के बाद सौरभ की मां रेनू राजपूत ने कहा कि अदालत ने मुस्कान को दोषी तो मान लिया, लेकिन उनके मन में एक ही सवाल है कि उसने उनके बेटे को क्यों मारा। फैसले के वक्त न्यायाधीश ने सजा की व्याख्या करते हुए महाभारत और धर्म के संदर्भ का उल्लेख किया।
हालांकि मृत्युदंड के नियम के अनुसार, फांसी की सजा को तुरंत अमल में नहीं लाया जा सकता। कानूनी प्रक्रिया के तहत इस सजा की पुष्टि के लिए मामला उच्च न्यायालय भेजा जाता है। दोनों अभियुक्त इलाहाबाद उच्च न्यायालय में इस फैसले के खिलाफ अपील दाखिल करने की तैयारी में हैं। उच्च न्यायालय पूरे मामले के रिकॉर्ड की समीक्षा करने के बाद सजा को बरकरार रखने, बदलने या रद्द करने पर फैसला करेगा।
जेल में जन्मी दूसरी बेटी की जिम्मेदारी को लेकर असमंजस
इस पूरे मामले में एक और पेचीदा पहलू मुस्कान की छोटी बेटी राधा से जुड़ा है। राधा का जन्म 24 नवंबर 2025 को जेल के भीतर हुआ था और वह फिलहाल मेरठ जिला जेल में मुस्कान के साथ रह रही है। सौरभ के परिजनों ने बच्ची को अपनाने से साफ इनकार कर दिया है। सौरभ की मां रेनू देवी ने बच्ची के पितृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा है कि उनका उससे कोई संबंध नहीं है। हालांकि इस संबंध में किसी डीएनए टेस्ट की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पहले सौरभ के भाई ने डीएनए जांच में पुष्टि होने पर बच्ची को अपनाने की बात कही थी, लेकिन बाद में परिवार ने जिम्मेदारी लेने से मना कर दिया।
मुस्कान के मायके वालों ने भी बच्ची का पालन-पोषण करने में असमर्थता जताई है। इस बीच मुंबई के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर फैजान अंसारी ने 22 अक्टूबर 2026 के आसपास मेरठ की अदालत में अर्जी देकर राधा की परवरिश, शिक्षा और इलाज का पूरा खर्च उठाने की पेशकश की। उन्होंने अपनी आर्थिक क्षमता की जांच कराने की बात भी कही है। जिला शासकीय अधिवक्ता केके चौबे के मुताबिक, केवल अर्जी देने से किसी को संरक्षण नहीं मिल सकता; इसमें मां की सहमति और कानूनी प्रावधानों को देखा जाएगा। 23 अक्टूबर 2026 तक बच्ची के भविष्य को लेकर कोई अंतिम कानूनी फैसला नहीं हुआ था। बड़ी बेटी पीहू फिलहाल अपने ननिहाल में है, जिसे लेकर भी दोनों परिवारों के बीच स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।



















