शिलांग में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है, जहां भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पिन्थोरुमखराह विधानसभा क्षेत्र से विधायक एएल हेक ने मंगलवार को एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आठ यूडीपी विधायकों द्वारा जो मुद्दे उठाए गए हैं और जिनके जरिए पार्टी में संभावित विलय की बात चल रही है, वे दरअसल वे ही मांगें हैं जिन्हें उनकी अपनी पार्टी भी बीते कई वर्षों से लगातार आगे बढ़ा रही है।
एएल हेक ने स्पष्ट किया कि यूडीपी विधायकों की तरफ से उठाई गई चिंताएं सीधे तौर पर मेघालय राज्य और वहां की मूल निवासी आबादी के हितों से जुड़ी हुई हैं। इसी वजह से उन्होंने इन मांगों के प्रति अपना पूरा समर्थन जाहिर किया है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि राज्य और स्थानीय मूल निवासियों के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए वे इन तमाम मुद्दों की सराहना करते हैं और उनकी पार्टी ने भी इन्हें पहले से ही लागू कराने के प्रयास किए हैं।
इनर लाइन परमिट और सुरक्षा अधिनियम पर रुख
मेघालय राज्य में इनर लाइन परमिट यानी आईएलपी प्रणाली को लागू करने की मांग पर चर्चा करते हुए एएल हेक ने सुझाव दिया कि यदि मौजूदा समय में आईएलपी को तुरंत लागू करना संभव नहीं हो पा रहा है, तो सरकार वैकल्पिक रूप से मेघालय रेजिडेंट्स सेफ्टी एंड सिक्योरिटी एक्ट यानी एमआरएसएसए को आगे बढ़ा सकती है। उन्होंने कहा कि यदि तत्काल प्रभाव से आईएलपी देना मुमकिन नहीं है, तो एमआरएसएसए को लागू किया जा सकता है जिसे अभी बिना किसी परेशानी के पूरा किया जा सकता है।
खासी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने का समर्थन
भाजपा नेता ने खासी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग का भी पूरी मजबूती से समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव के मार्ग में उन्हें किसी भी तरह की कोई बाधा नजर नहीं आती है। उनके मुताबिक खासी भाषा के साथ कोई समस्या नहीं है, यह पूरी तरह से योग्य है और इसे मान्यता दिलाने के लिए कैबिनेट तथा सदन में प्रस्ताव पास किया जा सकता है।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि केवल यूडीपी ही नहीं बल्कि भारतीय जनता पार्टी भी इस मांग को लेकर लंबे समय से पैरवी करती आ रही है। उन्होंने कहा कि इस मांग को किसी एक दल विशेष की मांग के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए क्योंकि भाजपा की ओर से भी इसे लागू करवाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
कोयला खनन मामले पर अदालत का हवाला
हालांकि, मेघालय में कोयला खनन से जुड़ी मांगों के संदर्भ में एएल हेक ने किसी भी तरह की टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने इसके पीछे का कारण बताते हुए कहा कि यह मामला वर्तमान में न्यायालय के विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि चूंकि यह विषय अदालत में पेंडिंग है और सबज्यूडिसे है, इसलिए इस पर कुछ भी बोलना उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है और वे इस समय इस पर कोई बयान नहीं दे सकते हैं।



















