आतंकी मसूद अजहर पर इनाम की राशि में बढ़ोतरी करने के पाकिस्तानी प्रशासन के कदम पर भारत ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस फैसले को वैश्विक समुदाय को भ्रमित करने का एक पाखंडी प्रयास करार दिया है। उनका स्पष्ट कहना है कि पाकिस्तान की तरफ से प्रायोजित आतंकवाद जगजाहिर है, इसलिए महज कागजी आदेश जारी करने या दिखावटी घोषणाएं करने से कोई ठोस बदलाव नहीं आने वाला है। भारत की दो टूक मांग है कि पाकिस्तान बहानेबाजी का दौर खत्म करे और मसूद अजहर के खिलाफ तत्काल प्रभाव से कठोर कानूनी कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार करे।
ब्रिक्स सम्मेलन और घरेलू राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर रुख
हाल ही में संपन्न हुए ब्रिक्स सम्मेलन में कांग्रेस पार्टी के शासन वाले राज्यों के मुख्यमंत्रियों के अनुपस्थित रहने के सवाल पर भी विदेश मंत्रालय ने अपनी स्थिति बिल्कुल स्पष्ट कर दी है। मंत्रालय ने दो टूक शब्दों में कहा है कि इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिए देश के सभी संबंधित पक्षों और नेताओं को विधिवत निमंत्रण भेजा गया था। अब अगर वे इस बड़े कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बने हैं, तो इसके कारणों को लेकर सवाल उन्हीं से पूछा जाना चाहिए।
चीन के साथ कूटनीतिक बातचीत और क्षेत्रीय संवेदनशीलता
पड़ोसी देश चीन के साथ हाल ही में हुई कूटनीतिक वार्ताओं और कांग्रेस नेता जयराम रमेश द्वारा उठाए गए विभिन्न प्रश्नों के संदर्भ में प्रवक्ता ने जानकारी दी कि इस संबंध में आधिकारिक प्रेस रिलीज पहले ही जारी की जा चुकी है। दोनों पक्षों के बीच हुई इस उच्चस्तरीय चर्चा के दौरान ताइवान और तिब्बत से जुड़े संवेदनशील भू-राजनीतिक मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए गए। भारत ने इन तमाम मसलों पर अपनी गहरी चिंताओं को अत्यंत दृढ़ता के साथ ड्रैगन के सामने रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह बात पूरी तरह साफ कर दी है कि द्विपक्षीय संबंध केवल आपसी सम्मान, पारस्परिक हितों और एक-दूसरे की रणनीतिक संवेदनशीलता के आधार पर ही आगे बढ़ सकते हैं। इसके अलावा, विवादास्पद उपदेशक जाकिर नाइक का गंभीर मुद्दा भी मलेशियाई सरकार के समक्ष लगातार उठाया जा रहा है।
लाल सागर में हूती विद्रोहियों के हमलों पर भारत की चिंता
लाल सागर के समुद्री क्षेत्र में मालवाहक जहाजों पर लगातार हो रहे हूती हमलों को भारत ने पूरी तरह अस्वीकार्य और खतरनाक करार दिया है। इन निरंतर हमलों की वजह से इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर शांति और स्थिरता का भारी संकट पैदा हो गया है। वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाए जाने के बाद संकट के समय में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने में मदद के लिए ओमान सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया गया है। साथ ही, इस पूरी घटना के दौरान एक लापता हुए भारतीय नागरिक की खोजबीन और बचाव अभियान अभी भी युद्धस्तर पर जारी है।



















