मेघालय की सत्ताधारी मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस यानी एमडीए सरकार में हाल में हुए मंत्रिमंडल फेरबदल के बाद आंतरिक असंतोष उभरकर सामने आ गया है। राज्य सरकार में काबीना मंत्री और बीजेपी विधायक दल के नेता सनबोर शुलाई ने विभागों के नए वितरण और मंत्रियों के चयन को लेकर खुली नाराजगी जाहिर की है। उनका तर्क है कि 60 सदस्यीय विधानसभा में 10 विधायकों के साथ बीजेपी गठबंधन की दूसरी सबसे बड़ी ताकत है, इसलिए सरकार में उसकी हिस्सेदारी को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
मंत्रिमंडल में संख्याबल के मुताबिक प्रतिनिधित्व की मांग
एक प्रेस बयान के जरिए अपनी बात रखते हुए सनबोर शुलाई ने कहा कि विधानसभा में विधायकों की संख्या को देखते हुए बीजेपी को मंत्रिमंडल में और जगह मिलनी चाहिए थी। उन्होंने साफ किया कि यूडीपी के पूर्व अध्यक्ष और मंत्री मेटबाह लिंगदोह के इस्तीफे के बाद खाली हुए स्थान को लेकर यह मामला मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा के समक्ष भी उठाया गया था। बीजेपी नेता ने यह स्पष्ट किया कि एनपीपी के किसी भी विधायक को मंत्री बनाए जाने पर उनकी पार्टी को कोई एतराज नहीं है। हालांकि उनका कहना था कि जब नए मंत्री तय किए जा रहे हों या विभागों का आवंटन हो रहा हो, तब गठबंधन के भीतर बीजेपी की मौजूदा ताकत और भूमिका को ध्यान में रखा जाना बेहद जरूरी था।
गठबंधन धर्म और पुराने सहयोग की याद
सनबोर शुलाई ने 2023 के राजनीतिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए याद दिलाया कि उस समय जब कई राजनीतिक दल एनपीपी के बिना सरकार बनाने की कोशिशों में लगे थे, तब बीजेपी मजबूती के साथ एनपीपी के समर्थन में खड़ी रही थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि केंद्र में मौजूद बीजेपी और पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व एमडीए सरकार को लगातार हर जरूरी मदद और सहयोग मुहैया करा रहा है। इसके बावजूद राज्य स्तर पर एनपीपी नेतृत्व द्वारा बीजेपी विधायकों को दरकिनार किया जाना गठबंधन की सेहत के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जा सकता।
सहयोग की भावना और केंद्रीय नेतृत्व से संपर्क
विधायकों की इस अनदेखी को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए शुलाई ने चेतावनी दी कि ऐसा रवैया सहयोगी दलों के बीच आपसी तालमेल और सहयोग की भावना को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विवाद केवल मंत्री पदों की गिनती तक सीमित नहीं है, बल्कि गठबंधन के साझेदारों के बीच आपसी सम्मान, नियमित बातचीत और बेहतर समन्वय का विषय है। इसी सिलसिले में बीजेपी विधायकों ने बुधवार को पार्टी के पूर्वोत्तर सह-प्रभारी राजीव बब्बर से मुलाकात कर ताजा हालात की जानकारी दी और फेरबदल के दौरान पार्टी के साथ हुए बर्ताव पर अपनी चिंताएं साझा कीं। शुलाई ने बताया कि इस विषय पर कोई भी अंतिम कदम उठाने से पहले केंद्रीय नेतृत्व से गहन चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही पार्टी के निर्देशों के तहत वे मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्रियों से व्यक्तिगत रूप से मिल चुके हैं और सभी बीजेपी विधायकों के साथ मुख्यमंत्री की साझा बैठक बुलाने का अनुरोध किया है, ताकि बातचीत के जरिए इस गतिरोध को समय रहते सुलझाया जा सके।



















