शिलांग में आयोजित सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय के दूसरे वार्षिक सम्मेलन में सरकारी सूचना तंत्र को चुस्त-दुरुस्त बनाने और मीडिया के साथ संवाद को नया रूप देने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। स्टेट गेस्ट हाउस में आयोजित डीआईपीआर कॉन्क्लेव 2026 का मुख्य विषय सूचना सेवा को अधिक उत्तरदायी, परस्पर जुड़ा हुआ और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार बनाना था। इस बैठक में सरकारी प्रतिनिधियों और मीडिया जगत के प्रमुख लोगों ने एक मंच पर आकर प्रामाणिक सूचनाओं के सुचारू प्रवाह पर विस्तार से चर्चा की।
सटीक जानकारी से ही रुकेगा भ्रामक सूचनाओं का असर
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री लहकमेन रिम्बुई ने सरकारी तंत्र और प्रिंट मीडिया के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि नागरिकों तक तथ्यपरक जानकारी पहुंचाना बेहद जरूरी है ताकि लोग सही खबर और भ्रामक प्रचार में फर्क कर सकें। इसके साथ ही उन्होंने विभागीय अधिकारियों से अपील की कि वे जनसंवाद के लिए आधुनिक और नवाचारी तरीकों का इस्तेमाल करें, क्योंकि सरकार के पास सूचनाओं के प्रभावी प्रसार के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर सतर्कता बरतने की सलाह देते हुए लोगों में जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया।
न्यूज़रूम एकीकरण और डिजिटल नेटवर्क पर विशेष सत्र
इस सम्मेलन के दौरान कुल पांच अलग-अलग तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इनमें न्यूज़रूम का एकीकरण, डिजिटल पहुंच का विस्तार, मीडिया संबंध, संस्थागत क्षमता निर्माण और हितधारकों की भागीदारी जैसे विषय शामिल थे। वन डीआईपीआर न्यूज़रूम सत्र में यह मंथन किया गया कि किस प्रकार समाचार जुटाने और उसे साझा करने की प्रक्रिया को केंद्रीय स्तर पर जोड़ा जाए। एबीसी डाइजेस्ट की टीम ने एक विकेंद्रीकृत चैनल नेटवर्क के माध्यम से डिजिटल पहुंच बढ़ाने की योजना प्रस्तुत की। वहीं मेघालय क्रॉनिकल की टीम ने मीडिया संबंधों, आपात प्रतिक्रिया तंत्र और सार्वजनिक संचार नीति के पहलुओं को सामने रखा। विभाग की भविष्य की कार्ययोजना तय करने के साथ ही शिलांग प्रेस क्लब और मेघालय एडिटर्स एंड पब्लिशर्स एसोसिएशन के साथ विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।
पत्रकारों के लिए कल्याणकारी योजनाएं और सहयोग
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के आयुक्त एवं सचिव विजय मंत्री ने मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताते हुए स्पष्ट और सुलभ संवाद को अनिवार्य बताया। उन्होंने पारंपरिक मीडिया को सहयोग देने और गलत सूचनाओं को रोकने में विभाग की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने वरिष्ठ और सेवानिवृत्त पत्रकारों के लिए पेंशन के प्रावधान, जर्नलिस्ट वेलफेयर स्कीम 2024 और जर्नलिस्ट वेलफेयर फंड जैसी पहलों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य में मीडिया घरानों के सामने आने वाली चुनौतियों को समझना और एक मजबूत तथ्य जांच प्रणाली स्थापित करना समय की मांग है।
प्रेस संगठनों की ओर से आए सुझाव
शिलांग प्रेस क्लब के महासचिव डोमिनिक सैवियो डेंगदोह, जो टी7 न्यूज़ में निर्माता भी हैं, ने सरकारी सूचनाओं तक आसान पहुंच की वकालत की। उन्होंने नियमित प्रेस ब्रीफिंग आयोजित करने और पत्रकारों के सवालों के समय पर जवाब देने का आग्रह किया। इसके अलावा उन्होंने शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के पत्रकारों के लिए निरंतर प्रशिक्षण और दूरदराज के इलाकों में कार्यरत संवाददाताओं को बेहतर कल्याणकारी सहयोग उपलब्ध कराने की मांग उठाई।
मेघालय टाइम्स की प्रबंध संपादक और मेपा की कोषाध्यक्ष देईमेबंदा ब्लाह ने विभाग से बदलते मीडिया परिदृश्य के अनुसार खुद को ढालने का आग्रह किया। उन्होंने जिला स्तर पर संवाद तंत्र को सुधारने, सरकारी विज्ञप्तियों के लिए एक केंद्रीकृत पोर्टल बनाने, नियमित ब्रीफिंग आयोजित करने और विभाग के भीतर एक समर्पित फैक्ट-चेकिंग सेल स्थापित करने का ठोस प्रस्ताव रखा। उन्होंने मीडिया संस्थानों और विभाग के बीच संयुक्त कार्यशालाएं आयोजित करने पर भी जोर दिया।
सम्मेलन में पारित इन संकल्पों का उद्देश्य विभाग की कार्यप्रणाली में आंतरिक समन्वय बढ़ाना और जनता तक प्रामाणिक जानकारी पहुंचाना है। इससे पहले इस सम्मेलन का पहला संस्करण 5 मार्च 2025 को आयोजित किया गया था, जिसके बाद से लगातार सूचना तंत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में काम चल रहा है।





















