मेघालय में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और शिक्षकों के कौशल को नया रूप देने के लिए एक अहम कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने भारती एयरटेल फाउंडेशन के साथ मिलकर शिक्षक प्रशिक्षण और पेशेवर विकास को मजबूत करने के लिए एक रणनीतिक समझौता किया है। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब राज्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (एनईपी) को जमीनी स्तर पर पूरी तरह लागू करने से जुड़ी कई व्यवहारिक चुनौतियों से जूझ रहा है।
समझौते का मुख्य मकसद और सहयोगी संस्थान
शिक्षा विभाग और शिक्षा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण निदेशालय (डीईआरटी) के जरिए शुक्रवार को इस औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझीदारी का मुख्य केंद्र मेघालय शिक्षक प्रशिक्षण अकादमी (एमटीटीए) को साधन संपन्न बनाना है। इसके माध्यम से पूरे राज्य के शिक्षकों को आधुनिक शैक्षणिक पद्धतियों, कक्षा संचालन के नए तरीकों और डिजिटल शिक्षण टूल्स से प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वे छात्र-छात्राओं की बदलती जरूरतों के अनुसार खुद को ढाल सकें।
यह कार्यक्रम शिक्षकों के निरंतर व्यावसायिक विकास, तकनीकी साधनों के सुगम इस्तेमाल और नए क्लासरूम प्रयोगों को बढ़ावा देने पर केंद्रित रहेगा। राज्य स्तर पर संस्थागत क्षमता निर्माण के जरिए यह सुनिश्चित करने की तैयारी है कि सुदूर क्षेत्रों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को भी समय पर जरूरी मार्गदर्शन मिल सके।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सामने मौजूद चुनौतियां
मेघालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को पूरी तरह उतारने की राह में कई जमीनी रुकावटें हैं। इनमें प्रमुख रूप से शिक्षकों की कमी, बुनियादी संसाधनों का अभाव, भाषाई विविधता और शैक्षणिक सुविधाओं का असमान वितरण शामिल हैं। इन्हीं संवेदनशील मुद्दों पर विस्तार से विचार करने के लिए डीईआरटी ने शुक्रवार को शिलांग में एक राज्य स्तरीय संगोष्ठी का आयोजन किया, जिसका विषय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन से जुड़ी समस्याओं, चुनौतियों और आगे की राह पर केंद्रित था।
संगोष्ठी में बोलते हुए शिक्षा मंत्री लहकमेन रिम्बुई ने कहा कि राज्य भर में शिक्षा का स्तर उठाने के लिए सभी स्तरों पर समन्वित प्रयासों और व्यावहारिक उपायों की दरकार है। उन्होंने अलग-अलग प्रबंधन व्यवस्थाओं के तहत चलने वाले स्कूलों के बीच साझा संसाधनों के तालमेल की कमी, निजी कोचिंग पर बच्चों की बढ़ती निर्भरता और कक्षा में तकनीक के प्रभावी उपयोग से जुड़ी जटिलताओं की ओर ध्यान दिलाया।
भाषाई विविधता और आधुनिक शिक्षण की जरूरत
लहकमेन रिम्बुई ने राज्य की भाषाई विविधता को रेखांकित करते हुए बताया कि तीन-भाषा फॉर्मूले को लागू करने में व्यवहारिक मुश्किलें आ रही हैं, क्योंकि अलग-अलग शिक्षण माध्यमों में योग्य शिक्षकों की उपलब्धता एक जैसी नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षक प्रशिक्षण सिर्फ किताबी ज्ञान या थ्योरी तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रशिक्षण सत्रों में सीखी गई बातों का असर रोजमर्रा की कक्षाओं में स्पष्ट दिखना चाहिए।
शिक्षा मंत्री ने पारंपरिक तरीकों की जगह बच्चों पर केंद्रित और संवाद आधारित पढ़ाई की वकालत की। उनका कहना था कि इस मॉडल से बच्चे अपनी स्वाभाविक प्रतिभा पहचान सकेंगे, अपनी रुचियों को तलाशेंगे और शैक्षणिक ज्ञान के साथ-साथ उपयोगी जीवन कौशल भी सीख पाएंगे। वहीं शिक्षा में डिजिटल तकनीक के उपयोग पर उन्होंने कहा कि सही दिशा-निर्देश और उपयुक्त डिजिटल सामग्री मुहैया कराना बेहद जरूरी है, ताकि तकनीक का सही मायनों में सीखने के नतीजों पर सकारात्मक असर पड़े।
प्रशासनिक तैयारी और संस्थागत सहयोग
शिक्षा विभाग के आयुक्त एवं सचिव विजय कुमार मांत्री ने बताया कि मेघालय ने प्रारंभिक चरण की शिक्षा, रचनात्मक मूल्यांकन, अनुभवात्मक शिक्षा और योग्यता आधारित शिक्षण पद्धतियों में ठोस प्रगति की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नीति का प्रभावी क्रियान्वयन शिक्षा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के दौरान शिक्षा मंत्री लहकमेन रिम्बुई, आयुक्त एवं सचिव विजय कुमार मांत्री, डीईआरटी की निदेशक जे. यू. खारपुरी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। भारती एयरटेल फाउंडेशन शिक्षक विकास, स्कूल लीडरशिप, डिजिटल शिक्षा और संस्थागत क्षमता निर्माण के क्षेत्र में काम करती है। मेघालय सरकार के साथ इसका यह गठजोड़ एमटीटीए को अधिक सक्रिय बनाने और राज्य भर के शिक्षकों के लिए सीखने के सतत अवसर तैयार करने की दिशा में काम करेगा।























