शिक्षा की कोई उम्र नहीं होती और इस बात को मेघालय के हजारों नागरिक सच कर दिखा रहे हैं। औपचारिक स्कूली शिक्षा अधूरी छोड़ देने वाले व्यक्तियों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए राज्य में एक विशेष अवसर उपलब्ध कराया गया है। इस व्यवस्था के माध्यम से ऐसे नागरिकों को बिना नियमित स्कूल जाए सेकेंडरी स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट यानी एसएसएलसी परीक्षा उत्तीर्ण करने की सुविधा मिल रही है। दिसंबर 2026 में आयोजित होने वाली इस प्राइवेट दसवीं परीक्षा के लिए राज्य भर से कुल 9,767 अभ्यर्थियों ने अपना नाम दर्ज करवाया है।
चार दशक बाद 59 साल के सिलवेस्टर की नई शुरुआत
इस पूरी मुहिम में सबसे प्रेरक चेहरा री भोई जिले के थाडरांग उमंगेम गांव के निवासी 59 वर्षीय सिलवेस्टर शादाप बनकर उभरे हैं। वर्ष 1989 में स्कूल छोड़ने वाले सिलवेस्टर नामांकित सभी 9,767 उम्मीदवारों में सबसे अधिक आयु के परीक्षार्थी हैं। लगभग सैंतीस वर्षों के लंबे अंतराल के बाद किताबों की दुनिया में वापसी करना आसान नहीं रहा है, विशेष रूप से तब जब समय के साथ पूरा पाठ्यक्रम बदल चुका है। इसके बावजूद सिलवेस्टर ने कठिन परिश्रम करने का दृढ़ संकल्प जताया है और उनका मानना है कि उनकी यह कोशिश उन बच्चों और वयस्कों को फिर से पढ़ने के लिए प्रेरित करेगी जिनकी पढ़ाई बीच में छूट गई थी।
राज्य के सभी जिलों में फैला अध्ययन नेटवर्क
इस शैक्षणिक कार्यक्रम में उम्र की कोई अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं की गई है, जिससे लंबे समय से पढ़ाई से दूर रहे हर वर्ग के लोग इसमें शामिल हो सके हैं। राज्य के सभी 12 जिलों से किशोरों, युवाओं और प्रौढ़ शिक्षार्थियों ने इसमें पंजीकरण कराया है। अकेले री भोई जिले से 690 लोगों ने फॉर्म भरा है, जिनमें मावलासनई केंद्र पर 185 शिक्षार्थी पंजीकृत हैं। उम्मीदवारों की सुविधा और स्थानीय स्तर पर मूल्यांकन सुनिश्चित करने के लिए पूरे मेघालय में 171 लर्निंग एंड असेसमेंट सेंटर्स की स्थापना की गई है।
साझा प्रयास और पाठ्य सामग्री का वितरण
यह महत्वपूर्ण पहल मेघालय सरकार, मेघालय बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन यानी एमबीओएसई और मेघालय प्रोग्राम फॉर एडोलसेंट वेलबीइंग, एम्पावरमेंट एंड रेजिलिएंस यानी एमपॉवर के संयुक्त समन्वय से संचालित की जा रही है। जहां एमबीओएसई परीक्षा संचालन और अकादमिक रूपरेखा संभाल रहा है, वहीं एमपॉवर पर समुदाय को जोड़ने, मार्गदर्शन देने, पंजीकरण कराने और शिक्षार्थियों की लगातार प्रगति पर नजर रखने का दायित्व है। परीक्षार्थियों की तैयारी को सुगम बनाने के लिए खासी, गारो, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, अंग्रेजी और स्वास्थ्य जैसे विषयों की अध्ययन सामग्री तैयार कर निःशुल्क बांटी गई है।
भविष्य के अवसरों और राष्ट्रीय नीति से जुड़ाव
यह योजना मुख्य रूप से उन लोगों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है जिन्होंने आर्थिक तंगी, पारिवारिक जिम्मेदारियों, पलायन, कम उम्र में विवाह अथवा भौगोलिक दुर्गमता के चलते स्कूल छोड़ दिया था। इसका दायरा केवल दसवीं की मार्कशीट तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तीर्ण होने वाले छात्रों को आगे उच्चतर माध्यमिक शिक्षा, वोकेशनल कोर्सेज, कौशल प्रशिक्षण और आजीविका के नए साधनों से जोड़ना भी इसका प्रमुख लक्ष्य है। यह पूरी कार्ययोजना नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 के अनुरूप है, जो लचीले सीखने के रास्तों, समावेशी शिक्षा और जीवनपर्यंत सीखने के सिद्धांत पर जोर देती है।



















