मेघालय सरकार द्वारा हाल ही में सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी की गई राज्य कृषि नीति 2026 के मसौदे में बड़े नीतिगत बदलावों की मांग उठने लगी है। वॉइस ऑफ द पीपल्स पार्टी (वीपीपी) की राज्य युवा विंग ने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री टिमोथी डी. शिरा को एक विस्तृत सुझाव पत्र सौंपकर उपज के भंडारण, न्यूनतम समर्थन मूल्य, कोल्ड चेन नेटवर्क और ग्रामीण रोजगार से जुड़े कड़े सुरक्षा उपाय शामिल करने की अपील की है। संगठन का मानना है कि केवल उत्पादन बढ़ाने के बजाय वास्तविक रूप से किसानों की आय बढ़ाने के लिए विपणन तंत्र में बिचौलियों पर लगाम कसना बेहद जरूरी है।
कृषि नीति 2026 के मसौदे की पृष्ठभूमि और चुनौतियां
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने 13 सितंबर को मेघालय की पहली राज्य कृषि नीति का 61 पन्नों का मसौदा जनता की राय के लिए पेश किया था। इस मसौदे का केंद्रीय लक्ष्य कृषि क्षेत्र की प्राथमिकताओं को उपज की मात्रा बढ़ाने से बदलकर किसानों की शुद्ध आय में इजाफा करने पर केंद्रित करना है। राज्य सरकार के इस दस्तावेज में पूर्वोत्तर राज्य की खेती-किसानी से जुड़ी कई गंभीर ढांचागत कमजोरियों की पहचान की गई है, जिनमें कमजोर बाजार व्यवस्था, बिचौलियों पर अत्यधिक निर्भरता, छोटी और बिखरी हुई जोत, सिंचाई के अपर्याप्त साधन, कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे की कमी और मूल्य संवर्धन के सीमित अवसर शामिल हैं।
इन बाधाओं को दूर करने के लिए मसौदा नीति में 15 सूत्रीय कार्ययोजना प्रस्तावित की गई है। इस रणनीति के तहत मिट्टी की सेहत सुधारने, सिंचाई व्यवस्था दुरुस्त करने, जैविक खेती को बढ़ावा देने, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के गठन, यंत्रीकरण, रणनीतिक फसलों के चयन, कोल्ड चेन नेटवर्क के विकास, निर्यात प्रोत्साहन, आधुनिक तकनीक के प्रयोग और जलवायु अनुकूल पद्धतियों पर जोर दिया गया है। इसी प्रस्तावित रूपरेखा के मद्देनजर 30 सितंबर को वीपीपी की युवा इकाई ने अपने आधिकारिक सुझाव सरकार को प्रेषित किए।
बिचौलियों पर नियमन और कोल्ड स्टोरेज पर सब्सिडी की सिफारिश
युवा विंग द्वारा सौंपे गए पत्र में सबसे प्रमुख मांग प्रत्येक जिले में सौर ऊर्जा से संचालित कोल्ड स्टोरेज स्थापित करने की रखी गई है। खराब होने वाली जल्दी सड़ने वाली फसलों का कारोबार करने वाले किसान उत्पादक संगठनों को इन कोल्ड स्टोरेज की स्थापना के लिए 80 प्रतिशत तक की सरकारी सब्सिडी देने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके साथ ही, मेघालय राज्य कृषि विपणन बोर्ड (एमएसएएमबी) के तहत सभी बिचौलियों, विपणन एजेंटों और एग्रीगेटर्स के अनिवार्य लाइसेंसिंग और कड़े नियमन की वकालत की गई है।
संगठन का कहना है कि कानूनी नियमन से खरीद केंद्रों पर किसानों से होने वाली अनधिकृत 'किलो कटिंग' जैसी अनुचित प्रथाओं पर पूरी तरह रोक लगेगी और काश्तकारों को उनकी उपज का पारदर्शी मूल्य मिल सकेगा। सीधे बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए नियंत्रित ग्रामीण हाट-बाजारों, संकलन केंद्रों और जिला स्तर पर सुव्यवस्थित कोल्ड चेन बुनियादी ढांचे के तेजी से विस्तार पर भी जोर दिया गया है।
मूल्य अस्थिरता पर 72 घंटे में खरीद और सात दिन में भुगतान
फसलों की कीमतों में अचानक आने वाली भारी गिरावट से किसानों को बचाने के लिए युवा विंग ने एक स्वचालित सुरक्षा तंत्र का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत यदि किसी फसल के खुले बाजार के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से 15 प्रतिशत नीचे चले जाते हैं, तो सरकार को 72 घंटे के भीतर तत्काल हस्तक्षेप कर स्वचालित खरीद शुरू करनी चाहिए। साथ ही, बेची गई उपज का पैसा डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए 7 days के भीतर सीधे किसान के बैंक खाते में जमा होना चाहिए।
पत्र में बुवाई के सीजन से पहले ही ट्रिगर कीमतों की औपचारिक घोषणा करने की सिफारिश की गई है। प्राकृतिक आपदाओं, अकाल या सूखे के दौरान सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) और मध्याह्न भोजन योजना (मिड-डे मील) के लिए चावल और हरी सब्जियों की खरीद एमएसपी दरों पर करने की बात कही गई है। इसके अलावा, खराब मौसम के दौरान किसानों की नष्ट होने की कगार पर पहुंची उपयोगी उपज खरीदने के लिए गांव-गांव तक मोबाइल वैन तैनात करने और स्थानीय स्वदेशी बीजों के लिए ग्राम स्तर पर सीड बैंक बनाने व मुफ्त फसल बीमा देने का भी अनुरोध किया गया है।
स्थानीय युवाओं के लिए 80 प्रतिशत आरक्षण और रोपवे मॉडल
कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण के साथ स्थानीय युवाओं की भागीदारी तय करने के लिए युवा विंग ने एक विशेष रोजगार शर्त जोड़ने का सुझाव दिया है। इसके अनुसार राज्य के कृषि बुनियादी ढांचे और एग्री-हब्स में सृजित होने वाली नौकरियों में 80 प्रतिशत पद स्थानीय युवाओं के लिए आरक्षित किए जाने चाहिए, साथ ही निर्माण व आपूर्ति में स्थानीय सामग्री को पहली प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
अतिरिक्त कृषि उपज के मूल्य संवर्धन के लिए जिला क्लस्टर स्तर पर सूक्ष्म प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने का सुझाव है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) के तहत युवाओं और स्वयं सहायता समूहों को 80 प्रतिशत सब्सिडी देकर इन्हें बढ़ावा दिया जा सकता है, ताकि मूल्य संवर्धन का पूरा लाभ सीपीपीपी मॉडल के अंतर्गत मेघालय के भीतर ही बना रहे। पहाड़ी इलाकों में परिवहन की लागत 70 प्रतिशत तक घटाने के लिए कृषि अथवा गुरुत्वाकर्षण आधारित रोपवे की पायलट परियोजनाएं शुरू करने का प्रस्ताव भी दिया गया है। इसमें 80 प्रतिशत सब्सिडी सरकार वहन करेगी, जबकि संचालन का जिम्मा स्थानीय प्रशिक्षित युवा और रखरखाव एफपीओ संभालेंगे। वीपीपी युवा विंग के अध्यक्ष बाह मारबुड डखार और सचिव बाह नथानिएल मॉरी द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र की प्रति कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के आयुक्त एवं सचिव को भी कार्रवाई हेतु भेजी गई है।





















